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मुंबई: धारावी में वैक्सीनेशन को सीरियसली नहीं ले रहे लोग, बिना मास्क घूमते दिखते बच्चे

मुंबई में जैसे ही कोरोना मामलों में कमी आई, आजतक की टीम एक बार फिर से धारावी पहुंच गई. यह जानने के लिए बीएमसी द्वारा लगातार चलाए जा रहे कैंपेन का लोगों पर कोई असर हो रहा या नहीं? हालांकि कई लोग वैक्सीन को लेकर विद्रोही बने हुए हैं. 

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धरावी में कोरोना को लेकर लापरवाह लोग (फोटो- आजतक)
धरावी में कोरोना को लेकर लापरवाह लोग (फोटो- आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • धारावी के लोग वैक्सीनेशन को लेकर उदासीन
  • बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के घूम रहे बच्चे
  • बच्चों के लिए कोरोना की तीसरी लहर खतरनाक

अंधविश्वास, जड़ता और गुस्सा. ये कुछ ऐसे पहलू हैं जिसकी वजह से धारावी के लोगों में कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर हिचकिचाहट है. एशिया की सबसे बड़ी स्लम कॉलोनी धारावी, बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) और महाराष्ट्र सरकार के लिए कोरोना महामारी की शुरुआत से ही चिंता का सबब बना हुआ है. जाहिर है. हालांकि यहां के लोगों को जागरूक करने के लिए बीएमसी ने कई शुरुआत की है. उन्होंने अवेयरनेस के कई प्रोगाम चलाए हैं. इसके बावजूद मुंबई का यह बड़ा हिस्सा अज्ञानता की वजह से कोरोना वैक्सीन से दूर है. 

धारावी की एक स्थानीय महिला ने बताया, 'यूपी में मेरे एक परिचित ने वैक्सीन लगवाया और अगले ही दिन उसकी मौत हो गई. ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने वैक्सीन ले ली है. इसके बावजूद वो मर रहे हैं. अगर आप डिटेल चाहते हैं तो मैं आपको वो सारे नाम और पता बताने को तैयार हूं. यह वैक्सीन आदमी की जान ले रहा है. मैंने या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य ने अब तक इसी वजह से वैक्सीन नहीं लिया है.' ताज्जुब की बात यह है कि 30 वर्षीय इस महिला ने चेहरे पर मास्क भी नहीं लगाया था.  

जागरुकता अभियान का असर नहीं

मुंबई में जैसे ही कोरोना मामलों में कमी आई, आजतक की टीम एक बार फिर से धारावी पहुंच गई. यह जानने के लिए बीएमसी द्वारा लगातार चलाए जा रहे कैंपेन का लोगों पर कोई असर हो रहा है या नहीं? हालांकि लोगों में कोरोना महामारी को लेकर अवेयरनेस तो बढ़ी है. इसके बावजूद कई लोग वैक्सीन को लेकर विद्रोही बने हुए हैं. 

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धारावी में रहने वाले एक सीनियर सिटिजन ने कहा, 'मेरी उम्र 70 साल हो चुकी है. मैं स्वस्थ और मजबूत हूं. फिर वैक्सीन लेकर अपनी जिंदगी को खतरे में क्यों डालू्ं? मेरे इलाके में ना तो अब तक कोई वैक्सीन लेकर आया है और ना ही मैंने इसे लेने को लेकर कोई इच्छा जाहिर की है. 

और पढ़ें- 'वैक्सीन की एक ही डोज पर्याप्त', वाले दावे से सहमत नहीं एक्सपर्ट, उठाए ये सवाल

ऐसा नहीं है कि सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों के बीच ही कोरोना वैक्सीन को लेकर उदासीनता है. बल्कि इस इलाके में रहने वाले बड़े शिक्षित युवा वर्ग भी कोरोना वैक्सीन नहीं लेना चाहते हैं.

हमलोग वैक्सीन नहीं लेंगेः स्थानीय

यहां के एक सब्जी विक्रेता ने कहा, 'मेरा छोटा बच्चा है. अगर मुझे कुछ हो गया तो उसकी देखभाल कौन करेगा? वे सड़क पर आ जाएंगे. यह वैक्सीन पुरानी पीढ़ी के लोगों को मारने के लिए लाया गया है. आप अपने आसपास देखो, कोरोना महामारी की चपेट में कौन लोग आ रहे हैं? पुराने लोग, बुजुर्गवार लोग वैक्सीन लेने के बाद मर रहे हैं. अगर किसी युवा ने भी इसे लगवाया है तो उसकी मौत हो गई. इसलिए वैक्सीन लगवाने का कोई मतलब नहीं है.

धारावी के एक अन्य स्थानीय नागरिक अनिल माकुर ने कहा, 'जब हमें भोजन और पैसे की जरूरत थी तो किसी ने हमारी मदद की? हमलोगों ने खुद ही सारा जुटाया. हमने अपनी जिंदगी को रास्ते पर लाने के लिए काफी मुश्किल समय का सामना किया है और अब वो चाहते हैं कि हमलोग वैक्सीन ले लें? हमलोग वैक्सीन नहीं लेंगे. हमलोग काफी लंबे समय से सड़क पर रहते आ रहे हैं. हमारी इम्यूनिटी ठीक है. इसलिए हमें वैक्सीन की कोई जरूरत नहीं है. 

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इस इलाके में रह रहे बच्चे, खुलेआम बिना मास्क के घूम रहे हैं. वो सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं कर रहे हैं. जबकि बीएमसी लोगों को समझा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है. इसके लिए बीएमसी की तरफ से साफ-सफाई अभियान और जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. 
 

 

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