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झारखंड: सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त, एक गिरफ्तार

जब्त दस्तावेजों में राजा रामगढ़ के कागजात से लेकर हुकुमनामा, रजिस्टर, दाखिल-खारिज के पेपर, रसीद, खतियान सहित हजारों पेपर हैं. गौरतलब है कि जमीन का यह गोरखधंधा काफी समय से चल रहा है. आरोप है कि जब एक जिलाधिकारी ने मामले की जांच शुरू की तो उसका तबादला महीने के भीतर कर दिया गया.

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हजारीबाग में एक शख्स के घर से दस्तावेज बरामद
हजारीबाग में एक शख्स के घर से दस्तावेज बरामद

झारखंड में सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. हजारीबाग जिले की पुलिस ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन के अवैध खरीद-फरोख्त के धंधे में लिप्त एक शख्स को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार शख्स के पास से बरामद नकली दस्तावेजों को देखकर पुलिस के भी होश उड़ गए.

दरअसल, इन फर्जी दस्तावेजों में साल 1926 के भी कागजात मिले हैं. हजारीबाग के डीएसपी दिनेश गुप्ता ने बताया कि जब्त दस्तावेजों में राजा रामगढ़ के कागजात से लेकर हुकुमनामा, रजिस्टर, दाखिल-खारिज के पेपर, रसीद, खतियान सहित हजारों पेपर हैं. गौरतलब है कि जमीन का यह गोरखधंधा काफी समय से चल रहा है. आरोप है कि जब एक जिलाधिकारी ने मामले की जांच शुरू की तो उसका तबादला महीने के भीतर कर दिया गया.

1926 के भी फर्जी दस्तावेज बरामद

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पुलिस के कब्जे में लिए गए दस्तावेज देखकर जमीन के जानकारों को भी गश आ जाएगा. दरअसल, देखने में ये वाकई 8 से 9 दशक पुराने लगते हैं लेकिन हकीकत में ये नकली हैं. ये दस्तावेज हजारीबाग के एक शख्स जैनुल आबदीन के घर से बरामद हुए हैं. इन जाली कागजातों में आज़ादी से पहले के स्टाम्प पेपर, जूडिशल और नॉन जूडिशल पेपर भी हैं. अब पुलिस इस मामले की पड़ताल में जुटी है.झारखंड के हजारीबाग और चौपारण इलाकों में सरकारी जमीन को अवैध तरीके से बेचने का काम काफी अरसे से जारी है.

पूर्व जिलाधिकारी पर भी आरोप

आरोप है कि हजारीबाग के चौपारण में पूर्व डीसी सुनील कुमार ने अपनी पत्नी के नाम से सरकारी ज़मीन के पेपर बनवाकर पेट्रोल पम्प खोल लिया. मामला संज्ञान में आने के बाद करीबन दो साल पहले जब तत्कालीन जिलाधिकारी मुकेश कुमार ने जांच के लिए एसआईटी गठित की तो उनका तबादला एक महीने में ही करा दिया. इसके बाद यहां एक आईएएस शशि रंजन ने भी ज़मीनों की जांच शुरू की तो उनका तबादला एक सप्ताह में ही हो गया. इन तबादलों के बाद पूरा मामला ही ठंडे बस्ते में चला गया.

जमीन से जुड़े ऐसे मामलों को मुख्यमंत्री जन-संवाद कार्यक्रम तक में उठाया जा चुका है लेकिन नतीजा अबतक सिफर ही रहा. गौरतलब है कि झारखंड में जमीन से जुड़े आधे से अधिक नक़्शे बिहार सरकार के पास थे जो हाल ही में झारखंड सरकार को सौंपे गए हैं. इन नक्शों की गैरमौजूदगी का फायदा अबतक जमीन के दलाल उठाते आये हैं. ऐसे में अब इन मामलों की जांच किसी ऐसे सक्षम एजेंसी से कराई जानी चाहिए. जिससे सच्चाई बाहर आ सके.

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