महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नवनिर्वाचित नगरसेवकों को साफ संदेश दे दिया है कि अब भावनात्मक राजनीति नहीं, बल्कि विकास ही जनता की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि लोगों ने विकास को वोट दिया है और हर वार्ड में इसका असर दिखना चाहिए.
हालिया नगर निकाय चुनावों में महायुति (बीजेपी-शिंदे गुट गठबंधन) के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में बीजेपी नंबर-1 पार्टी बनी है और उनकी पार्टी बहुत कम समय में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. उन्होंने दावा किया कि लगभग हर चुनाव में बीजेपी के बाद उनकी पार्टी दूसरे स्थान पर रही है. शिंदे ने यह भी कहा कि जनता ने उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को नकार दिया है.
'भावनात्मक राजनीति खत्म, अब विकास ही एजेंडा'
शिंदे ने दो टूक कहा कि मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में मेयर महायुति का ही होगा. उन्होंने कहा कि जनता के फैसले को स्वीकार किया गया है और आत्ममंथन भी किया जाएगा, लेकिन अब प्राथमिकता सिर्फ एक है और वो नजर आने वाला विकास है. पानी, सड़क, सफाई, पुनर्विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है. नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी है. इसी बदले हुए सियासी संदेश के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई के नवनिर्वाचित नगरसेवकों को रोडमैप सौंप दिया है.
हर वार्ड में दिखना चाहिए काम, शिंदे का सख्त संदेश
डिप्टी सीएम शिंदे ने कहा, अब 'भावनात्मक मुद्दे हार गए हैं और विकास जीत गया है. इसी सोच के साथ नगरसेवकों से अपील की गई कि वो अपने वार्ड को मुंबई का सर्वश्रेष्ठ वार्ड बनाएं. उन्होंने कहा कि हर नगरसेवक को “सच्चा नगर सेवक” बनना होगा, केवल पद नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी निभानी होगी. उन्होंने कहा कि अब हर नगरसेवक को अपने वार्ड में तुरंत काम शुरू करना होगा और ऐसा विकास दिखना चाहिए, जिसे आम नागरिक महसूस कर सके.'
शिंदे ने कहा कि उन्होंने सभी नगरसेवकों से मुलाकात की है और उन्हें अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. उनका कहना था कि 'लोगों की आवाज़ सुनी जानी चाहिए, समस्याओं का समाधान होना चाहिए और वार्ड स्तर पर काम ज़मीन पर दिखना चाहिए.'
शिंदे ने नगरसेवकों को निर्देश दिया कि वो सुबह जल्दी उठकर वार्ड का दौरा करें, सफाई पर विशेष ध्यान दें और डीप-क्लीन ड्राइव शुरू करें. उन्होंने कहा कि पानी की आपूर्ति, कचरा प्रबंधन, सड़कें, पुनर्विकास (Redevelopment) और एसआरए (SRA) जैसे मुद्दे सीधे जनता के जीवन से जुड़े हैं, इसलिए इन पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए.