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महाराष्ट्रः शिवसेना सांसद संजय जाधव ने दिया इस्तीफा, कहा- नहीं कर पा रहा न्याय

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में संजय जाधव ने कहा है कि मैं अपने इलाके में शिवसेना कार्यकर्ताओं के साथ न्याय करने में सक्षम नहीं हूं. मुझे पार्टी का सांसद होने का कोई हक नहीं है.

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संजय जाधव ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को भेजा इस्तीफा (फोटो-PTI)
संजय जाधव ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को भेजा इस्तीफा (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवसेना सांसद संजय जाधव का इस्तीफा
  • कार्यकर्ताओं से न्याय करने में असक्षम बताया
  • कहा- सांसद रहने का कोई अधिकार नहीं

महाराष्ट्र के परभणी से शिवसेना सांसद संजय जाधव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजा है. संजय जाधव ने कहा है कि वह अपने क्षेत्र में शिवसेना कार्यकर्ताओं के साथ न्याय करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं. 

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में संजय जाधव ने कहा है, 'मैं अपने इलाके में शिवसेना कार्यकर्ताओं के साथ न्याय करने में सक्षम नहीं हूं. मुझे पार्टी का सांसद होने का कोई हक नहीं है.' समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक संजय जाधव ने कहा है, 'मैं पिछले 8-10 महीनों से इस मामले (परभणी में जिंतुर एपीएमसी के प्रशासक की नियुक्ति) के लिए प्रयासरत हूं. अब एनसीपी के एक व्यक्ति को गैर-सरकारी प्रशासक के रूप में नियुक्त कर दिया गया है. यह शिवसेना कार्यकर्ताओं का अपमान है.

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महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर खींचतान की बात पहले भी सामने आ चुकी है. इससे पहले मुंबई में आईपीएस अधिकारियों के तबादले को लेकर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद देखने को मिले थे. इसी सिलसिले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से 6 जुलाई को मुलाकात भी की थी. उस समय कहा गया था कि एनसीपी और शिवसेना के बीच मुंबई में आईपीएस अधिकारियों के तबादले को लेकर कोई तकरार है. 

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असल में, महाराष्ट्र में गृह मंत्रालय एनसीपी के पास है. ऐसे में मुंबई में आला पुलिस अधिकारियों के तबादलों के सभी फैसले गृह मंत्री अनिल देशमुख लेते हैं. वहीं शिवसेना चाहती है कि किसी भी तरह के तबादले की जानकारी उनके पास होनी चाहिए. महाराष्ट्र में 2 जुलाई को जारी किए गए ट्रांसफर ऑर्डर में डीसीपी को जोन और क्राइम ब्रांच और उनमें से कुछ को नॉन एग्जिक्यूटिव ब्रांचों से एग्जिक्यूटिव ब्रांचों में ट्रांसफर कर दिया गया था. हालांकि बाद में मुंबई पुलिस कमिश्नर ऑफिस ने ट्रांसफर ऑर्डर को पलटने का आदेश जारी कर दिया.


 

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