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एक ही चेसिस-इंजन नंबर पर 16 हजार वाहन रजिस्टर्ड... CAG रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

CAG की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, सात पूर्वोत्तर राज्यों में लगभग 16,000 वाहन एक ही चेसिस और इंजन नंबर पर पंजीकृत पाए गए हैं. यह गंभीर गड़बड़ी राज्य परिवहन तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है.

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CAG रिोपर्ट सामने आने के बाद अधिकारियों में हडकंप मचा हुआ है (Photo- Representational)
CAG रिोपर्ट सामने आने के बाद अधिकारियों में हडकंप मचा हुआ है (Photo- Representational)

पूर्वोत्तर भारत के परिवहन क्षेत्र में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है. CAG की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, सात पूर्वोत्तर राज्यों में लगभग 16,000 वाहन एक ही चेसिस और इंजन नंबर पर पंजीकृत पाए गए हैं. यह गंभीर गड़बड़ी राज्य परिवहन तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक असम राज्य राजस्व पर मार्च 2024 तक की अवधि के लिए जारी रिपोर्ट में CAG ने कहा कि VAHAN डाटाबेस की जांच के दौरान यह सामने आया कि कुल 15,849 वाहन समान चेसिस और इंजन नंबर के साथ विभिन्न राज्यों में पंजीकृत हैं.

इनमें से 12,112 वाहन (करीब 76 प्रतिशत) को बिना ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) के असम में दोबारा पंजीकृत कर दिया गया, जिसे रिपोर्ट में अनियमित बताया गया है.

पंजीकरण ज्यादा, परमिट कम

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2019-24 के दौरान लगभग 1.19 लाख पंजीकृत वाहनों के मुकाबले केवल 26,105 परिवहन वाहन परमिट जारी किए गए. यानी महज 21.87 प्रतिशत वाहनों को ही वैध परमिट मिला. CAG ने कहा कि परमिट जारी करने में ढिलाई और सख्ती की कमी के कारण राजस्व नुकसान, नियामकीय खामियां और अनियंत्रित वाणिज्यिक परिवहन संचालन में बढ़ोतरी हुई है.

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रिपोर्ट के अनुसार, 1.29 लाख वाणिज्यिक वाहनों में से 29,560 वाहनों ने मोटर वाहन (MV) टैक्स का भुगतान नहीं किया. इससे मार्च 2024 तक 61.28 करोड़ रुपये का कर घाटा और 24.53 करोड़ रुपये का जुर्माना बकाया रहा.

इसके अलावा, आठ चयनित जिलों में 1.51 लाख वाहनों से MV टैक्स में देरी पर जुर्माना नहीं वसूलने के कारण 3.79 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व नुकसान हुआ.

स्कूल बसों में भी गड़बड़ी

2019-24 के दौरान आठ जिलों में स्कूल बसों को ‘Educational Institution Bus (EIB)’ परमिट के बजाय ‘Contract Carriage’ परमिट जारी किए गए. इससे अनिवार्य फिटनेस जांच से बचाव हुआ और EIB परमिट के मूल उद्देश्य को दरकिनार किया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि इस विचलन के लिए कारणों का अभिलेख न होना नियामकीय लापरवाही और संभावित प्रक्रियागत अनियमितताओं की ओर संकेत करता है.

CAG ने पाया कि जारी किए गए लर्नर लाइसेंस और ड्राइविंग लाइसेंस में से 7.85 प्रतिशत मामलों में ड्राइविंग टेस्ट की तिथि दर्ज ही नहीं थी. इसके अलावा, 2019-24 के दौरान 40 में से 24 मामलों में प्रतिदिन अत्यधिक संख्या में ड्राइविंग टेस्ट स्लॉट दर्ज पाए गए, जो प्रक्रियागत शिथिलता या मूल्यांकन की कठोरता में कमी का संकेत देता है.

पंजीकरण में भारी देरी

अप्रैल 2019 से जून 2023 के बीच चयनित आठ जिलों में डीलर स्तर पर वाहन पंजीकरण में व्यापक देरी देखी गई. कई मामलों में निर्धारित समय सीमा से 1 दिन से लेकर 1,417 दिनों तक की देरी दर्ज की गई. करीब 35 प्रतिशत पंजीकृत वाहनों के पते वैध दस्तावेजों से ठीक से लिंक नहीं पाए गए.

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नमूने के तौर पर जांचे गए 72 माइग्रेटेड वाहनों में से 55 वाहन दो राज्यों में एक साथ पंजीकृत पाए गए, जिससे कराधान और प्रवर्तन में विसंगतियां उत्पन्न हुईं. 4,200 विलंबित पुन: असाइनमेंट मामलों में जुर्माना न लगाने से 6.42 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ. चयनित जिलों में 2015-22 के दौरान पंजीकृत 1,396 वाहनों से 23.80 करोड़ रुपये का वन-टाइम टैक्स (OTT) बकाया रहा.

CAG ने कहा कि बकाया OTT के लिए मांग नोटिस जारी न किए जाने से प्रवर्तन की कमजोरी उजागर होती है और संभावित राजस्व नुकसान की आशंका बढ़ती है. साथ ही, सात DTO कार्यालयों में दर्ज 2,71,388 मामलों में से 64 प्रतिशत जुर्माना वसूल नहीं किया गया, जिससे प्रवर्तन क्षमता प्रभावित हुई.

प्रदूषण नियंत्रण और स्टाफ की कमी

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के बावजूद उत्सर्जन मानकों और पुराने वाहनों को चरणबद्ध हटाने के उपायों को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया गया. इससे वायु गुणवत्ता प्रबंधन पर प्रश्नचिह्न लगा है. असम में वाहनों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है, लेकिन परिवहन विभाग में 30 से 57 प्रतिशत तक पद रिक्त हैं. CAG ने कहा कि प्रभावी नियमन और सड़क सुरक्षा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए मानव संसाधन बढ़ाना अत्यावश्यक है.

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