दुश्मनों से लड़ने के लिए हथियार जरूरी है. आज दुनिया भर में हथियार कारखानों का होना आम है, लेकिन क्या आपको पता है कि आदिमानवों ने भी हथियार का कारखाना बना रखा था. जी हां, हिंसक जानवरों और दुश्मनों से लड़ने के लिए आदिमानव मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हथियार बनाते थे.
इतिहासकारों द्वारा इस ओर किए जा रहे ताजा शोध में सामने आया है कि आदमगढ़ की पहाड़ी पर आदिमानवों ने हथियार बनाने का कारखाना लगाया था. चार किलोमीटर लंबी इस पहाड़ी पर रॉक पेंटिंग से पता चलता है कि आदिमानव धुनष की तीरों के आगे लगी नुकीली नोंक पत्थर से बनाते थे. पहाड़ी पर बड़ी संख्या में माईक्रो टूल्स और हथियार के टुकड़े मिल रहे हैं.
...तो ऑस्ट्रेलिया से नहीं है जिराफ
इसी पहाड़ी के एक चट्टान पर आदिमानव ने हजारों साल पहले जिराफ का चित्र भी बना दिया था. शहर के नर्मदा कॉलेज के इतिहास विभाग द्वारा किए जा रहे इस शोध में जिराफ की तस्वीर ने एक और नया अध्याय जोड़ दिया है. अब तक माना जाता रहा है कि जिराफ ऑस्ट्रेलिया का जानवर है, लेकिन हजारों साल पहले आदिमानवों द्वारा होशंगाबाद की पहाड़ी पर बनाए गए इस चित्र ने इतिहासकारों में नई बहस छेड़ दी है.
तालाब और गुफाएं भी
ताजा शोध से पता चलता है कि आदिमानव सामूहिक युद्ध पद्धति पर काम करते थे. आदमगढ़ की पहाड़ी की तलहटी में एक तालाब भी मिला है, जिसका पानी कभी नहीं सूखता. यही नहीं यहां गुफाएं भी हैं, जिनमें उनके सामूहिक निवास का प्रमाण मिलता है.
आदिमानवों द्वारा पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में हथियार बनाने कारखाना लगाया गया था. यहीं वे पत्थरों को तराश कर हथियार बनाते थे. यहां तीर कमान की नोंक और भाले के आगे लगने वाले नुकेल का निर्माण किया जाता था. इसके साथ ही जानवरों की खाल काटने के लिए पत्थर की ब्लेड भी बनाई जाती थी.
पहाड़ी पर लोकदेवी और युद्ध करते हुए सैनिकों, घुड़सवार, हाथी और जिराफ के समूहों के चित्र बने हैं. आदमगढ़ की पहाड़ी पर हथियारों के इस कारखाने और रॉक पेंटिंग को पुरात्व विभाग ने संरक्षित कर लिया है.
जिराफ के चित्र पर माथापच्ची
शोध कर रहे कॉलेज के इतिहासकारों के लिए आदिमानवों द्वारा बनाया गया जिराफ का चित्र कई सवाल लेकर आया है. इतिहासकार इन चित्रों के माध्यम से प्राचीन काल में भारत में जिराफ के होने का प्रमाण तलाश रहे हैं, वहीं इस आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है कि ये चित्र दिमाग में आए ख्याल के आधार पर बनाए गए हैं.
नर्मदा कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रोफेसर हंसा व्यास कहते हैं, 'पहाड़ी पर आदिमानव की हथियार बनाने का कारखाना था. इसका प्रमाण मिल गया है, लेकिन आदिमानवों ने हजारों साल पहले जिराफ के चित्र बनाए हैं इसका अर्थ यह है कि उन्होंने जिराफ देखे थे. हालांकि इस पर शोध किया जा रहा है.'
पुरातत्व विभाग के कर्मचारी संजय सिंह कहते हैं कि पहाड़ी पर आदिमानव के हथियार बनाने की कारखाना था. वहां बडी संख्या में माईक्रो टूल्स मिलते हैं. जिन्हें देखने के लिए पर्याटक आते हैं, कई शहरों के स्टूडेंट्स को भी यहां विजिट कराया जाता है.