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'कोरोना वायरस पर सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत', डोर टू डोर वैक्सीनेशन पर सुनवाई के दौरान केंद्र से बॉम्बे हाई कोर्ट

कपाड़िया की दलीलों पर कोर्ट ने केंद्र की तरफ से पेश हो रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह से कहा कि विशेषज्ञों से इस पर अध्ययन के लिए कहिए और फिर यूनिफॉर्म पॉलिसी बनाइए.

बॉम्बे हाई कोर्ट. (फाइल फोटो) बॉम्बे हाई कोर्ट. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोर्ट ने कहा- सरकार के फैसलों में हो रही देरी
  • मामले में अगली सुनवाई 11 जून को होगी

जो लोग वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं जा सकते उनके लिए डोर टू डोर वैक्सीनेशन को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र से कहा कि कोरोना पर सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है. कोर्ट ने केंद्र से कहा कि आपने यह माना है कि कोरोना हमारे बीच में ही बैठा दुश्मन है. हमें इसे खत्म करना है.

चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता  ने कहा कि यह दुश्मन खास इलाकों में है जहां लोगों के अंदर वायरस हो सकता है लेकिन नजर नहीं आ रहा है. इस जंग के लिए आपकी तैयारियां सर्जिकल स्ट्राइक जैसी होनी चाहिए. आपको दुश्मन को जरूर खत्म करना चाहिए. वकील ध्रुती कपाड़िया ने बताया कि केंद्र की ऐसी किसी पॉलिसी का इंतजार किए बिना ही कुछ राज्यों में और महाराष्ट्र के कुछ निगम परिषदों में डोर टू डोर वैक्सीनेशन शुरू की गई है. ध्रुती ने 75 साल से ज्यादा की उम्र वालों, बिस्तर पर पड़े लोगों और दिव्यांगों के लिए डोर टू डोर वैक्सीनेशन की मांग की.

जस्टिस दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ को कपाड़िया ने बताया कि बिहार, ओडिशा, केरल और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में डोर टू डोर वैक्सीनेशन किए जा रहे थे और राज्यों ने इस संबंध में अपनी गाइडलाइंस भी बनाई है. उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई के बगल में वसाई-विरार निगर निगम परिषद में भी डोर टू डोर वैक्सीनेशन किया जा रहा था. कपाड़िया की दलीलों पर कोर्ट ने केंद्र की तरफ से पेश हो रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह से कहा कि विशेषज्ञों से इस पर अध्ययन के लिए कहिए और फिर यूनिफॉर्म पॉलिसी बनाइए. कोर्ट ने कहा कि केंद्र की तरफ से कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन ऐसा देरी से किया जा रहा है. अगर ऐसा पहले किया जाता तो और लोगों की जानें बचाई जा सकती थीं.

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कोर्ट की तरफ से कहा गया कि अगर कई राज्य ऐसा कर रहे हैं तो फिर पूरे देश में  ऐसा क्यों नहीं हो सकता. यह फैसला एक्सपर्ट्स को लेना है, हम नहीं ले सकते. कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि आपका केरल की तरफ से जारी नोटिफिकेशन पर क्या कहना है? कोर्ट ने कहा कि सिर्फ बिस्तर पर बीमार पड़े लोगों का मत सोचिए उनके परिजानों के बारे में भी सोचिए. कोर्ट 11 जून को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

 

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