पुणे शहर में गणेश विसर्जन के समय जुलूस, डीजे वॉल, लाउडस्पीकर्स की धूम बीते कई साल से देखी जाती रही है लेकिन इस बार कुछ अलग ही देखने को मिला. पुलिस ने डीजे वॉल्स और लाउडस्पीकर्स को लेकर हाईकोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन के आरोप में 52 गणेश मंडलों के खिलाफ कार्रवाई की.
गणेश मंडलों से जुड़े कुछ लोगों ने इंडिया टुडे को बताया कि उनकी ट्रॉलियों पर हर साल डीजे वॉल को पूरे वॉल्यूम पर बजाने की परंपरा रही है, लेकिन इस साल उनका इस्तेमाल नहीं हो सका. उन्होंने इसके पीछे पुलिस-प्रशासन की सख्ती को जिम्मेदार ठहराया.
गणेश मंडलों के संचालकों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ हिन्दुओं के त्योहारों के दौरान ही क्यों तमाम पाबंदियां लगाई जाती हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के नियम बनाए जाते हैं तो इन्हें मानना सभी के लिए अनिवार्य होना चाहिए. गणेश मंडल के एक सदस्य ने कहा कि क्यों जनसभाओं के दौरान नेताओं को ऐसा करने से नहीं रोका जाता. राजनीतिक दलों को भी जनसभाओं के दौरान मंचों पर डीजे वॉल लगाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए.
मंडलों के कुछ सदस्यों ने धमकी के लहजे में कहा कि अब वो देखेंगे कि कैसे राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियानों के दौरान बड़े-बड़े लाउडस्पीकर्स का इस्तेमाल कर पाते हैं.
अधिकतर मंडलों ने कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की वजह से डीजे वॉल का इस्तेमाल नहीं किया. सभी मंडलों ने शांतिपूर्ण ढंग से गणेश विसर्जन जुलूस निकाले. मंडलों से जुड़े लोगों ने कहा कि ट्रॉलियों पर डीजे लगाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए थे जो बेकार गए.
एक गणेश मंडल के वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए इसलिए मस्जिदों में अज़ान के लिए लगाए गए लाउडस्पीकर्स भी हटाए जाने चाहिए.
गणेश विसर्जन जुलूस से लौटने के बाद कुछ गणेश मंडलों के लोगों ने कहा कि अगले साल कुछ भी हो जाए वे गणेश उत्सव के दौरान डीजे वॉल्स का इस्तेमाल करेंगे. कुछ ने तो यहां तक कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी को 2019 चुनाव में इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा.
पुणे के पुलिस कमिश्नर डॉ वेंकटेश्म ने इंडिया टुडे से पुष्टि करते हुए कहा कि इस साल डीजे वॉल्स और लाउडस्पीकर्स संबंधी हाईकोर्ट के नियमों के उल्लंघन के आरोप में 52 गणेश मंडलों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की.