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राजस्थान-पंजाब के बाद झारखंड में कांग्रेस के लिए संकट, 4 विधायकों के बागी तेवर

अब ये शिकायत सीधे कांग्रेस झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह और राष्ट्रीय सचिव के वेणुगोपाल को बताई गई है. दोनों ही नेताओं से मुलाकात हो चुकी है और साफ कर दिया है कि इस समय ना संगठन की तरफ से कोई सुनवाई है और ना ही सरकार कोई तवज्जो दे रही है.

राजस्थान-पंजाब के बाद झारखंड में कांग्रेस के लिए संकट ( पीटीआई फोटो) राजस्थान-पंजाब के बाद झारखंड में कांग्रेस के लिए संकट ( पीटीआई फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • झारखंड में कांग्रेस के लिए मुसीबत
  • 4 विधायकों के बागी तेवर
  • मंत्री पद की आस, जताया विरोध

चुनावी हार की वजह से मुश्किलों में फंसी कांग्रेस पार्टी अब अंदरूनी लड़ाई से भी जूझती दिख रही है. राजस्थान, पंजाब के बाद अब झारखंड में भी कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी हो रही है. वहां भी कार्यकर्ता नाराज हैं और पार्टी के सामने अपनी शिकायत रख रहे हैं. बताया गया है कि कांग्रेस के चार विधायकों ने बागी तेवर अपना लिए हैं और जोर देकर कह रहे हैं कि पार्टी के कार्यकर्ता असहाय और कमज़ोर महसूस कर रहे हैं.

झारखंड में कांग्रेस के लिए मुसीबत

अब ये शिकायत सीधे कांग्रेस झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह और राष्ट्रीय सचिव के वेणुगोपाल को बताई गई है. दोनों ही नेताओं से मुलाकात हो चुकी है और साफ कर दिया है कि इस समय ना संगठन की तरफ से कोई सुनवाई है और ना ही सरकार कोई तवज्जो दे रही है. ऐसे में ये बागी विधायक नाराज हैं और अपना गुट बना विरोध कर रहे हैं. वैसे जिन विधायकों ने यूं बागी तेवर अपनाए हैं, वे पहले भी अपना विरोध दर्ज करवा चुके हैं.

विधायक हो रहे बागी

इस विरोध के बीच झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव, सीएम हेमंत सोरेन संग दिल्ली दौरे पर गए थे. वहां पर उनकी पार्टी के आला नेताओं से मुलाकात भी हुई और उनकी तरफ से झारखंड में कांग्रेस की जमीनी हकीकत के बारे में भी विस्तार से बताया गया. ऐसी खबरें थीं कि कांग्रेस झारखंड में अपना अध्यक्ष बदल सकती है. लेकिन अभी के लिए उन अटकलों पर खुद रामेश्वर ने ही विराम लगा दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी तरफ से सिर्फ शिष्टाचार भेंट की गई थी. 

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क्या है मांग?

अब अध्यक्ष पद को लेकर जरूर अटकलों का दौर थमा है, लेकिन राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी हलचल तेज हो गई है. कहा जा रहा है कि जल्द सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है. कांग्रेस के बागी विधायक चाहते हैं कि उनके गुट से अब किसी को मंत्री पद मिलना चाहिए. इस समय एक कैबिनेट पद खाली भी है, ऐसे में मांग उठ गई है कि वो पद उन्हें मिल जाए. लेकिन ऐसा होगा, मुश्किल लगता है.

बताया जाता है कि ये तय हुआ था कि 4 विधायकों पर एक मंत्री पद दिया जाएगा. ऐसे में कांग्रेस के 16 जीतकर आए थे तो उन्हें पहले ही 4 बर्थ दिए जा चुके हैं. JMM के खाते में 30 विधायक हैं और मुख्यमंत्री समेत 6 बर्थ उसके पास है. ऐसे में बागी विधायकों को इस बार भी राहत मिलती नहीं दिख रही है.

वहीं क्योंकि ऐसा होता नहीं दिख रहा, ऐसे में कांग्रेस के लिए एक और राज्य में मुसीबत खड़ी हो सकती है. राजस्थान, पंजाब के बाद यहां भी रुठों को मनाने की कवायद शुरू होती दिख सकती है. 

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