ऐसा लगता है कि केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद भी किसानों के बुरे दिनों का दौर खत्म नहीं हुआ है. गुजरात में कपास की वाजिब कीमत न मिलने से निराश एक किसान ने खुदकुशी कर ली. दूसरी घटना महाराष्ट्र की है, जहां एक किसान ने फसल बर्बाद होने और कर्ज की वजह से जहर खाकर आत्महत्या कर ली.
कपास की सही कीमत न मिलने से हताशा
बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग को लेकर गुजरात के कपास किसानों द्वारा किए जा रहे आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया, जब 21 साल के एक किसान की अपने कपास की सही कीमत न मिलने की वजह से आत्मदाह करने के बाद मौत हो गई. घटना जिले के विंछिया ब्रिकी केंद्र में हुई.
पुलिस ने बताया कि अपनी कपास की उपज के लिए सही कीमत न मिलने पर मृतक ने शहर के विंछिया ब्रिकी केंद्र में कीटनाशक पी लिया और खुद पर मिट्टी तेल डालकर आग लगा ली.
विंछिया पुलिस थाने के सब इंस्पेक्टर आरजे राम ने कहा, ‘सुरेन्द्रनगर जिले के धराई शहर के निवासी अरविन्द नगानी कोली (21) ने राजकोट जिले के विंछिया विपणन केंद्र परिसर में बुधवार को आत्मदाह कर अपनी जान ले ली.’ उन्होंने कहा कि घटना के कारण का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है. शुरुआती जांच के अनुसार, कोली ने अपनी कपास की फसल के लिए ऊंचा न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने के बाद आत्महत्या कर ली. कोली को अस्पताल ले जाया गया और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया.
फसल तबाह होने के बाद की खुदकुशी
महाराष्ट्र के पालघर जिले के गेट्स गांव में 49 साल के एक किसान ने कथित तौर पर फसल के बर्बाद होने और अपने कर्ज में डूबने की वजह से बुधवार को जहर खाकर आत्महत्या कर ली.
पुलिस ने बताया कि मृतक रमेश अनंत पाश्ते ने कथित तौर पर धान की फसल के लिए सहकारी समिति से 50,000 रुपये का ऋण लिया था और बैंक में गहनें भी गिरवी रखे थे.
वाड़ा पुलिस थाने के निरीक्षक संजय हजारे ने कहा कि पाश्ते ने बुधवार सुबह अपने खेत में जहर खाकर आत्महत्या कर ली.
उन्होंने कहा, ‘दुर्घटनावश मौत का एक मामला दर्ज किया गया है और उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.’ हाल के दिनों में प्रतिकूल मौसम की वजह से वाड़ा तालुक के कई किसानों की फसलें तबाह हो गईं.