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MP: एक दिन में 23 लाख को वैक्सीन, अभी भी इनको वैक्सीन की पहली डोज का इंतजार!

ऐसा नहीं है कि लोगों को घरों में वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती है. मुंबई में बीएमसी बकायदा ऐसे लोगों को घर-घर जाकर वैक्सीन लगा रही है जो वैक्सीन सेंटर तक खुद नहीं जा सकते.

सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मध्यप्रदेश में अब तक 4 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन के डोज मिले
  • सरकार ने 25 व 26 अगस्त को फिर से महा वैक्सीनेशन अभियान चलाया
  • अभियान के पहले ही दिन 23.47 लाख लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई

एक तरफ जहां मध्यप्रदेश में 4 करोड़ से ज्यादा लोगों को अबतक कोरोना वैक्सीन के डोज लगाए जा चुके हैं तो वहीं हजारों की संख्या में ऐसे बुजुर्ग और बीमार नागरिक भी हैं जिन्हें वैक्सीन का एक भी डोज नहीं लगा क्योंकि वो चल कर वैक्सीन सेंटर तक नहीं पहुंच सकते. ऐसे में परिजन सरकार से घर पर ही इन्हें वैक्सीन लगवाने की अपील कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश में 25 और 26 अगस्त को एक बार फिर से सरकार ने महा वैक्सीनशन अभियान शुरू किया. इस अभियान के पहले ही दिन 23 लाख 47 हज़ार लोगों को वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज लगाई गई. लेकिन इन भारी भरकम आंकड़ों के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें वैक्सीन का एक भी डोज नहीं लगा है. ऐसा नहीं है कि यह लोग वैक्सीन लगवाना नहीं चाहते, लेकिन यह वो लोग हैं जो चलने फिरने से लाचार हैं और चाहकर भी वैक्सीन सेंटर तक नहीं जा सकते इसलिए अब तक वैक्सीन से दूर हैं.

भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में रहने वाले 85 साल के रामशंकर मिश्रा पिछले 8 साल से पार्किंसन से पीड़ित हैं. रामशंकर चलने-फिरने में पूरी तरह से लाचार हैं. बिना सहारे के वो बैठ भी नहीं पाते. ऐसे में कोरोना टीकाकरण केंद्र तक जाना भी उनके लिए नामुमकिन है. इनके बेटे अरुण मिश्रा दिल्ली में नौकरी करते हैं और हर हफ्ते पिता के स्वास्थ्य के चलते भोपाल आते हैं.

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अरुण के मुताबिक उनके पिताजी को कभी कोरोना तो नहीं हुआ लेकिन पार्किंसन से करीब 8 साल से पीड़ित उनके पिता की बीते एक साल में तकलीफ इस हद तक बढ़ गई है कि पूरी तरह से सहारे पर निर्भर हैं. ऐसे में वैक्सीन लगवाने बाहर तो नहीं जा सकते, लेकिन यदि प्रशासन घर आकर वैक्सीन लगवा दे तो तीसरी लहर के खतरे से पहले पिताजी सुरक्षित हो जाएं.

भोपाल के नेहरू नगर में रहने वालीं 74 साल की तारादेवी सैनी भी उन लोगों में से हैं जो बिना सहारे चलना फिरना तो दूर, बिस्तर तक पर भी नहीं बैठ सकतीं. तारादेवी सैनी और उनके पति को 30 अप्रैल को कोरोना हुआ था. इलाज के दौरान उनके पति का निधन हो गया लेकिन तारादेवी सैनी कोरोना को हराकर 12 मई को घर वापस आ गईं.

कोरोना से तो तारादेवी ने जंग जीत ली लेकिन पोस्ट कोविड जटिलताओं के कारण अब इतनी कमज़ोर हो चुकी हैं कि बिस्तर से उठ नहीं सकती. नित्यकर्म भी रोज़ाना इसी बिस्तर पर करना पड़ता है. बेटे अनुराग सैनी के मुताबिक उन्होंने कई बार प्रशासन से कहा कि घर पर वैक्सीन लगा दी जाए लेकिन अभी तक वैक्सीन नहीं लगी ऐसे में तीसरी लहर की संभावना से ही उन्हें डर है कि उनकी मां कहीं दोबारा संक्रमित ना हो जाए.

मुंबई में बीएमसी का होम वैक्सीनेशन
ऐसा नहीं है कि लोगों को घरों में वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती है. मुंबई में बीएमसी बकायदा ऐसे लोगों को घर-घर जाकर वैक्सीन लगा रही है जो वैक्सीन सेंटर तक खुद नहीं जा सकते.

12 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट में दिए हलफनामे में बीएमसी ने बताया है कि मुंबई में करीब 4889 ऐसे लोगों का होम वैक्सिनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन हुआ है जो बिस्तर से उठ नहीं सकते, इनमें से 1317 लोगों को घर जाकर वैक्सीन लगाई जा चुकी है. बीएमसी के मुताबिक घर पर वैक्सीन लगाने के दौरान अभी तक एक भी शख्स में विपरीत असर देखने को नहीं मिला है.

हैरानी की बात यह है कि फिलहाल सरकार के पास ऐसे लोगों का कोई आंकड़ा उपलब्ध ही नहीं है जो चल फिर नहीं सकते. आजतक के सवाल पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी अब मान रहे हैं कि ऐसे लोगों को वैक्सीन लगनी चाहिए जिसके लिए डेटा तैयार किया जाएगा, ताकि तीसरी लहर से पहले इन्हें इस जानलेवा वायरस से सुरक्षित किया जा सके.

बहरहाल, उम्मीद की जाना चाहिए कि जब मुंबई जैसे बड़े शहर में होम वैक्सीनेशन सफलतापूर्वक हो रहा है तो भोपाल में भी जल्द ही इसकी शुरुआत हो और कोरोना से बचने का रक्षा कवच ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिल सके.

 

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