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रांची: सुरक्षा का हवाला देकर दिव्यांग बच्चे को इंडिगो की फ्लाइट में सवार होने से रोका, हंगामा

दिव्यांग बच्चे को फ्लाइट में न सवार होने देने की जानकारी जैसे ही दूसरे यात्रियों को लगी, रांची एयरपोर्ट पर हगामा शुरू हो गया. लेकिन एयरलाइन ने सुरक्षा का हवाला देकर बच्चे को फ्लाइट में सवार नहीं होने दिया.

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रांची एयरपोर्ट पर फ्लाइट में सवार होने के लिए इंतजार करता दिव्यांग बच्चा.
रांची एयरपोर्ट पर फ्लाइट में सवार होने के लिए इंतजार करता दिव्यांग बच्चा.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अगले दिन दूसरी फ्लाइट से बच्चे को भेजा गया घर
  • एयरलाइन का तर्क- बच्चा पैनिक और अग्रेसिव था

रांची एयरपोर्ट पर दिव्यांग बच्चे (specially-abled child) को इंडिगो की फ्लाइट में सवार होने से रोक दिया गया. इस मामले को लेकर काफी बवाल मचा और कई यात्रियों ने हंगामा शुरू कर दिया. इसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी और एयरलाइन कंपनी दोनों की तरफ से सफाई पेश की गई. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने दूसरे यात्रियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि बच्चा काफी पैनिक और अग्रेसिव था. वह दूसरे यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता था. हालांकि, अगले ही दिन रविवार को उसके परिवार को अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचा दिया गया.

मामला बढ़ने के बाद इंडिगो की तरफ से भी सफाई पेश की गई. एयरलाइन ने बयान जारी कर कहा कि बच्चे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया. इंडिगो ने बयान में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए 7 मई को विशेष रूप से दिव्यांग बच्चा परिवार के साथ उड़ान नहीं भर सका. वह पैनिक स्थिति में था. ग्राउंड स्टाफ ने अंतिम समय तक उसके शांत होने का इंतजार किया. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. एयरलाइन ने आगे कहा है कि उन्हें भेदभावपूर्ण व्यवहार के बजाय 'समावेशी' होने पर गर्व है.

बच्चे के परिवार को ठहरने की सुविधा दी

एयरलाइन ने कहा है कि यात्रियों को हुई असुविधा के लिए उन्हें खेद है. परिवार ने कहा है कि एयरलाइन ने उन्हें होटल में ठहरने की सुविधा दी और वे अगली सुबह उड़ान भर सके.उस प्लेन में ही सफर करने वालीं साथी यात्री मनीषा गुप्ता ने फेसबुक पोस्ट कर घटना की जानकारी दी है. मनीषा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उस फ्लाइट में ही यात्रा कर रहे डॉक्टरों के एक ग्रुप ने बच्चे और उसके माता-पिता की मदद करने की पेशकश की, लेकिन इंडिगो प्रबंधन ने इनकार कर दिया.

हादसा
रांची एयरपोर्ट पर बच्चे के परिजनों और एयरपोर्ट स्टाफ के बीच बहस भी हुई.

दिव्यांग के साथ भेदभाव की इजाजत नहीं

मनीषा ने आगे लिखा कि बच्चे के परिवार ने एयरलाइन से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक कोई भी एयरलाइन दिव्यांग यात्रियों के साथ भेदभाव नहीं कर सकती. मनीषा गुप्ता ने आगे लिखा कि 45 मिनट के गुस्से और झगड़े में परिवार के तीनों सदस्यों ने एक बार भी अपनी गरिमा नहीं खोई. आवाज तेज नहीं की और एक भी तर्कहीन शब्द नहीं बोला.

मां ने कर दी थी बच्चे की पिटाई

एयरपोर्ट के डायरेक्टर K L अग्रवाल ने आजतक को बताया कि ये पैसेंजर और एयरलाइन का मामला है. लेकिन उन्हें जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक बच्चा पैनिक था और कन्विंस करने के बावजूद शांत नहीं हो रहा था. बोर्डिंग गेट से पहले  बच्चे की मां को गुस्सा आ गया और उन्होंने उसकी पिटाई कर दी. इसके बाद एयरलाइन ने बच्चे को उस दिन नहीं भेजने का फैसला लिया.

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