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'JNU में शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचल देंगे...', दिल्ली में नारेबाजी के खिलाफ भड़के फडणवीस

दिल्ली के JNU कैंपस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी को लेकर महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है.

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JNU में नारेबाजी पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने तीखा हमला बोला.
JNU में नारेबाजी पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने तीखा हमला बोला.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिल्ली के JNU कैंपस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ हुई नारेबाजी पर तीखा हमला बोला है. नागपुर में फडणवीस ने इस घटना को देशविरोधी मानसिकता से जोड़ते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी.

मीडिया से बातचीत के दौरान फडणवीस ने कहा कि JNU में शरजील इमाम जैसी सोच रखने वालों की 'औलादें' पैदा हुई हैं और ऐसे लोगों के नापाक इरादों को कुचल दिया जाएगा. फडणवीस ने आगे कहा, ये वही लोग हैं जो देश तोड़ने वालों की भाषा बोलते हैं और देशद्रोहियों के साथ खड़े होते हैं. ऐसे नापाक इरादों को हम कुचल देंगे.

फडणवीस ने क्या कहा, पूरा बयान...
'देखिए, ये शरजिल इमाम की जो औलादें जेएनयू में पैदा हुई हैं, इनके इरादों को कुचलने का काम हम करेंगे. ऐसे नापाक इरादे... जो देशद्रोहियों के साथ खड़े होते हैं, जो देश को तोड़ने की भाषा बोलने वालों के साथ खड़े होते हैं, उनके इरादों को कुचल दिया जाएगा. ऐसे इरादे नहीं चलेंगे.'

फडणवीस का यह बयान JNU में हुई नारेबाजी के बाद आया है, जिसने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है.

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इसी दौरान केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल के उस कथित बयान पर भी फडणवीस से सवाल किया गया, जिसमें कहा गया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज पाटीदार समुदाय से थे. इस पर मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें नहीं पता कि सीआर पाटिल ने क्या कहा, लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज किसी एक समुदाय के नहीं थे.

फडणवीस ने कहा, महान लोग किसी एक जाति या समुदाय के नहीं होते. उनका कोई जाति बंधन नहीं होता. ऐसे महान पुरुष पूरे देश के होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि आज वे खुद गर्व से देवेंद्र फडणवीस कहलाते हैं तो उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का योगदान है.

मुख्यमंत्री ने कहा, छत्रपति शिवाजी महाराज की वजह से ही हम आज अपनी पहचान पर गर्व कर पाते हैं. महान व्यक्तित्वों को इस तरह जातियों और समुदायों में बांटना ठीक नहीं है.

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