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Maharashtra: महाराष्ट्र में बदली सियासी बयार, गुवाहाटी से गोवा पहुंचे बागी विधायक

महाराष्ट्र में सियासी नजारा बिलकुल बदल गया है. उद्धव ठाकरे के इस्तीफा देने के कुछ दी देर बाद गुवाहाटी से बागी विधायक गोवा पहुंच गए हैं.

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एकनाथ शिंदे (File Photo)
एकनाथ शिंदे (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिंदे गुट देर रात गुवाहाटी से गोवा पहुंचा
  • कल होना था महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट

महाराष्ट्र में बेहद तेजी से सियासी घटनाक्रम बदल रहे हैं. उद्धव ठाकरे के सीएम पद से इस्तीफा देने के बीच ही गुवाहाटी से बागी विधायक गोवा पहुंच चुके हैं. आज सुप्रीम कोर्ट ने कल राज्य में फ्लोर टेस्ट को हरी झंडी दे दी थी, जिसके कुछ ही देर बाद फेसबुक लाइव आकर उद्धव ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. 

इससे पहले शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने फिर हुंकार भरी है. उन्होंने कहा है कि हमारे पास दो तिहाई बहुमत है. हम किसी भी फ्लोर टेस्ट के बारे में चिंतित नहीं हैं. हम सब कुछ पास करेंगे और हमें कोई नहीं रोक सकता. 

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहुमत मायने रखता है और हमारे पास वो है. हम 30 जून मुंबई पहुंच रहे हैं और हमारे 50 विधायक भी होंगे. बागी विधायक बुधवार रात गोवा पहुंच गए हैं. बता दें कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने गुरुवार को विशेष सत्र बुलाने का ऐलान किया है. 30 जून को महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होगा. 

मंगलवार को सूबे के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस उद्धव सरकार के खिलाफ फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर राजभवन गए और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिले थे. फडणवीस ने कहा था कि शिवसेना के दो तिहाई विधायक बाहर हैं और वो एनसीपी और कांग्रेस के साथ नहीं रहना चाहते हैं. उद्धव सरकार अल्पमत में है. इस स्थिति में मुख्यमंत्री सदन में बहुमत साबित करें. बीजेपी की इस मांग पर गवर्नर ने फ्लोर टेस्ट के लिए कहा है.

बगावत से बिगड़ गया गणित 

महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं, लेकिन शिवसेना के एक विधायक के निधन के बाद 287 विधायक हो गए हैं. ऐसे में सरकार बनाने के लिए 144 विधायकों की जरूरत होती है. NCP के पास 53 विधायक हैं, कांग्रेस के पास 44 विधायक और शिवसेना के पास 55 विधायक हैं. लिहाजा तीनों दलों की बात करें तो कुल मिलाककर उनके पास 152 विधायक होते हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी में कई छोटे-छोटे दल भी शामिल हैं. लेकिन शिवसेना में हुई बगावत ने सारे गणित गड़बड़ा दिए हैं.

उद्धव की अगुवाई वाली महा विकास आघाड़ी का बीवीए के 3, सपा के 2, पीजेपी के 2, पीडब्ल्यूपी के एक और 8 निर्दलीय विधायक समर्थन कर रहे हैं. दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के पास 106 विधायक हैं और सात निर्दलीय व अन्य विधायकों का समर्थन है. इस तरह से एनडीए की बात करें तो उसके पास कुल 113 विधायकों का समर्थन है.

वहीं, अगर एकनाथ शिंदे के साथ गुवाहाटी में ठहरे बागी विधायकों को अगर अयोग्य ठहरा दिया जाता है या किसी तरह वोटिंग से रोक दिया जाता है और निर्दलीय उद्धव सरकार से किनारा कर लेते हैं तो बहुमत के आंकड़ों को एनडीए आराम से हासिल कर लेगा. 287 विधायकों के लिहाज से बहुमत के लिए 144 विधायकों का समर्थन चाहिए, लेकिन शिंदे गुट के 39 विधायक फ्लोर टेस्ट में शामिल नहीं होते हैं और चार महा विकास अघाड़ी के शामिल नहीं होते तो बहुमत के लिए 121 विधायकों का आंकड़ा चाहिए होगा. ऐसी स्थिति में बीजेपी के 113 विधायकों के साथ-साथ 16 निर्दलीय और अन्य विधायक भी साथ खड़े हैं. इस तरह से एनडीए का आंकड़ा 129 पर पहुंचता है जबकि उद्धव सरकार सदन में बहुमत साबित करने में सफल नहीं हो पाएगी.

लेकिन सवाल ये कि क्या गुवाहाटी में हर बागी विधायक शिंदे के साथ है या फिर कुछ उद्धव गुट के लोग भी हैं. इतना ही नहीं सवाल ये भी कि क्या महाराष्ट्र पहुंचकर कुछ विधायक पलट सकते हैं...इसी ने दोनों पक्षों की टेँशन बढ़ा दी है....

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