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Kalicharan Maharaj Profile: 8वीं तक पढ़ाई-भय्यूजी महाराज से कनेक्शन, गांधी पर टिप्पणी करने वाले कालीचरण की कुंडली

Kalicharan Maharaj Profile: महात्मा गांधी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर चर्चा में आए कालीचरण महाराज महाराष्ट्र के अकोला के रहने वाले हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई में रुचि नहीं थी, इसलिए माता-पिता ने इंदौर भेज दिया था. यहीं से उनके आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत हुई.

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रायपुर में आयोजित धर्म संसद में कालीचरण महाराज ने दिया विवादित बयान.
रायपुर में आयोजित धर्म संसद में कालीचरण महाराज ने दिया विवादित बयान.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अकोला में 8वीं तक ही पढ़े हैं कालीचरण महाराज
  • अपने ही समाज के उम्मीदवार को हरवाने का आरोप

Kalicharan Maharaj Profile: धर्मगुरु कालीचरण महाराज के एक बयान पर विवाद बढ़ गया है. रायपुर में आयोजित धर्म संसद में कालीचरण महाराज ने महात्मा गांधी (Kalicharan Maharaj on Mahatma Gandhi) को लेकर विवादित बयान दिया. उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे की सराहना की और कहा कि लोगों को धर्म की रक्षा के लिए सरकार के प्रमुख के रूप में एक कट्टर हिंदू नेता का चुनाव करना चाहिए.

कालीचरण महाराज के इस बयान पर सियासी बवाल भी बढ़ गया है. बवाल इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि कालीचरण महाराज ने महात्मा गांधी के लिए अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया. 

महात्मा गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देकर चर्चा में आए कालीचरण महाराज महाराष्ट्र के अकोला के पुराना शहर शिवाजी नगर के रहने वाले हैं. उनका असली नाम अभिजीत धनंजय सराग है. वो भावसार समाज के हैं. कालीचरण महाराज एक साधारण परिवार में जन्में हैं. उनका जन्म अकोला में हुआ है. उनके पिताजी धनंजय सराग की जयन चौक में मेडिकल शॉप है.

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पढ़ाई में रुचि नहीं थी

कालीचरण उर्फ अभिजीत हरिहर पेट के टाउन जिला परिषद स्कूल में आठवीं क्लास तक ही पढ़े. उनको पढ़ने में इतनी रुचि नहीं थी. मां बाप ने तंग आकर कालीचरण को उनकी मौसी के यहां इंदौर भेज दिया, जहां रहकर उन्होंने हिंदी बोलनी सीखी. साथ ही भय्यूजी महाराज के आश्रम में जाने लगे, वहां के काम में उनकी रूचि आने लगी और यहीं से उनको भय्यूजी महाराज की गुरु प्राप्ति हुई. यहीं से उनके नए नाम यानी कालीचरण महाराज की उत्पत्ति हुई.

राजनीति में नहीं आए, लेकिन राजनीति की!

48 साल के कालीचरण महाराज सालों बाद अकोला लौटे तो उनका रूप-श्रृंगार देखकर लोग उन्हें चाहने लगे. उनकी शब्दवाणी पर शिवचरण पाठ पढ़ कर लोग उन्हें काफी चाहने लगे. भावसार समाज के अध्यक्ष अनिल मावले ने बताया कि 2017 में वो महानगर पालिका के चुनाव में खड़े हुए थे, लेकिन कालीचरण महाराज ने विरोधी पार्टी से सांठ-गांठ कर उन्हें हरवा दिया. उन्होंने बताया कि इसके लिए महाराज ने बाद में माफी भी मांगी थी.

शिव तांडव स्त्रोत से चर्चा में आए

कालीचरण महाराष्ट्र अकोला में हर साल कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेते हैं. शिवभक्त कालीचरण महाराज अपने रूप और श्रृंगार को लेकर चर्चा में रहते हैं. कालीचरण महाराज पिछले साल उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंंने मध्य प्रदेश में शिव तांडव स्त्रोत गाया था. उनका ये वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था.

 

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