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BMC का पावर शेयरिंग विवाद दिल्ली पहुंचा, मेयर पोस्ट के साथ-साथ अहम समितियों पर भी खींचतान

15 जनवरी को हुए बीएमसी चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने 227 सदस्यीय सदन में 89 सीटें जीतीं. वहीं, शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं, जिससे महायुति को मामूली बहुमत हासिल हुआ.

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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और सीएम देवेंद्र फडणवीस (File Photo: PTI)
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और सीएम देवेंद्र फडणवीस (File Photo: PTI)

मुंबई मेयर पद की रेस अब सिर्फ बीएमसी तक सीमित नहीं रही. यह सियासी लड़ाई अब मुंबई की सड़कों से निकलकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक पहुंच चुकी है. बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद महायुति (बीजेपी-शिंदे गुट की शिवसेना) के भीतर तेज आंतरिक खींचतान सामने आई है, जिसने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस पूरे विवाद में सख्त रुख अपनाया है. इसी के चलते एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को अपनी चर्चित 'होटल पॉलिटिक्स' खत्म करनी पड़ी और तीन दिन बाद उसके नगरसेवकों को होटल से चेकआउट कराना पड़ा. यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि गठबंधन के भीतर भरोसे की कमी गहराती जा रही है.

बीजेपी सूत्रों का दावा है कि कमजोर प्रदर्शन के लिए शिंदे गुट जिम्मेदार है. पार्टी नेताओं का कहना है कि शिंदे गुट ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 29 पर जीत हासिल कर सका, जबकि बीजेपी ने 135 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 89 सीटें जीत लीं. बीजेपी खेमे का तर्क है कि अगर उसने ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा होता तो वह आसानी से 100 के आंकड़े को पार कर जाती.

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किस पार्टी को मिली कितनी सीटें

15 जनवरी को हुए बीएमसी चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने 227 सदस्यीय सदन में 89 सीटें जीतीं. वहीं, शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं, जिससे महायुति को मामूली बहुमत हासिल हुआ. दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को 65 सीटें मिलीं, जबकि उसकी सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह सीटें मिली हैं.

शिंदे गुट ने आरोपों को किया खारिज

वहीं, शिंदे गुट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. शिंदे समर्थकों का कहना है कि उन्हें जानबूझकर मुश्किल और मुस्लिम बहुल सीटों पर उतारा गया. उनका दावा है कि 11 सीटों पर बेहद कम अंतर से हार हुई, जिसकी बड़ी वजह बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ताओं का अपेक्षित समर्थन न मिलना रहा.

दिल्ली में मेयर के अलावा इन पदों पर भी चर्चा

इसी गतिरोध को सुलझाने के लिए अब दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है. शिंदे गुट की ओर से पूर्व सांसद राहुल शेवाले, सांसद श्रीकांत शिंदे और सांसद श्रीरंग बारणे बीजेपी के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम और कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार से बातचीत करेंगे. इस बैठक में सिर्फ मुंबई के मेयर पद ही नहीं, बल्कि स्टैंडिंग कमेटी, इम्प्रूवमेंट कमेटी, हेल्थ और एजुकेशन कमेटी जैसी ताकतवर समितियों के बंटवारे पर भी फैसला होने की संभावना है.

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पहली बार मेयर का फैसला दिल्ली में हो रहा है: संजय राउत

इस बीच विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखा हमला बोला है. शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि यह मुंबई के इतिहास में पहली बार है जब मेयर का फैसला दिल्ली में अमित शाह कर रहे हैं, जो मराठी अस्मिता पर सीधा प्रहार है. वहीं कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि 22 जनवरी को होने वाली मेयर पद की आरक्षण लॉटरी कई राजनीतिक खेलों को बेनकाब करेगी.

रिजॉर्ट पॉलिटिक्स और अलर्ट पर पार्षद

मेयर पद को लेकर विवाद उस वक्त और गहरा गया जब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने बयान दिया कि बालासाहेब ठाकरे के जन्म शताब्दी वर्ष में मुंबई में शिवसेना का मेयर होना सम्मान की बात होगी. इस बयान को शिंदे की ओर से मेयर पद पर दावा ठोकने के तौर पर देखा जा रहा है. इसके बाद शिंदे गुट ने अपने 29 नवनिर्वाचित नगरसेवकों को एक होटल में ठहरा दिया, जिस पर विपक्ष ने ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया.

बीजेपी का कहना है कि मुंबई के मतदाताओं ने महायुति को स्पष्ट जनादेश दिया है और मेयर महायुति का ही बनेगा. शिवसेना नेता संजय निरुपम भी साफ कर चुके हैं कि शिवसेना (UBT) के पास मेयर बनने का कोई गणित नहीं है और महायुति को उनके समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके साथ ही बीजेपी ने अपने नवनिर्वाचित नगरसेवकों को अगले 8-10 दिनों तक मुंबई न छोड़ने का निर्देश दिया है. 

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