TCS BPO Employee Conversion Case: बीते दिनों नासिक में सामने आए टीसीएस (TCS) धर्मांतरण मामले में अब एक और आरोपी रजा मेमन को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. इस कांड में हर दिन एक-एक परत खुल रही है और पुलिस को हैरान करती जा रही है. अब केस में अब चौथी सर्वाइवर का भी बयान आया है. पीड़िता के मुताबिक काम की शिफ्ट सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक होती है. मई 2023 में शुरुआती इंडक्शन ट्रेनिंग के दौरान जब मैं ट्रेनिंग रूम में अकेली थी, तब रजा मेमन मेरे पास आए और मेरा नाम व पता पूछा.
'पहेलियां देता रहूंगा, सुलझाती रहना'
इसके बाद, उसने मुझे एक पहेली दी और कहा कि मैसेज में जवाब दो. उसने मुझसे कहा, 'मैं तुम्हें हमेशा ऐसी पहेलियां देता रहूंगा; मुझे टीम्स पर रेस्पांस भेजते रहना, लेकिन इस बात को हम दोनों के बीच ही रखना.' हालांकि रज़ा मेमन मेरी टीम का हिस्सा नहीं था, फिर भी मुझे उस समय उसका व्यवहार अजीब लगा. ऑफिस में नई थे तो प्रेशर फील होता था इसलिए किसी को कुछ नहीं बताया.
पीड़िता ने बताया कि 'रजा कई बार मेरा पीछा करता था, चलते फिरते टच करने की कोशिश करता था. मैंने मैनेजमेंट से शिकायत की तो जवाब मिला- ग्रुप में रहो और अकेले रहने से बचो.'
'कंप्लेंट की तो मुझे ही कर दिया बदनाम'
उसने बताया- जब भी मैं अकेली होती तो रज़ा जानबूझकर मुझे अजीब निगाहों से देखता था. मुझसे जबरदस्ती अजीब बातें करने की कोशिश करता था. वह जानबूझकर अवांछित शारीरिक संपर्क भी करता था; परिणामस्वरूप, डर के मारे मैं वहां से चला जाता था. चूंकि यह घटना बार-बार होने लगी, इसलिए मैंने जून 2023 में रज़ा के अजीब व्यवहार के बारे में हमारे क्वालिटी/ट्रेनिंग मैनेजर, जयेश सर से तुरंत शिकायत की.
उस समय, जयेश सर ने कहा कि रज़ा मेमन का एटीट्यूड पहले भी संदिग्ध रहा है और मुझे सलाह दी कि मैं कभी भी अकेली न रहूं. जब मैंने रज़ा मेमन के बारे में हमारी कंपनी की टीम लीडर, निताली जगताप से बात की, तो उन्होंने भी ग्रुप में रहने की सलाह दी. इस सब से भड़ककर रजा ने मुझे और मेरे कलीग अभिषेक को बदनाम किया. उसने हमारे नामों को गलत तरीके से जोड़कर, ऑफिस में यह अफवाह फैलाई कि हमारा अफेयर चल रहा है और दावा किया कि उसने अशोक मार्ग पर एक साथ देखा गया था.
'शादी हुई तो कहते थे- रात भर क्या करती हो'
पीड़िता ने कहा- मेरी शादी नवंबर 2025 में हुई थी. उस समय, जब दोपहर के खाने के बाद मुझे ऑफिस में एक झपकी आ गई तो रजा ने गंदी नजरों से घूरते हुए कहा - 'शादी के बाद तो रात को सोना चाहिए; आखिर रात को तुम इतनी बिजी क्यों रहती हो?' इसके बाद, फरवरी 2026 में, जब मैं अपने पति के साथ गोवा जाने के लिए छुट्टी मांगी तो रजा ने मुस्कुराते हुए मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और पूछा, 'छुट्टी चाहिए? हनीमून पर जाओगी? तुम शराब पीती हो?' इसपर जब मैंने उसे इग्नोर किया तो रज़ा ने आगे कहा, 'तुम्हें किसी ठंडी जगह पर जाना चाहिए; वो घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहें होती हैं.' मुझे ये कमेंट मेरी निजी और वैवाहिक जिंदगी के बारे में यौन रूप से आपत्तिजनक और बेहद गंदा लगा.
'सिस्टम में हेरफेर कर बढ़ाया वर्कलोड'
पीड़िता ने आगे बताया- चूंकि मैंने रजा से मिलना बंद कर दिया था, इसलिए उसने बदला लेने के इरादे से दानिश और तौसीफ को सिस्टम की सेटिंग्स में हेरफेर करने को कहा. उन्होंने सिस्टम को इस तरह से कॉन्फ़िगर किया कि आने वाली कॉलों की फ्रिक्वेंसी जो सामान्य प्रोटोकॉल के अनुसार हर तीस सेकंड में होती थी, उसे बढ़ाकर हर एक सेकंड कर दिया. इससे मुझपर वर्कलोड हद से ज्यादा बढ़ गया.
'बिल्कुल अलग लग रही हो, कहीं बाहर चलें?'
इस स्थिति से तंग आकर मैंने हमारी हेड, अश्विनी चैनानी से संपर्क किया; लेकिन उन्होंने लगातार रज़ा मेमन, दानिश और तौसीफ़ को ही बचाने की कोशिश की. उनके खिलाफ कोई एक्शन लेने के बजाय, उन्होंने मेरी कंप्लेंट को यह कहकर खारिज कर दिया, 'क्यों हाईलाइट होना चाहती हो? जाने दो मामला छोड़ा'. फिर 19 मार्च, 2026 को - गुड़ी पड़वा के दिन - मैं साड़ी पहनकर कार्यालय आई. उसी दोपहर लगभग 12:00 बजे, जब मैं अपनी डेस्क पर थी, शाहरुख जानबूझकर मेरे पास आकर बैठ गया. एक अजीब, टकटकी भरी निगाहों से मुझे घूरते हुए उसने कहा, 'आज आप बिल्कुल अलग लग रही हैं, क्या हम कहीं बाहर चलें?' यह सुनकर मुझे बहुत अनकंफर्टेबल हुई. मैं तुरंत उठी और चली गई.
कैसे पकड़ में आया टीसीएस कांड?
टीसीएस बीपीओ के इस पूरे बवाल की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि कंपनी में काम करने वाली एक हिंदू महिला रमजान के रोजे रख रही थी। इसी आधार पर पुलिस को संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने गुप्त रूप से जांच शुरू की। आगे चलकर यही जांच एक बड़े खुलासे में तब्दील हो गई, जिसमें कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए।
जांच के दौरान पुलिस ने महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर कंपनी में तैनात किया, ताकि भीतर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इन अधिकारियों ने कैंपस के अंदर की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और अहम साक्ष्य जुटाए। जांच में यह भी संकेत मिले कि कुछ टीम लीडर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। इसके अलावा यह बात भी सामने आई कि कर्मचारियों को निशाना बनाकर उनके साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा था। साथ ही उनपर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है.