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MP: हनी ट्रैप केस के SIT चीफ को हटाया, राजेंद्र कुमार को मिली जिम्मेदारी

अब राजेंद्र कुमार को एसआईटी प्रमुख बनाया गया है. डीजीपी पर सवाल उठाने वाले साइबर सेल के डीजीपी का भी तबादला कर दिया गया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

  • इससे पहले 24 घंटे में SIT प्रमुख को बदला गया था
  • सबसे पहले श्रीनिवासन वर्मा को बनाया गया था SIT चीफ

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनीट्रैप केस में एक बार फिर एसआईटी चीफ को बदल दिया गया है. अब राजेंद्र कुमार को एसआईटी प्रमुख बनाया गया है. डीजीपी पर सवाल उठाने वाले साइबर सेल के डीजीपी का भी तबादला कर दिया गया है.

नई टीम में मिलिंद कंसकर और रुचि वर्धन को सदस्य बनाया गया है. संजीव शमी को हनी ट्रैप मामले की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन उन्हें एसआईटी प्रमुख के पद से हटा दिया गया है.

साइबर सेल के स्पेशल डीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा को लोक अभियोहन संचालनालय भेजा गया है. शर्मा वहां संचालक बनाए गए हैं. इससे पहले भी 24 घंटे के अंदर एसआईटी प्रमुख को बदला गया था जिस पर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी. सबसे पहले श्रीनिवासन वर्मा को एसआईटी चीफ बनाया गया था. इसके 24 घंटे में ही वर्मा को हटाकर संजीव शमी को बनाया गया था. अब नए फैसले के तहत राजेंद्र कुमार एसआईटी का जिम्मा संभालेंगे.

बहेरिया के टीआई के खिलाफ कार्रवाई

इससे पहले सागर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित सांघी ने बहेरिया के टीआई के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मंगलवार को सस्पेंड कर दिया. जानकारी के अनुसार पुलिस जांच में तत्कालीन टीआई के खिलाफ सबूत मिलने के बाद भोपाल के आईजी योगेश देशमुख ने सागर के आईजी को पत्र लिखा था. आईजी ने कार्रवाई के लिए पत्र सागर के एसपी अमित सांघी को भेज दिया था. इस पर मंगलवार को कार्रवाई करते हुए एसपी ने बहेरिया के टीआई को निलंबित कर दिया है. 'आजतक' से फोन पर बात करते हुए एसपी अमित सांघी ने टीआई को निलंबित करने की जानकारी दी.

क्या है मामला

हनीट्रैप-2 गिरोह का सदस्य दीपांकर ग्राहकों को ढूंढकर कॉलगर्ल्स नीपा और रिवाना से पहले जिस्मफरोशी कराता था और बदले में ग्राहकों से कैश लेता था. इसके बाद उन्हीं ग्राहकों को नीपा से फोन कराया जाता और पुलिस से शिकायत करने का डर दिखाकर तीन से चार लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी.

बता दें, भोपाल पुलिस ने 24 सितंबर को दो युवतियों और दो युवकों को गिरफ्तार किया था. दोनों युवतियां कॉलगर्ल्स थीं जो पहले ग्राहक के साथ जाकर एक रात के 10-15 हजार रुपये लेती थीं. इसके बाद गिरोह के पुरुष सदस्य उन्हीं ग्राहकों को फोन कर उन्हें रेप के मुकदमे का डर दिखाकर उनसे लाखों की रकम वसूलते थे.

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