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'घुसपैठ, जन्म दर... इन वजहों से बदल गया पॉपुलेशन डायनामिक्स', बोले संघ प्रमुख भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बदलते पॉपुलेशन डायनामिक्स को लेकर मोदी सरकार के प्रयासों को अपर्याप्त बताया है और कहा कि इस दिशा में ठोस काम सिर्फ पिछले 3–4 वर्षों में ही शुरू हुए हैं. उन्होंने जन्म दर, अवैध घुसपैठ, रोजगार, धर्मांतरण, भाषा विवाद और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत. (Photo- PTI)
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत. (Photo- PTI)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत में बदलते पॉपुलेशन डायनामिक्स को लेकर सरकार के प्रयासों पर बात की है. मुंबई में आयोजित आरएसएस के कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि देश में जनसंख्या संरचना में बदलाव को लेकर सरकार ने पहले पर्याप्त काम नहीं किया. इस दिशा में गंभीर प्रयास सिर्फ पिछले 3-4 सालों में ही शुरू हुए हैं.

भागवत ने कहा कि भारत में पॉपुलेशन डायनामिक्स बदलने के पीछे जन्म दर में असंतुलन और अवैध घुसपैठ बड़ी वजहें हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब जब सरकार ने इस पर काम शुरू कर दिया है तो इसमें सफलता जरूर मिलेगी.

उन्होंने आगे कहा, अब भारत को कोई तोड़ नहीं सकता. जो भारत को तोड़ने की कोशिश करेगा, वह खुद टूट जाएगा.

अवैध घुसपैठ पर सख्त रुख

संघ प्रमुख ने कहा कि सरकार को अवैध घुसपैठियों की पहचान और डिपोर्टेशन पर और काम करने की जरूरत है. पहले यह काम नहीं हो रहा था, लेकिन अब धीरे-धीरे इसकी शुरुआत हुई है. जनगणना या SIR जैसी प्रक्रियाओं में ऐसे लोग सामने आते हैं, जो इस देश के नागरिक नहीं हैं और वे स्वतः बाहर हो जाते हैं.

भागवत ने आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि संदिग्ध लोगों की पहचान कर प्रशासन को सूचना दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए, जबकि देश के नागरिकों को चाहे वे किसी भी धर्म के हों, काम मिलना चाहिए.

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घर वापसी और धर्मांतरण

घर वापसी पर संघ प्रमुख ने कहा कि धार्मिक विचार अलग-अलग हो सकते हैं और वे इसका सम्मान करते हैं. उन्होंने प्रसिद्ध कवि नारायण वामनराव का उदाहरण दिया और कहा कि उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया था और वे एक अच्छे कवि थे. हालांकि भागवत ने यह भी कहा कि जिनका धर्मांतरण जबरन किया गया है, उन्हें स्वेच्छा से घर वापसी के जरिए वापस लाया जाना चाहिए.

सावरकर और भारत रत्न पर क्या कहा...

भागवत ने स्वतंत्र वीर सावरकर को भारत रत्न देने के सवाल पर कहा कि वे इसकी मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर सावरकर को यह सम्मान मिलता है तो भारत रत्न की गरिमा और बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि सम्मान मिले या ना मिले, सावरकर पहले से ही करोड़ों दिलों में बसे हुए हैं.

'बांग्लादेश में हिंदू संघर्ष करेंगे तो समर्थन मिलेगा'

भागवत ने कहा कि बांग्लादेश में करीब 1.25 करोड़ हिंदू रहते हैं. यदि वे वहां रहकर संघर्ष करने का फैसला करते हैं तो दुनियाभर के हिंदू उनके समर्थन में खड़े होंगे. भाषा विवाद पर संघ प्रमुख ने कहा कि यह एक स्थानीय बीमारी है और इसे फैलने नहीं देना चाहिए. वहीं, मुस्लिम इलाकों में काम करने की चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि गाली-गलौज का जवाब ना देकर ही टकराव को बढ़ने से रोका जा सकता है.

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रोजगार और AI पर संघ प्रमुख ने क्या कहा...

भागवत ने कहा कि भारत को मास प्रोडक्शन नहीं, बल्कि मासेस द्वारा प्रोडक्शन पर ध्यान देना चाहिए. अगर हजारों जगह उत्पादन होगा तो लागत घटेगी और गुणवत्ता बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि तकनीक और AI आएंगे ही, लेकिन उनका इस्तेमाल इस तरह होना चाहिए कि रोजगार खत्म ना हों, बल्कि बढ़ें. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज ने धीरे-धीरे कम-कौशल वाले काम छोड़ दिए हैं, जिसके चलते इन क्षेत्रों में घुसपैठियों की पकड़ मजबूत हुई है. देश की बड़ी आबादी को देखते हुए हर विकास कार्य रोजगार पैदा करने वाला होना चाहिए.

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