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मां-बाप से बिछड़े मंदबुद्धि युवक को परिवार से मिलाने में आधार बना मददगार

अपने माता-पिता से करीब दो साल पहले बिछड़कर बेंगलुरु जा पहुंचा मंदबुद्धि युवक जब अपने परिवार से मिला, तो माहौल भावुक हो उठा. यहां दिलचस्प बात यह रही कि इस लापता युवक को उसके परिवार से मिलवाने में आधार कार्ड की बड़ी भूमिका रही.

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प्रतीकात्मक
प्रतीकात्मक

अपने माता-पिता से करीब दो साल पहले बिछड़कर बेंगलुरु जा पहुंचा मंदबुद्धि युवक जब अपने परिवार से मिला, तो माहौल भावुक हो उठा. यहां दिलचस्प बात यह रही कि इस लापता युवक को उसके परिवार से मिलवाने में आधार कार्ड की बड़ी भूमिका रही.

मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त निदेशक बीसी जैन ने बताया कि नरेंद्र चंदेल उर्फ मोनू 18 को उसके पिता रमेश चंदेल और इस सरकारी महकमे का दो सदस्यीय दल ट्रेन के जरिये बेंगलुरु से शुक्रवार सुबह इंदौर लेकर आया.

जैन ने बताया कि मानसिक रूप से बीमार मोनू दो साल पहले संभवत: किसी ट्रेन में बैठकर इंदौर से बेंगलुरु पहुंच गया था. वह बेंगलुरु में मानसिक रूप से बीमार लोगों की मदद के लिए चलायी जाने वाली एक संस्था के परिसर में रह रहा था.

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इस संस्था के अधिकारी जब मोनू को अन्य मानसिक रोगियों के साथ कुछ दिन पहले एक आधार कार्ड शिविर में ले गए, तो उसके आइरिस स्कैन और अंगूठे की छाप दिए जाने के बाद पता चला कि उसका आधार कार्ड पहले ही बन चुका है. मंदबुद्धि युवक के आधार कार्ड की जानकारी प्राप्त किए जाने पर उसका नाम और इंदौर का पता मालूम हुआ.

उन्होंने बताया कि बेंगलुरु की संस्था के अधिकारियों ने हाल ही में जिला प्रशासन को मोनू के बारे में जानकारी दी. इसके बाद उसे इंदौर लाकर उसके परिवार से मिलाया गया. उसके घर पहुंचते ही उसकी भावुक मां ने आरती उतारकर उसका स्वागत किया और उसकी बहन उसके गले लगकर खुशी के मारे रो पड़ी.

 

 

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