मध्य प्रदेश सरकार निवेशकों को लुभाने के लिए कोई कदम उठाने में पीछे नहीं रहना चाहती. यही कारण है कि राज्य मंत्री-परिषद ने उद्योग संवर्धन नीति-2010 में तमाम संशोधन तो किए ही हैं साथ में नई सूचना प्रौद्योगिकी निवेश नीति-2012 को मंजूरी दी गई.
मंत्रिपरिषद की मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में संशोधित उद्योग संवर्धन नीति में फोकस सेक्टर तय किया गया है वहीं निवेश प्रस्तावों के त्वरित क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं.
नीति के अनुसार निजी क्षेत्र के औद्योगिक पार्क तथा हाईटेक पार्क के लिये विशेष सहायता दी जाएगी. न्यूनतम क्षेत्रफल 100 एकड़, न्यूनतम स्थापित इकाइयां 10 एवं न्यूनतम 250 व्यक्ति को नियमित रोजगार उपलब्ध कराने पर विकास व्यय के 15 प्रतिशत की दर से अधिकतम पांच करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी.
संशोधित योजना में सभी जिलों में स्थापित होने वाले औद्योगिक पार्को में लगने वाली इकाइयों को 'स' श्रेणी की सुविधा का लाभ मिलेगा. नीति में वर्तमान में स्थानीय निकायों द्वारा प्रभारित निर्यात कर को समाप्त किया गया है.
नई उद्योग संवर्धन नीति में निर्यात कर को समाप्त करने के लिये अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाने, नवीन औद्योगिक क्षेत्रों को इण्डस्ट्रियल टाउनशिप घोषित करने, विद्यमान अपात्र उद्योगों की सूची में वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य के परिप्रेक्ष्य में सकारात्मक पुनरीक्षण तथा केप्टिव पावर संयंत्र से उत्पादित बिजली के स्वयं के उपयोग पर ऊर्जा विकास उप-कर को समाप्त करने का प्रावधान किया गया है.
संशोधित नीति में औद्योगिक प्रयोजन के लिये उपयुक्त शासकीय तथा निजी भूमि का लैण्ड बैंक बनाने, लैण्ड बैंक में निजी भूमि को शामिल करने के लिए आवश्यक प्रावधान किए गए हैं. नीति में ऑटोमोबाइल एवं टेक्सटाइल सेक्टर के उद्योगों को भी रियायत दी गई है.
सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिये जिलों का वर्गीकरण समाप्त कर 'स' श्रेणी की सुविधा प्रदान की जाएगी और उद्योग निवेश संवर्धन सहायता तथा इनपुट टैक्स की प्रतिपूर्ति त्रैमासिक आधार पर की जायेगी. सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिये सभी जिलों में ब्याज अनुदान की दर पांच प्रतिशत, अवधि सात वर्ष तथा अधिकतम सीमा 20 लाख रुपए निर्धारित की गई है.
मध्यम विनिर्माण उद्योग के लिये जिलों के पूर्ववत वर्गीकरण के अनुरूप सुविधा प्रदान की जायेगी. अनुसूचित-जाति, अनुसूचित-जनजाति, महिला तथा नि:शक्तजन श्रेणी के लिये सहायता की दर पूर्ववत 6 प्रतिशत, अवधि 8 वर्ष तथा अधिकतम 25 लाख रुपये रहेगी.
संशोधित नीति के अनुसार औद्योगिक समूह को निवेश के आधार पर तीन वर्गो में रखा जाएगा और इस आधार पर उन्हें विशेष पैकेज दिया जाएगा. इसी तरह मंत्री-परिषद द्वारा राज्य की सूचना प्रौद्योगिकी निवेश नीति-2012 को मंजूरी दी गई.
नीति के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनियों को भूमि कलेक्टर गाइड-लाइन के 25 प्रतिशत दर पर दी जाएगी. भूमि 99 वर्ष तक के लिये लीज पर दी जा सकेगी. कम्पनी को 100 आई़टी़ और आई़टी़ई़एस़ प्रोफेशनल्स प्रति एकड़ रोजगार देना होगा, जिनमें से 50 प्रतिशत रोजगार मध्यप्रदेश के मूल निवासियों को देना अनिवार्य होगा.
इस नीति के मुताबिक सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों के लिये राज्य के श्रम कानूनों के प्रावधान शिथिल किए जाएंगे. कम्पनियों को 24 घंटे सातों दिन एवं तीन शिफ्ट में कार्य संचालन की अनुमति दी जाएगी. सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर निर्माण इकाइयों के प्रयोग में आने वाले आई़टी़ उत्पादों को पांच वर्ष के लिये प्रवेश-कर से छूट दी जायेगी.