आजतक रेडियो' के मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में आज हम बात करेंगे नीतीश कुमार की, जिनकी पार्टी के नेताओं के सुर उनकी सहयोगी पार्टी बीजेपी से मिल नहीं रहे हैं. कई बार वो बीजेपी के विचारों से अलग राय रखते रहते हैं. क्या आने वाले वक्त में मोदी विरोधी फ्रंट में नीतीश की भी भूमिका होगी? चर्चा भारत-चीन तनाव को लेकर भी होगी. दोनों देशों के बीच कल 12वें दौर की बातचीत हुई, तो क्या सीमा पर डटा चीन अब पीछे हटेगा? और तीसरी लहर की चिंता के बीच कोरोना की R नॉट वैल्यू 1 से ऊपर जा चुकी है तो ये कितनी चिंता की बात है?
आजतक रेडियो पर हम रोज़ लाते हैं देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’, जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की ख़बरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अख़बारों की सुर्ख़ियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. आगे लिंक भी देंगे लेकिन पहले जान लीजिए कि आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं.
1. मोदी विरोधी फ्रंट में नीतीश की भूमिका भी होगी?
संसद से लेकर सड़क तक पेगासस जासूसी मामले में विपक्ष केंद्र सरकार को लगातार घेर रहा है. इसी के साथ अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेगासस जासूसी मामले को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए. इसके अलावा जेडीयू नेता ने इस जासूसी मामले की जांच की बात भी कही है. नीतीश कुमार का ये बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि उनकी पार्टी बीजेपी के साथ बिहार में गठबंधन में है. वहीं बीजेपी इस मुद्दे पर बात करने से बच रही है और मंत्री ये बयान दे रहे हैं कि पेगासस जासूसी मामला कोई मुद्दा ही नहीं है.
वहीं नीतीश कुमार के इस बयान पर आरजेडी सांसद मनोझ झा ने प्रतिक्रिया देते हुए चुटकी ली. उन्होंने कहा कि, मैं नीतीश कुमार से अपील करता हूं कि वो अपने इस बयान पर टिके रहें. मुझे उम्मीद है कि वो दबाव में आकर अब ये नहीं कहेंगे कि मेरे बयान का ग़लत मतलब निकाला गया. खै़र नीतीश कुमार ने जो ये बयान दिया है वो अपने आप तो कई सवाल खड़े करते ही है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से लगातार वो कुछ ऐसा कर रहे हैं जो बीजेपी की आइडियोलॉजी से ठीक उलट है.
नीतीश कुमार ने अपने धुर राजनीतिक विरोधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ जातिगत जनगणना के मुद्दे पर मुलाकात भी की है और बीजेपी का रुख अलग है. फिर कुछ ही दिन पहले उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला से मुलाकात की. वैसे तो इस मुलाकात को गैर-राजनीतिक बताया जा रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में अब इसके कई मायने निकाले जाने लगे हैं. तो नीतीश का चेंज ऑफ स्टैंड वो भी बीजेपी से ठीक उलट क्या इंडिकेट कर रहा है? आखिर नीतीश कुमार क्या करने की कोशिश कर रहे हैं?
2. क्या पीछे हटने को तैयार होगा चीन?
पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी की झड़प के तो एक साल पूरे हो गए हैं लेकिन चीनी सैनिक अब भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास डेरा डाले हुए हैं. इस बीच भारत ने भी उसका मुकाबला करने के लिए खास तैयारी की है. विवाद वाले बिंदुओं पर सीमा विवाद को सुलझाने के लिए भारतीय और चीनी सैन्य प्रतिनिधियों के बीच कई बार बातचीत हुई लेकिन इनका कोई ख़ास मतलब नहीं निकला.
अभी 31 जुलाई 2021 को ही भारत-चीन के बीच 12वें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई थी. जिसमें भारत और चीनी सेना के कमांडर लेवल के अधिकारी शामिल थे. एलएसी के चीन के पक्ष की ओर ओल्डी में हुई यह बैठक सुबह शुरू हुई थी, जोकि शाम साढ़े सात बजे तक चली. नौ घंटे की मैराथन बैठक में तनाव को कम करने को लेकर बातचीत की गई. इस बातचीत का मकसद ही था कि पूर्वी लद्दाख में अगले चरण के सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़े और एक समझौते पर पहुंचा जा सके. हालांकि पिछले दिनों एलएसी विवाद को खत्म करने के लिए चीन ने 26 जुलाई को बातचीत करने का सुझाव दिया था, जिसे भारत ने कारगिल विजय दिवस के चलते खारिज कर दिया था. बाद में बातचीत के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की गई थी.
अब इस मीटिंग को लेकर दोनों देशों ने ज्वाइंट स्टेटमेंट में कोर कमांडर स्तर की बातचीत को रचनात्मक बताया है. बयान में कहा गया है कि इस बातचीत के जरिए आपसी समझ में और बढ़ोतरी होगी. तो इस मीटिंग से कितना बड़ा ब्रेकथ्रू मिला है इससे पहले हुईं 11 दौर के बातचीत के मुकाबले? क्या अब चीनी सेना पीछे हट जाएगी?
3. कोरोना की R नॉट वैल्यू कितनी बड़ी मुसीबत?
अब बात कोरोनावायरस पर. जिस तरह से केसेस बढ़ रहे हैं और रिकवरी रेट घट रहा है वैसे वैसे ही ये कयास जोर पकड़ने लगे हैं कि तीसरी लहर अब दूर नहीं है. अब कल ही हमने आपको हमारे शाम के न्यूज़ एनालिसिस पॉडकास्ट दिनभर में बताया था कि आईआईटी के दो रिसर्चर्स ने ये अनुमान लगाया है कि तीसरी लहर इसी महीने से शुरू हो जाएगी हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ये लहर छोटी होगी.
अब इसी कड़ी में इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइंसेज इन चेन्नई की एक रिपोर्ट की फाइंडिंग्स कहती है कि 7 मई के बाद पहली बार R नॉट या R वैल्यू एक से ऊपर क्रॉस किया है. Rnot यानी कोई एक संक्रमित इंसान और कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है और आपको बता दूं की पब्लिक हेल्थ अथॉरिटीज का ये कहना है की ये वैल्यू 1 से नीचे होनी चाहिए. और इस वैल्यू का बढ़ना तीसरी लहर के लिए एक चिंता का सबब बन सकता है ऐसा चेन्नई के इस इंटीट्यूट के कुछ प्रोफेसर और रिसर्चर्स का कहना है.
तो ये वैल्यू बढ़ना वो भी ऐसे समय में जब तीसरी लहर दस्तक देने के करीब है तो ये कितनी बड़ी मुसीबत है? अगर ये लगातार बढ़ती है तो फिर क्या करें इसे कम करने के लिए?