मध्य प्रदेश की रैगांव सीट पर फिलहाल बीएसपी का कब्जा है और यहां से ऊषा चौधरी वर्तमान विधायक हैं. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर बीएसपी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है, जबकि कांग्रेस यहां बीते दो चुनाव में रेस से बाहर रही है.
सतना की रैगांव सीट पर करीब 1.85 लाख मतदाता हैं और बीएसपी ने बीजेपी को हराकर इस सीट पर कब्जा किया था. क्षेत्र में हरिजन और कुशवाहों की बड़ी आबादी हैं और यही वजह है कि यहां से मायावती को पार्टी बीएसपी रेस में रहती है. इस बार पूर्व विधायक धीरेंद्र सिंह से लेकर कांग्रेस, बीजेपी और बीएसपी के कई नेता यहां से टिकट पाने की जुगत में हैं.
2013 चुनाव के नतीजे
साल 2013 के विधानसभा चुनाव में रैगांव विधानसभा सीट पर बीएसपी की ऊषा चौधरी और बीजेपी पुष्प राज बागरी के बीच मुकाबला था. लेकिन नतीजों में बीएसपी ने करीब 4100 वोटों से जीत दर्ज की थी. कांग्रेस तब तीसरे नंबर की पार्टी थी जिसे 23 फीसद वोट हासिल हुए. इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार धीरेंद्र सिंह को भी तीन फीसद मतदाताओं ने अपना वोट दिया था.
2008 चुनाव के नतीजे
बीजेपी के जुगल किशोर ने 2008 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर जीत दर्ज की. उन्होंने बीएसपी प्रत्याशी ऊषा चौधरी को 3851 वोटों से हराया था. कांग्रेस और राष्ट्रीय समता दल क्रमश तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं. बरगी नहर का पानी इस क्षेत्र के वोटरों के लिए अहम मुद्दा है, साथ ही यहां शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति लचर रही है.
मध्यप्रदेश की ज्यादातर सीटों पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है, लेकिन रैगांव जैसी कुछ सीटों पर बीएसपी और अन्य छोटे दल भी निर्णायक भूमिका में हैं. यहां 2003 से बीजेपी की सरकार है और इससे पहले 10 साल तक कांग्रेस ने राज किया था. 2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 230 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 165 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. कांग्रेस 58 सीटों तक सिमट गई थी. जबकि बसपा ने 4 और अन्य ने 3 सीटों पर जीत हासिल की थी.