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CM एकनाथ शिंदे के 'वर्षा' बंगले का खाने का बिल 2.68 करोड़! आरोपों पर अब मुख्यमंत्री ने खुद दी सफाई

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन आरोपों पर सफाई दी है जिनमें कहा गया था कि कुछ ही महीनों के दौरान उनके आधिकारिक बंगले 'वर्षा' के खाने का बिल 2.68 करोड़ रुपये आया था. मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सफाई देते हुए राज्य के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधा.

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मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो)
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने अपने आधिकारिक आवास 'वर्षा बंगले' में खाने और पेय पदार्थों पर 2.68 करोड़ रुपये खर्च करने के आरोपों पर जवाब दिया है. विधानसभा में आरोपों का जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि उद्धव ठाकरे के शासनकाल के दौरान 'वर्षा बंगले' के अंदर कोई नहीं था (मातोश्री से केवल एफबी लाइव होता था) और तब भी बिल 40 लाख रुपए था.

पत्रकार की मौत पर दिया ये बयान

विधानसभा में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नानार तेल रिफाइनरी परियोजना मामले में राजापुर में एक पत्रकार की रहस्यमयी मौत (कथित हत्या) पर भी जवाब दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि हमने एसआईटी का गठन किया है और आरोपी को धारा 302 के तहत गिरफ्तार किया गया है.

बीएमसी में भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि हमने सत्ता में आते ही बीएमसी कमिश्नर चहल को फोन किया और उनसे सड़कों पर गड्ढों को लेकर सवाल किया. सीएम शिंदे ने कहा कि हमने उन्हें अगले दो वर्षों में सभी तरह के भ्रष्टाचार को रोकने और मुंबई को गड्ढा मुक्त करने का निर्देश दिया है.

कांग्रेस और एनसीपी पर निशाना

सीएम शिंदे ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सहकारी क्षेत्र पर राकांपा का सदियों पुराना दबदबा रहा है. सीएम शिंदे ने कहा कि सहकारी क्षेत्रों (चीनी कारखाने और जिला बैंक) पर राकांपा (NCP) और कांग्रेस नेताओं का सदियों पुराना पारिवारिक नियंत्रण रहा और ठेकेदारी रही जो अब केंद्र सरकार के रडार पर होगी. कांग्रेस और राकांपा नेताओं के पास सहकारी क्षेत्रों का विशाल नेटवर्क है जो उन्हें वोट और पैसा इकट्ठा करने में मदद करता है.

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आपको बता दें कि इन दिनों महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और विपक्ष लगातार शिंदे सरकार पर हमले कर रहा है.विपक्ष ने कुछ दिन पहले ही शिंदे की तरफ से आयोजित चाय पार्टी में शामिल होने से इंकार कर दिया था.विपक्ष का आरोप है कि सरकार फिजूलखर्ची कर रही है और दूसरी तरफ किसान और मजदूरों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

 

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