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महाराष्ट्र रिसोर्ट पॉलिटिक्स: 24 घंटे की पटकथा... सूरत से गुवाहटी क्यों भेजे गए बागी विधायक?

डिस्टेंस कम होने की वजह से सूरत से विधायक अगर भागना चाहे तो आसानी से निकल सकते थे. वहीं गुवाहाटी मुंबई से काफी दूर है और बीजेपी रूलिंग है तो यहां पर बीजेपी एकनाथ शिंदे और उनके समर्थक विधायकों को सुरक्षा भी मुहैया करवा सकती है.

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उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो) उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवसेना विधायकों कोे गुवाहाटी किया गया शिफ्ट
  • सूरत के होटल में रुके थे विधायक

महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल लाने वाले एकनाथ शिंदे शिवसेना के 35 से ज्यादा विधायकों के साथ सूरत के ले-मेरेडियन होटल में रुके थे. विधायकों को सूरत के इस होटल में आए 24 घंटे भी नहीं हुए थे और उन्हें सभी विधायकों को असम के गुवाहाटी ले जाना पड़ा. सूरत में ऐसा क्या था कि एकनाथ शिंदे विधायकों को सूरत और मुंबई से इतनी दूर लेकर गए. 

माना जा रहा है कि शिवसेना के सभी विधायकों को सूरत से गुवाहाटी भेजने की प्रमुख वजह सूरत और मुंबई के बीच की दूरी है. दरअसल तीन घंटे की ड्राइव पर मुंबई से सूरत पहुंचा जा सकता है और शिवसेना के 2 प्रतिनिधि जिनमें मिलिंद नारवेकर और रविंद्र पाठक मंगलवार को सड़क के रास्ते ही सूरत पहुंचे थे. शुरुआत में तो पुलिस ने उन्हें होटल में जाने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन बीजेपी खुद को इस पूरे मामले से दूर रखना चाहती है, इसके चलते पुलिस को अनुमति देनी पड़ी. वैसे सूरत में मराठी भाषी लोगों की अच्छी खासी संख्या है. ये भी एक वजह है, जिसकी वजह से इन विधायकों को सूरत से निकालना जरूरी हो गया था. 

वहीं शिवसेना के संजय राउत ने यह आरोप भी लगाया था कि उनका एक विधायक एकनाथ शिंदे के चंगुल से भागने में कामयाब हुआ. विधायक नितिन देशमुख ने भी आरोप लगाया कि सूरत में पुलिस ने विधायकों को बंधक बना लिया था क्योंकि वो वहां से भागना चाहते थे. डिस्टेंस कम होने की वजह से सूरत से विधायक अगर भागना चाहे तो आसानी से निकल सकते थे. वहीं गुवाहाटी मुंबई से काफी दूर है और बीजेपी रूलिंग है तो यहां पर बीजेपी एकनाथ शिंदे और उनके समर्थक विधायकों को सुरक्षा भी मुहैया करवा सकती है. साथ ही भाषा को लेकर ज्यादा कम्युनिकेशन नहीं हो सकता है वो भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है. 

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वहीं राजनीतिक पंडित यह मानते हैं कि गुजरात में इस साल चुनाव होने हैं. 2017 से लेकर 2022 के इन 5 सालों में करीब 20 विधायकों ने कांग्रेस छोड बीजेपी ज्वाइन की है. गुजरात में जनता दल-बदलू राजनीति के चलते बीजेपी की छवि पर काफी असर हुआ है. ऐसी राजनीति के चलते गुजरात में पहले ही बीजेपी को लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है. वैसे में अगर शिवसेना के विधायक सूरत में ठहरते तो उसका असर गुजरात में लोगों की मानसिकता पर और वोटिंग पैटर्न पर नेगेटिव देखने को मिलता, जो इसी साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है. 

 

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