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Difference In Naval Ships: नौसेना में हैं कई तरह के जहाज, जानिए उनमें क्या होता है अंतर?

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पूरी दुनिया में नेवी अलग-अलग तरह के जहाजों का उपयोग करती है. छोटे जंगी जहाजों से लेकर विशालकाय एयरक्राफ्ट करियर तक. जहाजों को उनके काम के हिसाब से बांटा जाता है. किस जहाज को किस कैटेगरी में डाला जाएगा. यह पहले ही तय कर लिया जाता है. उस देश की नौसेना यह तय करती है कि उसे किस तरह के जहाज की ज्यादा जरूरत है. हम आपको समझा रहे हैं 9 तरह के नौसैनिक जहाजों के बारे में...

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1. विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier)

भारतीय नौसेना का सबसे शानदार विमानवाहक पोत यानी एयरक्राफ्ट करियर है आईएनएस विक्रमादित्य (INS Vikramaditya). ये नौसेना के सबसे बड़े जहाज होते हैं. इनके ऊपर 80 एयरक्राफ्ट तक रखे जा सकते हैं. साथ में ताकतवर कमांडों फोर्स या टैक्टीकल टीम की टुकड़ी. या फिर भारी मात्रा में जवानों को तैनात किया जा सकता है. इनकी सुरक्षा के लिए इनमें बैलिस्टिक से लेकर क्रूज मिसाइलें तक होती हैं. जो परमाणु हमला भी कर सकती हैं. ये समुद्र के अंदर मौजूद किसी भी देश का मोबाइल एयरफोर्स स्टेशन होता है. (फोटोः विकिपीडिया)

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2. एंफीबियस वॉरफेयर शिप्स (Amphibious Warfare ships)

इंडियन नेवी के पास आईएनएस जलाश्व (INS Jalashwa) नाम का एक एंफीबियस वॉरफेयर शिप है. यह एक हमलावर जहाज होता है. जिसमें नौसैनिकों को लेकर किसी देश के तट पर हमला करने के लिए भेजा जाता है. इसमें हेलिकॉप्टर्स और लैंडिंग क्राफ्ट्स तैनात किए जाते हैं. इसका मुख्य मकसद होता है हेलिकॉप्टर के जरिए नौसैनिक परिवहन. इनके ऊपर बड़े लैंडिंग डेक्स होते हैं. ये नौसैनिकों, यंत्रों, हथियारों और बख्तरबंद वाहनों को ले जाने में सक्षम होते हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

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3. लैंडिंग शिप टैंक्स (Landing Ship Tanks)

भारतीय नौसेना के पास मगर क्लास (Magar Class), शार्दूल क्लास (Shardul Class) और कुंभीर क्लास (Kumbhir Class) के कुल मिलाकर आठ लैंडिंग शिप टैंक्स हैं. इनमें मगर क्लास के INS Magar और INS Gharial सबसे वजनी लैंडिंग शिप टैंक्स हैं. इनका काम होता है एंफिबियस वॉरफेयर शिप्स को सपोर्ट करना. ये टैंक्स, वाहन, कार्गो, सैनिक को सीधे उन तटों तक पहुंचाते हैं जहां पर बंदरगाह नहीं होता. ये जहाज सीधे तट पर जाकर पार्क हो जाता है. पहले लैंडिंग शिप टैंक्स की शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के समय हुई थी. (फोटोः विकिपीडिया)

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4. लैंडिंग क्राफ्ट (Landing Craft)

भारतीय नौसेना के पास 8 लैंडिंग क्राफ्ट्स हैं. ये INS LCU 51 से लेकर INS LCU 58 तक हैं. ये एक तरह के बोट्स होते हैं, जिनका उपयोग एंफीबियस ट्रांसपोर्टेशन के लिए किया जाता है. ये टैंक, पहिये वाले वाहन, सैनिकों को जंगी जहाज या एयरक्राफ्ट करियर से लेकर तटों तक पहुंचाने का काम करते हैं. भारत के हर लैंडिंग क्राफ्ट में 160 सैनिक जा सकते हैं. इनकी रेंज 2800 किलोमीटर है.  इनके ऊपर सुरक्षा के लिए कई तरह की हैवी मशीन गन और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी होती हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

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5. विध्वंसक (Destroyers)

इंडियन नेवी के पास दस विध्वंसक हैं. विशाखापट्नम क्लास, कोलकाता क्लास, दिल्ली क्लास और राजपूत क्लास. सबसे नया आईएनएस विशाखापट्नम (INS Visakhapatnam) है. ये ऐसे जंगी जहाज होते हैं जिनका प्राइमरी हथियार गाइडेड मिसाइल्स होती हैं. ये एंटी-एयरक्राफ्ट युद्ध में बेहद खतरनाक साबित होती हैं. आईएनएस विशाखापट्नम में तो ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और बराक मिसाइलें लगी हुई हैं. इनमें बेहद ताकतवर रडार सिस्टम होता है. ये जमीन, जल और आसमान तीनों जगहों पर मिसाइलों से हमला कर सकती हैं. यहां तक कि पानी के अंदर भी तबाही मचा सकती हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

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6. फ्रिगेट्स (Frigates)

भारत के पास शिवालिक क्लास, तलवार क्लास और ब्रह्मपुत्र क्लास में कुल मिलाकर 12 फ्रिगेट्स हैं. सबसे भारी और अत्याधुनिक 6200 टन वाले शिवालिक क्लास फ्रिगेट हैं. ये ऐसे जंगी जहाज होते हैं जिनका इतिहास काफी बदलाव वाला रहा है. इनका काम लगातार बदलता रहा है. लेकिन मुख्य काम हमला करना ही है. आजकल स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स होते हैं. जिनमें मिसाइलों को तैनात किया जाता है. अगर हम आईएनएस सतपुड़ा (INS Satpura) की बात करें तो इसमें 32 बराक-1 मिसाइलें, 24 मीडियम रेंज मिसाइल, 8 एंटी-शिप क्रूज मिसाइल या 8 ब्रह्मोस एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल तैनात है. 2 टॉरपीडो लॉन्चर्स हैं. दो रॉकेट लॉन्चर्स हैं. 2 ध्रुव हेलिकॉप्टर या सी किंग तैनात हो सकते हैं. इनपर एक ओटोब्रेडा नेवल गन और 2 एके-630 गन तैनात होती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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7. कॉर्वेट्स (Corvettes)

भारत के पास कमोर्ता क्लास, कोरा क्लास, खुकरी क्लास, वीर क्लास और अभय क्लास के कुल मिलाकर 22 कॉर्वेट्स हैं. इसमें सबसे भारी है कमोर्ता क्लास के कॉर्वेट्स. 3300 टन वजनी INS Kamorta एक एंटी सबमरीन वॉरफेयर जहाज है. यानी इसमें ऐसी तकनीक है जो पनडुब्बियों को खोज-खोजकर उन्हें टॉरपीडो या रॉकेट लॉन्चर से मारकर नष्ट कर देती है. इसके रडार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एंड डिकॉय सिस्टम अत्याधुनिक हैं. इसमें रैपिड गन माउंट, एके0630 गन, वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल भी तैनात की गई है. इसके अलावा एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर भी है. (फोटोः विकिपीडिया)

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8. ऑफशोर पेट्रोल वेसल (Offshore Patrol Vessels)

भारतीय नौसेना के पास INS Sumitra 2300 टन वाली सबसे भारी ऑफशोर पेट्रोल वेसल है. सरयू क्लास, सुकन्या क्लास के कुल मिलाकर 10 ऑफशोर पेट्रोल वेसल हैं. इनका मुख्य काम तटीय सुरक्षा, निगरानी, सीमाई सुरक्षा, इमिग्रेशन, लॉ-एनफोर्समेंट, सर्च एंड रेस्क्यू है. इनका उपयोग सिर्फ नेवी ही नहीं करती बल्कि कोस्टगार्ड, पुलिस फोर्स और कस्टम्स विभाग भी करता है. इनकी सुरक्षा के लिए इनपर सुपर रैपिड गन माउंट होता है. इसके अलावा शैफ सिस्टम लगा होता है. (फोटोः विकिपीडिया)

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9. पेट्रोल वेसल (Patrol Vessel)

भारतीय नौसेना के पास कार निकोबार क्लास, बंगारम क्लास और त्रिंकट क्लास के कुळ मिलाकर 19 पेट्रोल वेसल मौजूद हैं. इनमें INS Tarasa 325 टन का पेट्रोल वेसल है. यह 65 किलोमीटर प्रतिघंटा से समुद्री लहरों को चीरता हुआ सीमाई निगरानी, बचाव आदि का काम करता है. यह एक बार में 3700 किलोमीटर की यात्रा कर सकता है. (फोटोः विकिपीडिया)