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रूसी सेना में शामिल हुए 217 भारतीय, 49 की मौत... सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अब तक 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए, जिनमें 49 की मौत हो चुकी है. सरकार के अनुसार कई लोगों को मोटी सैलरी, बोनस और रूसी नागरिकता का लालच देकर भर्ती किया गया. कूटनीतिक प्रयासों से 139 भारतीयों को सेना के अनुबंध से मुक्त कराया गया है, जबकि कई अब भी लापता हैं.

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई. (File Photo- PTI)
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई. (File Photo- PTI)

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि अब तक कुल 217 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से 49 भारतीयों ने इस भीषण संघर्ष में अपनी जान गंवा दी है.

यह रिपोर्ट उन 26 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पेश की गई, जिन्हें कथित तौर पर रूस में बंधक बनाकर जबरन युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किया गया था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई.

$5,000 बोनस और नागरिकता का लालच

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐशवर्या भाटी द्वारा कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय नागरिक अपनी मर्जी से आकर्षक सैलरी पैकेज और सुविधाओं के लालच में रूसी सेना में शामिल हुए थे. 

रिपोर्ट में कहा गया है, 'इन नागरिकों को करीब 5,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 4 लाख से अधिक रुपये) का साइनिंग बोनस, 2,500 अमेरिकी डॉलर की मासिक सैलरी, रूस की नागरिकता और अन्य सामाजिक लाभों का लालच दिया गया था. इसके अलावा, युद्ध में मौत होने की स्थिति में करीब 1,68,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.4 करोड़ रुपये) के मुआवजे का भी वादा किया गया था.'

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139 भारतीयों को मिला अनुबंध से छुटकारा

भारत सरकार ने कोर्ट को बताया कि रूस के साथ लगातार किए गए कूटनीतिक प्रयासों के कारण 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना के साथ किए गए उनके अनुबंधों से मुक्त करा लिया गया है. हालांकि, अभी भी कई लोग लापता बताए जा रहे हैं. रूसी पक्ष ने 6 भारतीय नागरिकों के लापता होने की पुष्टि की है, जबकि अन्य 23 नागरिकों की स्थिति अभी भी अज्ञात बनी हुई है. मॉस्को में स्थित भारतीय दूतावास इन लापता लोगों का पता लगाने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है.

डीएनए जांच और शवों की वापसी की प्रक्रिया

लापता लोगों की तलाश और मारे गए सैनिकों के शवों की पहचान के लिए भारत सरकार ने एक विशेष कदम उठाया है. अब तक 21 प्रभावित परिवारों के सदस्यों के डीएनए (DNA) सैंपल एकत्र कर रूसी अधिकारियों को सौंपे गए हैं. सरकार ने बताया कि अब तक 8 मामलों में परिवारों की सहमति से पार्थिव शरीर भारत लाए जा चुके हैं, जिसका पूरा खर्च 'भारतीय समुदाय कल्याण कोष' (ICWF) द्वारा वहन किया गया है.

याचिका में जिन 26 विशिष्ट नागरिकों का जिक्र था, उनमें से 14 की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 11 को 'लापता' घोषित किया गया है. वहीं, एक भारतीय नागरिक छेड़छाड़ के आरोपों में रूस में 8 साल की जेल की सजा काट रहा है.

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फर्जी भर्ती नेटवर्क पर सरकार का कड़ा प्रहार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया कि वह उन अवैध भर्ती एजेंटों और मानव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर रही है, जो भारतीय युवाओं को रूस में नौकरी का झांसा देकर युद्ध के मैदान में धकेल रहे थे. सरकार फरवरी 2024 से ही लगातार एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को रूस-यूक्रेन संघर्ष से दूर रहने और वहां रोजगार तलाशते समय बेहद सतर्क रहने की सलाह दे रही है.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने पीड़ित परिवारों को मिलने वाले मुआवजे का मुद्दा भी उठाया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक के लिए विस्तृत रिपोर्ट की समीक्षा करने का फैसला किया है.

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