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महाराष्ट्र सरकार vs राज्यपाल: शिवसेना ने भगत सिंह कोश्यारी पर साधा निशाना

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यरी पर निशाना साधा और कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का पेट दुख रहा है इसलिए संवैधानिक पद पर विराजमान व्यक्ति को भी प्रसव पीड़ा हो, ये गंभीर है.

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और सीएम उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और सीएम उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र राज्यपाल की चिट्ठी पर बवाल
  • शिवसेना ने सामना में साधा निशाना
  • शिवसेना बोली- BJP का भी हुआ वस्त्रहरण

महाराष्ट्र सरकार और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यरी पर निशाना साधा और कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का पेट दुख रहा है इसलिए संवैधानिक पद पर विराजमान व्यक्ति को भी प्रसव पीड़ा हो, ये गंभीर है.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा, 'राज्यपाल पद पर बैठा बुजुर्ग व्यक्ति अपनी मर्यादा लांघ कर व्यवहार करे तो क्या होता है, इसका सबक देश के सभी राज्यपालों ने ले ही लिया होगा. राज्य के मंदिरों को खोलने के लिए भाजपा ने आंदोलन शुरू किया. उस राजनीतिक आंदोलन में राज्यपाल को सहभागी होने की आवश्यकता नहीं थी.'

शिवसेना ने कहा, 'राज्य में बार और रेस्टॉरेंट शुरू हो गए हैं, लेकिन प्रार्थना स्थल क्यों बंद हैं? आपको मंदिरों को बंद रखने के लिए कोई दैवीय संकेत मिल रहा है क्या? या आप अचानक सेक्युलर हो गए हैं? ऐसा सवाल राज्यपाल ने पूछा. इस पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल की धोती ही पकड़ ली और राजभवन को हिलाकर रख दिया.'

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शिवसेना का कहना है कि इस मामले में राज्यपाल ने आ बैल मुझे मार जैसा बर्ताव किया, लेकिन यहां बैल नहीं, बल्कि ‘शेर’ है, इस बात को वे कैसे भूल गए? मुख्य बात यह है कि इस पूरे ‘धुलाई’ मामले में भारतीय जनता पार्टी का भी वस्त्रहरण हो गया. राज्यपाल के सहारे महाराष्ट्र सरकार पर हमला करना उन्हें महंगा पड़ गया.

शिवसेना ने कहा कि रेस्टॉरेंट्स खोले गए हैं, लेकिन नियमों का पूरी तरह से पालन करके ही. देवताओं को बंद करके रखने में किसी को आनंद नहीं मिलता; लेकिन एक बार मंदिर में बड़ी भीड़ आनी शुरू हुई, तब कोरोना संक्रमितों की भीड़ भी बढ़ेगी, इस पर देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी चिंता व्यक्त की है. 

बीजेपी पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने कहा कि भाजपा को प्रार्थना स्थल खुलवाने ही होंगे तो उन्हें दिल्ली जाकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात करनी चाहिए और इस बारे में पूरे देश में एक राष्ट्रीय नीति निर्धारित करनी चाहिए. यही सही होगा. मंदिर या अन्य धर्मों के प्रार्थना स्थलों को क्यों नहीं खोला? तुमने हिंदुत्व का त्याग कर दिया है क्या? ऐसा सवाल पूछने वाला चिट्ठी राष्ट्रपति कोविंद ने प्रधानमंत्री मोदी को भेजा है, ऐसा नहीं दिखता. देश के कई प्रमुख मंदिर बंद हैं.

शिवसेना ने कहा कि राज्यपाल की चिट्ठी पर मुख्यमंत्री ने एक ही मारा लेकिन सॉलिड मारा! यह शिवतेज देखकर मंदिरों के देवताओं ने भी आनंदपूर्वक घंटानाद किया होगा. यह घंटानाद प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचा ही होगा, तब वे राजभवन की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए राज्यपाल को वापस बुलाएंगे.

 

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