इन दिनों इंदौर में शराब के ठेकों को लेकर महिलाओं का गुस्सा चरम पर हैं. महिलाएं शराब की दुकानों के सामने उग्र विरोध प्रदर्शन करती हैं, नारे लगाती हैं, हवा में चप्पलें लहराती हैं और कुछ देर बाद इन दुकानों पर ताले लगा दिये जाते हैं. इस बीच, पुलिस आती है और प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत करती है.
मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पिछले कुछ दिनों से ऐसे दृश्य आम हैं, जहां रहवासी क्षेत्रों में शराब की दुकानें खुलने के खिलाफ महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर मोर्चा संभाल लिया है. ऐसा ही नजारा शहर की समर पार्क कॉलोनी में बुधवार को नजर आया, जहां हनुमान मंदिर के सामने देशी शराब की दुकान खुलने पर भड़की महिलाओं ने इस ठेके में तोड़-फोड़ कर दी. इसके बाद दुकान बंद करा दी गयी.
सूत्रों के मुताबिक यह उग्र प्रदर्शन तब किया गया, जब शराब दुकान के संचालक ने क्षेत्रीय रहवासियों की मांग ठुकराते हुए अपना ठेका बंद करने से साफ इंकार कर दिया. मदिरा की दुकानों के खिलाफ महिलाओं के विरोध प्रदर्शन शहर के अलग-अलग इलाकों में हो रहे हैं. मगर खास बात यह है कि इनसे ज्यादातर वे आम गृहिणियां जुड़ी हैं, जो घरेलू काम.काज के चक्कर में अपने घर से कम ही बाहर निकल पाती हैं.
महिलाओं का कहना है कि रहवासी क्षेत्र में शराब की दुकानें उनके और उनके परिवार के लिये अप्रिय हालात बनाती हैं. लिहाजा इन दुकानों के लायसेंस को फौरन रद्द किया जाना चाहिये. शराब की दुकानों के खिलाफ शहर के जिन क्षेत्रों में विरोध हो रहा है, उनमें एलआईजी, कोहिनूर नगर, बड़ी ग्वालटोली, पालदा, राजेंद्र नगर, महू नाका, मिश्र नगर और सुदामा नगर शामिल हैं.
बहरहाल, महिलाओं के आंदोलन के बाद सरकारी तंत्र शहर में शराब की नयी दुकानों की स्थिति के बारे में आबकारी अधिनियम के मुताबिक नये सिरे से समीक्षा कर रहा है. सहायक आबकारी आयुक्त मुकेश नेमा ने इसकी पुष्टि की और कहा, 'हमारी हालात पर बराबर निगाह बनी हुई है.' उन्होंने बताया कि एक अप्रैल से शुरू हुए वित्तीय वर्ष 2013.14 में आबकारी विभाग ने जिले भर में शराब की 178 दुकानों को मंजूरी दी है. इनमें विदेशी शराब की 69 दुकानें शामिल हैं। नेमा ने बताया कि जिले की इन शराब दुकानों से करीब 490 करोड़ रुपये का राजस्व सरकारी खजाने में जमा होना है.