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मेडिकल टेस्ट में पुरुष साबित होने पर नहीं मिली थी महिला को नौकरी, कोर्ट के आदेश पर अब नियुक्ति

महाराष्ट्र के नासिक में पुलिस भर्ती के दौरान एक महिला ने कांस्टेबल पद के लिए आवेदन दिया था लेकिन परीक्षा पास करने के बाद उसे मेडिकल टेस्ट में उसे पुरुष घोषित कर दिया गया था. इसके बाद महिला को नौकरी नहीं मिली थी जिसपर पीड़ित ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पुलिस कांस्टेबल पद के लिए महिला ने दिया था आवेदन
  • मेडिकल टेस्ट में पुरुष बताकर नहीं दी गई थी नियुक्ति

महाराष्ट्र के नासिक में पुलिस विभाग में भर्ती के लिए परीक्षा पास कर लेने के बाद भी मेडिकल जांच में पुरुष बताकर एक महिला को नौकरी नहीं दी गई जिसके बाद उसने न्याय के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. बीते हफ्ते हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि महिला को दो महीने के अंदर पुलिस विभाग में नियुक्ति दी जाए.

यह फैसला जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस माधव जामदार की पीठ ने बीते हफ्ते सुनाया था जिसके बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने जानकारी दी है कि महिला को गैर कांस्टेबल पद पर नियुक्ति देने का फैसला किया गया है. महिला ने इस नौकरी को स्वीकार कर लिया है.

दरअसल महिला ने नासिक ग्रामीण के एसपी द्वारा 8 फरवरी और 18 अप्रैल, 2019 को पारित आदेशों को रद्द करने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उसने अधिकारी को नासिक ग्रामीण पुलिस भर्ती, 2018 के संबंध में नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश देने की मांग भी की थी.

साल 2018 में, उस समय 19 वर्षीय महिला ने नासिक ग्रामीण पुलिस भर्ती के लिए आवेदन दिया था. महिला अनुसूचित जाति श्रेणी में अपनी लिखित परीक्षा के साथ-साथ शारीरिक परीक्षण के लिए उपस्थित हुई और 200 में से 171 अंक प्राप्त किए.

इसके बाद, महिला को मेडिकल जांच से गुजरना पड़ा, जो मुंबई के जेजे अस्पताल में किया गया था. जेजे अस्पताल के एनाटॉमी विभाग ने उसे सूचित किया कि उसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोहेमेटोलॉजी में कैरियोटाइपिंग (क्रोमोसोमल असामान्यताओं का पता लगाने के लिए) मेडिकल टेस्ट से गुजरना होगा.

जेजे अस्पताल में मेडिकल जांच के दौरान महिला के पेट के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से पता चला था कि उसके शरीर में गर्भाशय और अंडाशय नहीं थे और मूत्राशय की जगह  प्रोस्टेट जैसी संरचना थी. इसके बाद कैरियोटाइपिंग टेस्ट में बताया गया कि असल में वो एक "पुरुष" थी. इसी वजह से उसे नौकरी से वंचित कर दिया गया था.

इसके बाद महिला कोर्ट पहुंच गई और न्याय की गुहार लगाई. उसने कोर्ट में कहा कि उसने अपने शरीर के आंतरिक हिस्सों के बनावट की कोई जानकारी नहीं है.

पूरा मामला जानने के बाद कोर्ट ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है. कोर्ट की तरफ से कहा गया कि  महिला को ग्राम पंचायत द्वारा जन्म प्रमाण पत्र दिया गया था और उसके सभी शैक्षिक प्रमाण पत्रों से भी पता चलता है कि वह एक महिला थी और उसने अपना पूरा जीवन एक  महिला के रूप में जिया था. कोर्ट के आदेश के बाद अब उस महिला को नौकरी मिल गई है.

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