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शिवसेना के ठाणे प्रमुख केदार दिघे को रेप केस में राहत, मुंबई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

शिवसेना के ठाणे प्रमुख केदार दिघे की ओर से अग्रिम जमानत के लिए 5 अगस्त को याचिका दायर की गई थी और 6 अगस्त को न्यायाधीश एमएम देशपांडे के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी. सरकारी वकील मीरा चौधरी भोसले ने दिघे की याचिका का पुरजोर विरोध किया था, लेकिन अदालत ने उन्हें पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए कहा और उन्हें राहत दी.

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उद्धव ठाकरे के साथ केदार दिघे उद्धव ठाकरे के साथ केदार दिघे

मुंबई की सेशंस कोर्ट ने शनिवार को ठाणे जिले में उद्धव ठाकरे द्वारा बनाए गए शिवसेना के नए अध्यक्ष केदार दिघे को उनकी याचिका की पहली सुनवाई में अग्रिम जमानत दे दी. उनके खिलाफ मुंबई के एनएम जोशी पुलिस स्टेशन में रेप का एक मामला दर्ज है. 

दिघे की ओर से अग्रिम जमानत के लिए 5 अगस्त को याचिका दायर की गई थी और 6 अगस्त को न्यायाधीश एमएम देशपांडे के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी. सरकारी वकील मीरा चौधरी भोसले ने दिघे की याचिका का पुरजोर विरोध किया था, लेकिन अदालत ने उन्हें पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए कहा और उन्हें राहत दी. दिघे को मुंबई पुलिस पहले ही तलब कर चुकी है. दिघे के खिलाफ मुंबई के एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज है. उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (2) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था. 

एक 23 वर्षीय महिला द्वारा उनके खिलाफ शिकायत करने के बाद पुलिस ने दिल्ली के व्यवसायी रोहित कपूर और दिघे के खिलाफ मामला दर्ज किया था. कपूर पर आरोप है कि उसने मध्य मुंबई के एक आलीशान होटल के एक कमरे में पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया, जबकि उसके दोस्त दिघे ने कथित तौर पर उसे धमकी दी कि अगर उसने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

उद्धव ने बनाया था ठाणे का जिलाध्यक्ष 

बता दें कि केदार दिघे अपने आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं. एकनाथ शिंदे के गृह जिले ठाणे में उन्हें टक्कर देने के लिए ही उद्धव ठाकरे ने उन्हें अपना जिलाध्यक्ष बनाया था. इसके तुरंत बाद ही उनके लिए परेशानी बढ़ने लगी और उनके करीबी लोगों के अनुसार, राजनीतिक कारणों से यह मामला दर्ज किया गया.
 

 

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