scorecardresearch
 

MP: लॉकडाउन से मुरझाए फूल, फसल और कारोबार दोनों हुए चौपट

मध्य प्रदेश में कोरोना लॉकडाउन ने फूलों की खेती और व्यवसाय से जुड़े लोगों की भी कमर तोड़ दी है. लॉकडाउन में सब्जी, फल और कृषि उपज को ले जाने की तो छूट है, लेकिन फूल जरूरी सेवा के तहत नहीं आते, ऐसे में इससे जुड़े लोगों काफी परेशान हैं.

Advertisement
X
लॉकडाउन में फूलों की खेती और व्यवसाय ठप (Photo- Aajtak)
लॉकडाउन में फूलों की खेती और व्यवसाय ठप (Photo- Aajtak)

  • लॉकडाउन: जरूरी सेवा के तहत नहीं आते फूल
  • मंडी में व्यवसायियों के पास फूल रखे-रखे सड़ रहे

कोरोना से जंग में लॉकडाउन का एक साइड इफेक्ट मध्य प्रदेश में फूलों की खेती और उसके व्यवसाय से जुड़े लोगों पर साफ दिख रहा है. लॉकडाउन के चलते फूल खेतों से मंडियों तक नहीं पहुंच रहे, तो वहीं मंडी में व्यवसायियों के पास रखे-रखे फूल सड़ रहे हैं, क्योंकि लॉकडाउन में मंदिर बंद होने और शादियां ना होने के चलते फूल की मांग ही नहीं है. पढ़िए मध्य प्रदेश से ये ग्राउंड रिपोर्ट-

लॉकडाउन ने मध्य प्रदेश में फूलों के साथ-साथ उसकी खेती और व्यवसाय से जुड़े लोगों के चेहरे का रंग भी उतार दिया है. लॉकडाउन में सब्जी, फल और कृषि उपज को ले जाने की तो छूट है, लेकिन फूल क्योंकि जरूरी सेवा के तहत नहीं आते ऐसे में इसकी खेती और व्यवसाय से जुड़े लोगों पर लॉकडाउन का जबरदस्त असर पड़ा है. खेतों में किसानों ने फूलों की कटिंग कर ली है, तो वहीं मांग ना होने से व्यवसायी भी निराश बैठे हैं.

Advertisement

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें

भोपाल की फूल मंडी में फूलों का व्यवसाय करने वाले चरणपंथी की मानें तो 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद से मंडी बंद है. वहीं, लॉकडाउन के चलते इस साल जहां एक तरह नवरात्रि, रामनवमी और हनुमान जयंती जैसे त्यौहार में फूलों की मांग नहीं रही, तो वहीं लॉकडाउन में शादियां ना होने के चलते जो ऑर्डर मिले भी थे वो रद्द हो गए. ऐसे में फूल व्यवसायियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. चरणपंथी के मुताबिक, उन्होंने शादियों के सीजन और नवरात्रि, रामनवमी और हनुमान जयंती को देखते हुए उन्होंने करीब 15 हजार रुपये के फूल मंगवाए थे, लेकिन रखे-रखे गर्मी में फूल खराब हो गए और उन्हें फेंकना पड़ा.

flower-farming-1_042120034550.jpg

सिर्फ व्यवसायी नहीं, लॉकडाउन ने फूलों की खेती करने वाले किसानों की भी कमर तोड़ दी है. सबसे पहले आपको दिखाते हैं मंदसौर का हाल. मंदसौर में करीब 700 एकड़ में फूलों की खेती होती है. मंदसौर में गुलाब और मोगरे की खेती करने वाले कोमल माली ने बताया कि उनके खेत में लगे फूल पिछले साल भारी बारिश से बर्बाद हुए, तो वहीं इस साल मेन सीजन के वक्त लगे लॉकडाउन से. कोमल के मुताबिक, उनके खेतों के फूल मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान के भीलवाड़ा, जयपुर और अजमेर जैसे बड़े शहरों में जाते थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से सब काम बंद हो गया है. फूल खेतों में ही खराब हो गए. कोमल ने सरकार से फूलों के खेती करने वाले किसानों के लिए मुआवजे की मांग की है.

Advertisement

flower-farming-2_042120034621.jpg

उज्जैन के पास आगर-मालवा तो फूलों की खेती के लिए पूरे प्रदेश में मशहूर है, लेकिन इन दिनों लॉकडाउन के चलते हालात ये हैं कि किसान खेतों से फूलों के पौधों को उखाड़ कर फेंकने को मजबूर हैं. दरअसल, आगरा-मालवा में होने वाले गेंदे के फूल की उज्जैन, इंदौर, कोटा और जयपुर में अच्छी मांग है. इन शहरों में बड़ी संख्या में मंदिरों के होने के कारण पूजा, भगवान के श्रृंगार और मालाओं के लिए फूल आगर-मालवा से जाते हैं, लेकिन इन दिनों जब मंदिर ही बंद हैं, तो फूलों की मांग भी नहीं है. आगर-मालवा के किसान हरि कई बीघा खेत से फूलों के पौधों को उखाड़कर फेंकने को मजबूर हैं.

फूलों की खेती से परिवार का भरण-पोषण

दरअसल, हरि अपनी 30 बीघा जमीन में गुलाब और गेंदा के फूलों की खेती किया करते हैं और इन्हीं फूलों की खेती के माध्यम से इनके परिवार का भरण-पोषण भी होता है. हरि के सामने समस्या ये है कि फूल या तो मंदिर में चढ़ाने के काम आते हैं या फिर शादियां और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में इसका उपयोग होता है. अब लॉकडाउन के कारण मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे बंद हैं, तो वहीं शादी ब्याह पर भी बैन लगा हुआ है तो फूल किसे बेचें? यही वजह है कि अब हरि अपनी कई बीघा की फूलों की खेती को अपने हाथों से नष्ट करने में लगे हैं, ताकि अब यहां कुछ और उपज पैदा कर दो पैसे कमाए जाएं.

Advertisement

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

पीएम ने लॉकडाउन 2 की घोषणा करते हुए कहा था कि 20 अप्रैल के बाद यदि कोरोना के मामले कम होते हैं, तो कुछ क्षेत्रों में छूट दी जा सकती है. ऐसे में इन किसानों को उम्मीद है कि इनके फूलों की मांग भी शायद 20 अप्रैल के बाद आनी शुरू हो जाए और लॉकडाउन में बेपटरी हो चुकी इनकी जिंदगी एक बाद फिर पटरी पर आ सके.

Advertisement
Advertisement