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मोबाइल, इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते डोभाल तो कैसे करते हैं कम्युनिकेट? खुद दिया जवाब

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में कहा कि वह निजी संवाद के लिए आमतौर पर मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते और संपर्क के ऐसे दूसरे तरीके भी मौजूद हैं, जिनकी जानकारी आम लोगों को नहीं होती. कार्यक्रम में देशभर से करीब 3 हजार युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास समेत हर क्षेत्र में खुद को मजबूत करना होगा, ताकि गुलामी और हमलों के इतिहास का जवाब दिया जा सके.

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अजित डोभाल ने कहा कि वह पर्सनल कम्युनिकेशन के लिए मोबाइल और इंटरनेट का कम इस्तेमाल करते हैं. (File Photo: ITG)
अजित डोभाल ने कहा कि वह पर्सनल कम्युनिकेशन के लिए मोबाइल और इंटरनेट का कम इस्तेमाल करते हैं. (File Photo: ITG)

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने रविवार को कहा कि वह पर्सनल कम्युनिकेशन के लिए आमतौर पर मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन कम्युनिकेशन के ऐसे दूसरे तरीके मौजूद हैं, जिनके बारे में आम लोगों को जानकारी नहीं होती.

दिल्ली में आयोजित 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' के उद्घाटन समारोह के दौरान एक सवाल के जवाब में डोभाल ने कहा, 'मुझे नहीं पता आपको कैसे मालूम हुआ कि मैं फोन इस्तेमाल नहीं करता. हां, यह सच है कि निजी जरूरतों को छोड़कर मैं न तो इंटरनेट का इस्तेमाल करता हूं और न ही फोन का. मैं इनके बिना काम चला लेता हूं. कभी-कभी जब विदेश में किसी से संपर्क करना होता है, तब इनका इस्तेमाल करता हूं. इसके अलावा भी कम्युनिकेशन के कुछ और साधन हैं, जो आम आदमी को पता नहीं हैं.'

'आप सौभाग्यशाली हैं जो आजाद भारत में जन्म लिया'

इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 3 हजार युवा प्रतिनिधि शामिल हुए थे और अजित डोभाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत को केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास और हर क्षेत्र में खुद को मजबूत करना होगा, ताकि हम हमलों और गुलामी के दर्दनाक इतिहास का जवाब दे सकें.

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स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए डोभाल ने कहा, 'आप सौभाग्यशाली हैं कि स्वतंत्र भारत में जन्म लिया. मेरा जन्म एक गुलाम भारत में हुआ था. हमारे पूर्वजों ने आजादी के लिए संघर्ष किया और अनगिनत कष्ट सहे.' उन्होंने कहा कि भगत सिंह को फांसी दी गई, सुभाष चंद्र बोस ने जीवनभर संघर्ष किया और महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा, तब जाकर देश आजाद हुआ.

'मुझे 1000 शेरों से डर नहीं लगता...'

डोभाल ने स्पष्ट किया कि भले ही ‘बदला’ शब्द पॉजिटिव न लगे, लेकिन यह एक ताकत के रूप में काम कर सकता है. उन्होंने कहा, 'हमें अपने इतिहास के लिए जवाब देना है और देश को फिर से महान बनाना है, न सिर्फ सीमा सुरक्षा के मामले में, बल्कि अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास और हर पहलू में.'

युवाओं को भविष्य का नेता बताते हुए उन्होंने मजबूत नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण दिया. नेपोलियन का हवाला देते हुए डोभाल ने कहा, 'मुझे हजार शेरों से डर नहीं लगता, जिनका नेतृत्व एक भेड़ कर रही हो, लेकिन मुझे हजार भेड़ों से डर लगता है, जिनका नेतृत्व एक शेर कर रहा हो.'

कार्यक्रम के निमंत्रण से हैरान थे डोभाल

उन्होंने कहा कि दुनिया में ज्यादातर संघर्ष सुरक्षा से जुड़े कारणों से होते हैं. संघर्ष इसलिए नहीं होते कि लोग हिंसा देखकर खुश होते हैं, बल्कि इसलिए होते हैं क्योंकि आप अपनी सुरक्षा के लिए दुश्मन देश को अपने शर्तों पर झुकाना चाहते हैं. अपने भाषण की शुरुआत मजाकिया अंदाज में करते हुए डोभाल ने कहा कि वह युवाओं को संबोधित करने के निमंत्रण से हैरान थे, क्योंकि कार्यक्रम में मौजूद ज्यादातर युवा उनसे करीब 60 साल छोटे हैं. 

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