साल 2018 के एल्गार परिषद मामले में आरोपी बनाए गए सागर गोरखे और रमेश गाइचोर को शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई. दोनों आरोपी कबीर कला मंच से जुड़े कलाकार रहे हैं. हाईकोर्ट ने समानता (पैरिटी) के आधार पर उन्हें जमानत दी है.
न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति एस.सी. चांडक की खंडपीठ ने सागर गोरखे और रमेश गाइचोर की ओर से दायर अपीलों को मंज़ूरी दी. ये अपील फरवरी 2022 में मुंबई की विशेष एनआईए अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थीं.
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार पर रिहा किया जाए. इसके अलावा, उन्हें हर महीने के पहले सोमवार को एनआईए मुंबई कार्यालय में उपस्थित होना होगा.
अदालत ने स्पष्ट किया कि गोरखे और गाइचोर पर लगाई गई जमानत की शर्तें वही हैं, जो हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैनी बाबू को जमानत देते समय लगाई गई थीं. फिलहाल, कोर्ट का विस्तृत (रीजन्ड) आदेश जारी नहीं किया गया है. एल्गार परिषद मामले में सभी आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत आरोप हैं. उन पर प्रतिबंधित संगठनों, विशेष रूप से सीपीआई (माओवादी) से कथित संबंध रखने का आरोप है.
बता दें कि पिछले साल रमेश गाइचोर को तीन दिन की अस्थायी जमानत दी गई थी ताकि वह अपने बीमार पिता से मिल सकें जिनसे वह चार साल से अधिक समय तक जेल में रहने के कारण नहीं मिल पाए थे. वहीं, सागर गोरखे को भी कानून की परीक्षा में शामिल होने के लिए अस्थायी जमानत दी गई थी.
इन दोनों आरोपियों की रिहाई के बाद अब इस मामले में केवल एक आरोपी, एक्टिविस्ट सुरेंद्र गाडलिंग ही जेल में बंद हैं. उल्लेखनीय है कि इस मामले में आठ साल बीत जाने के बावजूद अब तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है.