मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के सरकारी गांधी मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष को लोकायुक्त ने 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है. लोकायुक्त को इस बारे में वहां पढ़ाई कर रहे एक डॉक्टर ने ही शिकायत दी थी. अपनी शिकायत में उसने अंतिम वर्ष की परीक्षा में पास करने के एवज में पैसों के डिमांड की बात कही थी.
जानकारी के मुताबिक 25 जुलाई को शिवपुरी जिले के नरवर निवासी डॉक्टर यशपाल सिंह ने लोकायुक्त को शिकायत दी थी कि वो गांधी मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में पढ़ता है और फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ मुरली लालवानी उससे एमडी फाइनल ईयर पास करवाने के बदले डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांग रहे हैं. यह शिकायत सीधे लोकायुक्त एसपी मनु व्यास को की गयी थी.
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एसपी मनु व्यास ने बताया कि डॉक्टर यशपाल सिंह ने शिकायत की थी कि उन्हें फाइनल ईयर की परीक्षा में पास करने के लिए डॉक्टर लालवानी उनसे बीते सालों में पोस्टमॉर्टम लीगल वर्क के लिए जो रुपये उन्हें गृह विभाग से मिले हैं उसमें से डेढ़ लाख रुपए रिश्वत यह कह कर मांग रहे हैं कि डॉ यशपाल उनके एवज में पीएम एग्जामिनेशन करता है और डेढ़ लाख रुपए नहीं दिए तो वो उसे एग्जाम में फेल कर देंगे. डॉ यशपाल सिंह के अलावा दो अन्य पीजी छात्र डॉ अशोक यादव और डॉ संजय जैन ने भी लोकायुक्त से डॉ मुरली लालवानी की शिकायत की थी.
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लोकायुक्त एसपी मनु व्यास ने बताया कि जांच में डॉ लालवानी के खिलाफ की गई शिकायत सही पायी गयी. जिसके आधार पर सोमवार को ट्रैप लगाया गया और आवेदक डॉ यशपाल सिंह को 40 हजार रुपए के साथ डॉ मुरली लालवानी के कमरे में भेजा गया. जैसे ही डॉ लालवानी ने रुपये लिए उन्हें रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ लिया गया. फिलहाल डॉ मुरली लालवानी से पूछताछ की जा रही है. माना जा रहा है कि गांधी मेडिकल कॉलेज के कुछ और छात्र भी उनके खिलाफ शिकायत कर सकते हैं.