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झारखंड विधानसभा का बजट सत्र कल से शुरू, हंगामे के आसार

सरकार के फैसलों के विरोध में विपक्षी दलों ने विधानसभा की कार्यवाही बीते दो सत्रों से पूरी तरह से ठप कर रखी है. सदन बहिष्कार का यह सिलसिला 17 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र के दौरान भी देखने को मिल सकता है. विधानसभा का बजट सत्र 7 फरवरी तक चलेगा. सत्ता-पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक दूसरे की घेरेबंदी शुरू कर दी है.

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विधानसभा का बजट सत्र 7 फरवरी तक चलेगा विधानसभा का बजट सत्र 7 फरवरी तक चलेगा

सरकार के फैसलों के विरोध में विपक्षी दलों ने विधानसभा की कार्यवाही बीते दो सत्रों से पूरी तरह से ठप कर रखी है. सदन बहिष्कार का यह सिलसिला 17 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र के दौरान भी देखने को मिल सकता है. विधानसभा का बजट सत्र 7 फरवरी तक चलेगा. सत्ता-पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक दूसरे की घेरेबंदी शुरू कर दी है.

सरकार का कहना है कि सूबे की जनता स्थानीयता और सीएनटी/एसपीटी एक्ट पर लिए गए उसके फैसलों से काफी राहत महसूस कर रही है. इन फैसलों से लंबे समय से अटकी पड़ी युवाओं को नौकरी देने की घोषणा को अमल में लाया जा सकेगा. साथ ही साथ सदियों पुराने एक्ट में समय के अनुसार बदलने के सरकार के कदम से आदिवासियों को लाभ होगा और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी.

क्या सूबे की बीजेपी सरकार आदिवासी विरोधी है?
राज्य में सत्ता पर काबिज बीजेपी के बहुमत वाली एनडीए सरकार क्या आदिवासी विरोधी है. विपक्षी दलों की मानें तो सत्ता संभालने के बाद अबतक लिए गए निर्णय तो यही दर्शाते हैं कि बीजेपी सरकार आदिवासी विरोधी है. इन दलों का मानना है कि चाहे स्थानीयता का प्रश्न हो या वर्तमान में सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन पर सरकार का फैसला पूरी तरह से यहां के आदिवासियों के हितों के खिलाफ है. इन फैसलों को अगर अमल में लाया गया तो सूबे में बदअमनी फैल सकती है. विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार विकास के झूठे वायदे कर यहां कि भोली-भाली जनता को गुमराह करने में लगी है.

जनता को गुमराह कर रहा है विपक्ष
सरकार का कहना है कि विपक्ष बिना वजह विवाद खड़ा कर सूबे की जनता को गुमराह करने में लगा है. जिसे सरकार अपने तरीके से जबाब देगी. वहीं सरकार विपक्ष को साधने के लिए भी हथकंडे अपना रही है ताकि बजट सत्र बिना किसी व्यवधान के संपन्न हो सके. जबकि विपक्ष ने भी अबतक इन मुद्दों पर अपने तेवर ढीले नहीं किए हैं. राज्य में मुख्य विपक्षी दल जेएमएम का कहना है कि विपक्ष सदन में अपनी ड्यूटी करने से पीछे नहीं हटेगा. सरकार के हर उस फैसले का विरोध किया जाएगा जो आदिवासी और आम जनता के हितों के खिलाफ होगा. जबकि कांग्रेस का कहना है कि सदन सुचारू रूप से चलाना सरकार का दायित्व है और उसे विपक्ष से संवाद स्थापित करना होगा. गौरतलब है कि बीते 1 जनवरी को खरसावां में एक श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री पर जूते-चप्पल फेंके गए थे. इस मामले में 500 अज्ञात लोगों पर एफआईआर भी दर्ज है.

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