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MP में EVM से हेरफेर के आरोपों को लेकर कांग्रेस के झांसे का पर्दाफाश

भोपाल जेल में 30 नवंबर को बिजली आपूर्ति बंद होने पर CCTV में कुछ देर के लिए रुकावट आई थी इसके बाद कांग्रेस ने ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की शिकायत की थी.

फाइल फोटो (रॉयटर्स) फाइल फोटो (रॉयटर्स)

अब हर चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) को लेकर विवाद खड़ा होना ट्रेंड सा बन गया है. इंडिया टुडे की जांच से सामने आया कि इन मशीनों में हेरफेर से जुड़े आरोपों को लेकर जितना भी हो-हल्ला हो लेकिन उन्हें तथ्यों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए. जरूरी नहीं कि जो कुछ कहा जा रहा है वो सच ही हो.    

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के राष्ट्रीय और राज्य स्तर के वरिष्ठ नेताओं ने EVMs से कथित छेड़छाड़ की संभावित कोशिशों को लेकर अलार्म बजाया. दरअसल भोपाल जेल में 30 नवंबर को बिजली आपूर्ति बंद होने पर CCTV में कुछ देर के लिए रुकावट आई थी. ये घटना उस हॉल में हुई जहां EVMs को मतदान के बाद कड़ी सुरक्षा में रखा गया है.

कांग्रेस की शिकायत के जवाब में चुनाव आयोग की ओर से ये बयान दिया गया- ‘भोपाल के कलेक्टर से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक बिजली आपूर्ति ठप होने की वजह से 30 नवंबर को सुबह 8.19 से लेकर सुबह 9.35 बजे तक स्ट्रॉन्गरूम के बाहर लगाए गए CCTV कैमरों और LED डिस्पले ने काम नहीं किया. इसी वजह से इस अवधि में रिकॉर्डिंग नहीं हो पाई.' 'एक अतिरिक्त LED स्क्रीन, एक इन्वर्टर और एक जेनेरेटर लगाया गया जिससे कि बिजली की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.'  

लेकिन इंडिया टुडे ने अपनी जांच से ये पता लगाने की कोशिश की कि क्या ये वाकई सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए कैमरे की तकनीकी खामी थी जैसा कि चुनाव आयोग ने दावा किया या ये वाकई EVMs से हेरफेर की कोशिश थी जैसा कि कांग्रेस आरोप लगा रही है.

बता दें कि मशीनों से हेरफेर के आरोपों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में बेचैनी फैल गई. पार्टी के कई कार्यकर्ता प्रदर्शन के लिए भोपाल तक पहुंच गए.

इंडिया टुडे की जांच से सामने आया कि ईवीएम से हेरफेर की किसी भी साजिश का कोई सबूत सामने नहीं आया, लेकिन इसके साथ ही जो सामने आया वो बहुत ही चौंकाने वाला था. इंडिया टुडे की विशेष जांच टीम भोपाल जिले में कांग्रेस पार्टी के चुनाव एजेंटों- सैयद शाहिद हुसैन और मुनव्वर अली तक पहुंची. पार्टी के हवाले से इन दोनों ने ही स्ट्रॉन्गरूम की सील पर हस्ताक्षर किए थे. इन दोनों को ही पार्टी की ओर से अधिकृत रूप से जेल हॉल का निरीक्षण का मौका दिया गया था. अपनी आधिकारिक हैसियत की वजह से 30 नवंबर को ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम में ही मौजूद रहे हुसैन ने माना कि ब्लैकआउट के पहले या बाद में ईवीएम में हेरफेर की कोई कोशिश नहीं हुई.

हुसैन ने इंडिया टुडे के इंवेस्टीगेटिव रिपोर्टर को बताया, 'उस अवधि में सिर्फ एक टैक्नेशियन ही दिक्कत को ठीक करने के लिए वहां गया था. अगर मैं गहराई से देखूं और अपने राजनीतिक चोले को अलग रख दूं तो मैं यही कहना चाहूंगा कि वो सिर्फ तकनीकी खामी थी.' कांग्रेस के भोपाल जिला महासचिव हुसैन ने पूरा जोर लगाकर ये दावा भी किया कि स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगा सकता.

अंडरकवर रिपोर्टर ने पूछा- 'जब एक दिन पहले स्ट्रॉन्गरूम को सील किया गया था तो उस पर हस्ताक्षर करने वाले कौन- कौन थे?'

हुसैन- 'एक तो मैं ही हूं जो आपके सामने खड़ा हूं.'

रिपोर्टर- 'क्या तुमने उन्हें (अनछुई सील) दोबारा दिखाया था?'

हुसैन- 'क्यों नहीं? कलेक्टर मुझे अच्छी तरह जानते हैं. वो मुझे नाम से जानते हैं. मैं भोपाल में बीते 25-30 दिन से हूं जब से मशीन यहां पहुंची.' हुसैन ने कहा, 'मैं जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से (EVMs के निरीक्षण) के लिए अधिकृत किया गया हूं. यही है वो जिसे आपको देखने की जरूरत है, बाकी सब छोड़िए.'  

हुसैन ने EVM से हेरफेर की संभावनाओं को खारिज किया.

हुसैन ने कहा, 'मेरा मानना है कि ये नामुमकिन है. स्ट्रॉन्गरूम पर ताला लगा है और अर्धसैनिक बल उसकी सुरक्षा कर रहे हैं. कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत नहीं कर सकता. उनके (सुरक्षाकर्मियों) के पास 20 राउंड वाली राइफ्ल्स है. वो कुछ नहीं समझते लेकिन संदिग्धों को देखते ही गोली चला देते हैं.'

हुसैन ने ये भी पुष्टि की कि स्ट्रॉन्गरूम का कोई और रास्ता नहीं है जहां से घुसकर कोई अंदर जा सके. यहां सेंध लगाना नामुमकिन है.

हुसैन ने हालांकि ये कबूल किया कि पार्टी नेतृत्व ने उस बात पर हंगामा खड़ा किया जो बात कभी हुई ही नहीं.  

रिपोर्टर- 'तो मीडिया में इसे तूल दिया जाना क्या कांग्रेस का किया-धरा था?'

हुसैन ने माना, 'हम एक मुद्दा चाहते थे जो हमारे पक्ष में काम करे. इसने बीजेपी और उसके कर्ताधर्ताओं को अलर्ट किया. हमने मीडिया के जरिए जो उठाया, शिक्षित पहलू के नजरिए से, उसने उन्हें कोई अवांछित कोशिश करने से रोके रखा.'

हुसैन ने 30 नवंबर को बिजली की आपूर्ति बंद होने पर CCTV कैमरे जब बंद हुए तो वहां खुद के मौजूद होने की बात कबूल की. हुसैन ने कहा, 'मैं वहां उत्तर (भोपाल) से आए मुनव्वर भाई के साथ मौजूद था. वो पूर्व विधायक हैं. बीजेपी से मुन्नान भाई भी वहां मौजूद थे. जिला कलेक्टर, उनके डिप्टी और एडीएम भी घटना के वक्त वहीं मौजूद थे. सभी ने वहां सीलों पर हस्ताक्षर किए थे, मैं वहा अकेला मौजूद नहीं था.’

क्या अगले दिन सभी को हस्ताक्षर दिखाए गए थे? इस सवाल के जवाब में हुसैन ने कहा, ‘आप खुद जा सकते हैं और अभी वहां अपनी आंखों से देख सकते हैं.’

कांग्रेस के पूर्व विधायक और स्ट्रॉन्गरूम की सील पर हस्ताक्षर करने वाले मुनव्वर भाई ने भी माना कि EVMs से हेरफेर की कोई कोशिश नहीं की गई.  

अली ने माना कि अधिकारियों ने अपने दायित्व के मुताबिक मशीनों की सुरक्षा के लिए तय दिशा निर्देशों का इस्तेमाल किया.

अली ने कहा, 'उनके (कांग्रेस नेताओं) के टीवी पर हो-हल्ला मचाने के बाद मैंने दो-तीन उम्मीदवारों को बुलाया...मैंने उन्हें ध्यान दिलाया कि उनमें से कोई भी नहीं आया जब उनसे नज़र रखने के लिए (EVMs को लाने-ले जाने पर). मैंने उन्हें कहा था कि उन्हें अपनी मौजूदगी में सीलिंग करानी चाहिए.'

अली ने सीलिंग अपनी मौजूदगी में होने की पुष्टि की. अली ने कहा, 'मेरे सामने जो कुछ भी हुआ वो आप सबको बता रहा हूं. वहां दो-तीन मुख्य द्वार हैं. फिर वहां एक गैलरी है. इसके बाद बैरक 150, 151 और 152 हैं. मेरे हस्ताक्षर हर सील पर हैं और ये बाहर CCTV फुटेज पर देखे जा सकते हैं.' अली ने EVMs से किसी भी छेड़छाड़ की संभावना से इनकार किया. अली ने कहा, 'अगर वो (सील) खोली गईं होंगी तो इससे वो हिस्सा (हमारे हस्ताक्षर वाला) फटा होगा.'

पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा, फूल प्रूफ है EVM

देश के पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा कि 20 साल पहले जब ईवीएम लाई गई तो लगभग सभी पार्टियों ने इस पर सवाल उठाया लेकिन जब पार्टियों ने इसी मशीन से चुनाव जीता तो उन्होंने चुप्पी साध ली. न तो माफी मांगी गई और न ही अपने शब्द वापस लिए गए. कुरैशी ने कहा, 'मैंने कई टीवी डिबेट में हिस्सा लिया और कई लेख लिखकर बताए कि ईवीएम 100 प्रतिशत भरोसेमंद और फूल प्रूफ है. इसके लिए कई स्तर की जांच प्रक्रियाएं भी हैं.'

EVM पर दोष कांग्रेस का बहाना: बीजेपी

बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा, इसी ईवीएम से कांग्रेस की पिछली जीत को भी देखा जाना चाहिए. आज अगर बहुत बड़ा सुधार हुआ है तो हमने इसके लिए संघर्ष भी किया है. मैं छोटी-मोटी शिकायतों पर भरोसा नहीं करता. मतदाता इससे संतुष्ट हैं. अगर कांग्रेस ईवीएम से खुश नहीं है तो लोग भी अच्छी तरह समझ रहे हैं कि यह उसका बहाना है.

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