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आज का दिन: क्या देश में लगने वाली कोरोना वैक्सीन एक्सपायर हो चुकी हैं?

कल सूत्रों के हवाले से एक ख़बर आई जिसमें कहा गया कि सरकार expiry हो चुके वैक्सीन की रीलेबलिंग करके मार्केट में ला रही है. इस पर सवाल उठे तो सरकार की तरफ से बयान जारी करके इसे आधा सच बताया गया और इसका खंडन किया गया. जिसके बाद वैक्सीन्स की expiry डेट को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या वैक्सीन का कोई expiry डेट होता और क्या ये वाक़ई एक कन्सर्न का विषय है?

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सांकेतिक तस्वीर.
सांकेतिक तस्वीर.

ओमिक्रॉन वेरिएंट को एक और साउथ साउथ अफ्रीका में माइल्ड कहा जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका और स्कॉटलैंड जैसे देशों में ओमिक्रॉन की वज़ह से हॉस्पिटलाइजेशन रेट दूसरी लहर के मुकाबले 2 गुना ज्यादा है. बात अगर भारत की करें तो दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट साढ़े छह फ़ीसदी से ज्यादा हो गया है तो वहीं मुंबई पॉजिटिविटी रेट 16 फ़ीसदी से ज्यादा है और 89 फ़ीसदी कोरोना के मरीज़ asymptomatic हैं.

पिछले हफ्ते की ही बात थी जब देश में 20 दिसंबर से 26 दिसंबर तक कोरोना के करीब 46,000 नए मरीज मिले थे, जो मई, 2020 के बाद एक सप्ताह में नए मरीजों की सबसे कम संख्या थी. मगर 27 दिसंबर से 2 जनवरी तक देश में 1 लाख 20 हज़ार कोविड केस आ गए हैं. मतलब एक हफ्ते में ही कोरोना के केस में 200 फ़ीसदी का उछाल है.

अब देशभर में ओमिक्रॉन संक्रमितों का आंकड़ा क़रीब साढे सतरह सौ पहुंच चुका है.  इसी बीच कल सूत्रों के हवाले से एक ख़बर आई जिसमें कहा गया कि सरकार expiry हो चुके वैक्सीन की रीलेबलिंग करके मार्केट में ला रही है. इस पर सवाल उठे तो सरकार की तरफ से बयान जारी करके इसे आधा सच बताया गया और इसका खंडन किया गया. जिसके बाद वैक्सीन्स की expiry डेट को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या वैक्सीन का कोई expiry डेट होता और क्या ये वाक़ई एक कन्सर्न का विषय है?

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दो बरस कोविड के बीत गए. हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की चरमराई हुई स्थितियों से हम दो चार हुए लेकिन कोविड से सबसे अधिक जो सेक्टर प्रभावित हुआ, इस दरमियान वो था इकोनॉमी. तमाम कोशिशों के बावज़ूद अर्थव्यवस्था वो छलांग न लगा सकी जिसकी गवर्नमेंट को चाहत थी. और इसका रिफ्लेक्शन गाहे-बगाहे एम्प्लॉयमेंट पर भी दिखा. भारत में नौकरियो के नम्बरस को एक थिंक-टैंक बहुत नज़दीकी से फॉलो करता है. थिंक टैंक का नाम आपने पहले भी कई दफ़ा सुना होगा. CMIE,  यानी कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी. जब भी देश मे बेरोजगारी की ताजा स्थिति को समझना हो तो सीएमआई के आंकड़ों का ज़िक्र हो ही जाता है. CMIE के नये आंकड़ों के मुताबिक भारत में बेरोजगारी दर दिसम्बर में करीब आठ फीसदी रही. ये नम्बर पिछले चार महीनों में सबसे अधिक है, ऐसे में, ये बढ़ोतरी ओवरऑल हमारे सामने क्या तस्वीर इकोनॉमी और नौकरियों की रख रही है और क्या रिसेंट कोविड सर्ज भी इसमें रिफ्लेक्ट हो रहा है?

भारत और चीन के बीच सीमा पर चल रही रंजिश इस वक्त किससे छिपी है. आए दिन ख़बर आती रहती है कि चीन का किस तरह से सीमावर्ती इलाकों में अतिक्रमण बढ़ाता जा रहा है. लेकिन चीन के साथ गतिरोध के दौर में भी उसके साथ व्यापार के आंकड़े जो हैं वो चौंकाते हैं. पिछले ग्यारह महीनों में भारत-चीन के बीच का ब्यापार सौ अरब अमेरिकन डॉलर्स से भी ऊपर का हो गया है. इस पर आप चाहें तो आश्चर्य कर सकते हैं. चीन के ख़िलाफ  बयानबाजी होती है, यहाँ तक की बहिष्कार तक के भी अभियान चलते हैं, पर हक़ीक़त ये आंकड़े बयां करते हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, साल 2001 में 1.83 अरब अमेरिकी डॉलर से शुरू हुआ दोनों पक्षों का ये व्यापार इस साल के 11 महीनों के अंदर 100 अरब डॉलर का हो गया.  पिछले महीने चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ कस्टम्स ने भी आंकड़े जारी किए थे जिनके अनुसार भारत और चीन के बीच का व्यापार 114 अरब डॉलर से ज़्यादा का हो गया है जो कि जनवरी से नवंबर 2021 के बीच क़रीब  46 प्रतिशत तक बढ़ा है. अब यहां सवाल ये है कि चीन आए दिन जब सीमा पर हालात बिगाड़ने की कोशिशें करता रहता है, जिससे भारतीय सेना की मुश्किलें बढ़ती हैं.  और तमाम वार्ताओं,मुलाकातों के दौर के बाद भी विवादों का हल नहीं निकल पाता  तो वो कौन सी आर्थिक मजबूरियां हैं जिनके चलते हम चीन से व्यापार करने को मजबूर हैं?
 
भारत दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जरूर है लेकिन लगातार चोटिल हो रहे भारतीय खिलाड़ी टीम के लिए चिंता बढ़ा रहे हैं. रोहित, सिराज, श्रेयस के बाद कोहली के चोटिल होने की भी ख़बर आई है. बरहहाल, इन्हीं घटनाओं के बीच कल भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दूसरा टेस्ट मैच शुरू हुआ. चोटिल कोहली की जगह कप्तानी का भार के.एल राहुल के कंधों पर आ गया. भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया और महज़ 202 रनों पर पूरी टीम ऑलआउट हो गई. जिसके बाद पहले दिन का खेल ख़त्म होने तक दक्षिण अफ्रीका ने 1 विकेट गंवाकर 35 रन बना लिए थे. खैर, अब जो काम की बात है, वो ये है कि लगातार कई महीने से भारत का मिडिल ऑर्डर बैटिंग उसके लिए चिंता का विषय बना है, जो एक लंबे समय से प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है और इसमें जो सबसे बड़ा नाम आता है वो है अजिंक्य रहाणे और चतेश्वर पुजारा का, जिनके फॉर्म को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. कल भी रहाणे शून्य और पुजारा तीन रन पर चलते बने. तो इन तमाम बिंदुओं को समेटते हुए क्या अब ये कहा जा सकता है कि भारतीय टीम को एक नए और यंग मीडिल ऑर्डर की जरूरत पड़ने लगी है?

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4 जनवरी 2022 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें...

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