मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को 'रन भोपाल रन' मैराथन का आयोजन किया गया था. इस मैराथन में कई अलग-अलग दूरी की दौड़ थी. वैसे तो पूरे भोपाल ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया लेकिन इस मैराथन में एक शख्स की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस मैराथन में 54 साल के पदम कुदेसिया ने भी शिरकत की थी. पदम कुदेसिया ने जीवन में पहली बार किसी मैराथन में भाग लिया था.
पदम कुदेसिया के भाई संजय कुदेसिया ने 'आजतक' से फोन पर बात करते हुए बताया कि पदम ने 5 किलोमीटर कैटेगरी वाली मैराथन में भाग लिया और लाल परेड ग्राउंड से होते हुए जब वो जंसम्पर्क विभाग के पास बने के.एन.प्रधान तिराहे पर पहुंचे तो अचानक गिर पड़े.
आनन-फानन में उन्हें पुलिस की जीप से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. माना जा रहा है कि उनकी मौत हार्ट-अटैक से हुई है.
भाई की मौत के बाद संजय कुदेसिया ने आयोजकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है. संजय कुदेसिया के मुताबिक मैराथन में भाग लेने से पहले आयोजकों को भाग लेने वालों का मेडिकल टेस्ट करवाना चाहिए था जो नहीं किया गया.
वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि मैराथन में 40 सरकारी एम्बुलेंस सेवा यानी (108) को ड्यूटी पर लगाया गया था और साथ ही में निजी अस्पतालों की 19 एम्बुलेंस भी तैनात की गईं थी लेकिन उनके भाई को पुलिस की जीप से अस्पताल ले जाया गया.
अगर समय रहते पैरामेडिक स्टाफ उनके भाई को इलाज देते तो शायद वो बच सकते थे. संजय कुदेसिया ने बताया कि इस तरह की मैराथन के कुछ अंतरराष्ट्रीय नियम होते हैं जिनका पालन नहीं किया गया.
संजय के मुताबिक फिलहाल उनके भाई के शव को 4 दिसम्बर तक रखा जाएगा और वाशिंगटन से उनकी बेटी के आने के बाद ही पदम कुदेसिया का अंतिम संस्कार किया जाएगा.