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मुंबईः बच्चों की तस्करी में मदद करने के लगे थे आरोप, आरोपी डॉक्टर को मिली अग्रिम जमानत

मुंबई की एक अदालत ने नर्सिंग होम के उस डॉक्टर को गिरफ्तारी से पहले ही जमानत दे दी है, जिस पर बच्चों की तस्करी में मदद करने के आरोप लगे थे. कोर्ट ने डॉक्टर को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि आरोपी डॉक्टर को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है.

कोर्ट ने दी डॉक्टर को अग्रिम जमानत (प्रतीकात्मक तस्वीर) कोर्ट ने दी डॉक्टर को अग्रिम जमानत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुंबई में नर्सिंग होम का मालिक है डॉक्टर
  • बच्चों की तस्करी में मदद के आरोप लगे थे

मुंबई की एक अदालत ने नर्सिंग होम के उस डॉक्टर को अग्रिम जमानत दे दी है, जिस पर बच्चों की तस्करी में मदद करने के आरोप लगे थे. डॉक्टर मुंबई में एक नर्सिंग होम का मालिक है और आरोप था कि नर्सिंग होम की मदद से अपराधी बच्चों की तस्करी करते थे. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस मामले में FIR में भी डॉक्टर का नाम दर्ज नहीं है. कोर्ट ने आरोपी डॉक्टर को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि उन्हें हिरासत में लकेर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है.

आरोपी डॉक्टर मुंबई में दत्तात्रेय नर्सिंग होम के मालिक हैं. इस नर्सिंग होम को बीएमसी की ओर से कोविड अस्पताल बनाया गया है, जहां 25 में से 20 बेड कोरोना मरीज के लिए रिजर्व हैं. डॉक्टर और उनकी पत्नी दोनों ही इस नर्सिंग होम को चलाते हैं. डॉक्टर पर फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनाने का आरोप था.

क्या है मामला?

इसी साल जनवरी में पुलिस को जानकारी मिली कि एक महिला ने सांताक्रूज स्थित वीएन देसाई अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन उसे बाद में बेच दिया. इसी महिला ने पहले भी अपने बच्चे को बेचा था. इसी तरह एक और महिला ने भी अपने बच्चे को बेचा. पुलिस ने जब देसाई अस्पताल में जाकर पूछताछ की तो फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनाने में दत्तात्रेय नर्सिंग होम का नाम सामने आया.

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कोर्ट में क्या दी गईं दलीलें?

डॉक्टर की ओर से पेश वकील महेश वासवानी ने दलील देते हुए कहा कि नर्सिंग होम की एक स्टाफ आरती सिंह पर बर्थ सर्टिफिकेट पर डॉक्टर या उनकी पत्नी के सिग्नेचर करवाने का आरोप है. उन्होंने कहा कि डॉक्टर दिनभर में कई डॉक्यूमेंट्स पर साइन करते हैं. वो बच्चों की खरीद-बिक्री में शामिल नहीं है. उनकी भूमिका सिर्फ साइन करने तक है. 

वहीं, सरकारी वकील इकबाल सोलकर ने डॉक्टर को किसी भी तरह की राहत देने का विरोध किया और कहा कि ये गंभीर अपराध है. उन्होंने कहा कि बच्चों की तस्करी में डॉक्टर शामिल हैं. उन्होंने जानबूझकर उस बर्थ सर्टिफिकेट पर साइन किए, जिसकी डिलीवरी उनके अस्पताल में हुई ही नहीं थी.

कोर्ट ने कही ये बात?

एडिशनल सेशल जज डॉ. यूजे मोरे ने कहा कि FIR में डॉक्टर का नाम नहीं है. अस्पताल की एक स्टाफ आरती सिंह से पूछताछ में डॉक्टर की मिलीभगत होने का खुलासा हुआ है, लेकिन डॉक्टर की भूमिका डॉक्यूमेंट तैयार करने में है. 

कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर ने उस किसी शख्स से भी बात नहीं की जिसने बच्चे को खरीदा या बेचा था. साथ ही किसी भी गवाह ने ये नहीं कहा कि डॉक्टर नवजात बच्चों को बेचने में शामिल थे. कोर्ट ने ये भी देखा कि डॉक्टर का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड भी नहीं है और वो बीएमसी के साथ मिलकर कोविड अस्पताल चला रहे हैं. 

कोर्ट ने कहा कि क्योंकि डॉक्टर नर्सिंग होम के मालिक हैं, इसलिए उन्हें मरीज के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. जज ने कहा कि आरोपी डॉक्टर को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है.

 

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