झारखंड के एक गांव में आजादी के लगभग सात दशक के बाद बिजली आई है. सरकारी उदासीनता से त्रस्त होकर गांव के लोगों ने खुद चंदा इकट्ठा कर गांव में बिजली की व्यवस्था कर दी.
युवाओं का प्रयास
विश्वनाथडीह गांव बोकारो जिला मुख्यालय से सिर्फ 12 किलोमीटर दूर है. इस गांव के युवाओं ने बिजली लाने के लिए खुद से चंदा इकट्ठा कर पोल और तारों की खरीददारी की और उन्हें जमीन में गाड़ा. यहां तक की ट्रांसफार्मर से कनेक्शन जोड़ने का काम भी यहां के युवाओं ने ही किया.
नहीं बुलाया किसी नेता को
सरकारी उदासीनता के चलते इस गांव में बिजली नहीं पहुंच रही थी और जब गांव के लोग अधिकारियों और मंत्रियों के पास चक्कर लगाकर थक गए, तब अपने बुते यह संभव कर दिखाया और इसके उद्घाटन में किसी नेता और अधिकारी को फटकने तक नहीं दिया.
ऊर्जा मंत्री थे इसी क्षेत्र से
पिछली विधानसभा में राज्य के ऊर्जा मंत्री रहे राजेंद्र प्रसाद सिंह इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे. इसके बावजूद जिला मुख्यालय से सटे इस गावं तक बिजली नहीं पहुंची थी.
जिले के उपायुक्त हैं अनजान
इस तथ्य से अनजान जिले के उपायुक्त मनोज कुमार का कहना है कि ऐसा है तो यह सरकारी उदासीनता है और ऐसा नहीं होना चाहिए. झारखण्ड में हजारों गांव हैं, जहां आज तक विकास की रौशनी नहीं पहुंची है.