के खिलाफ श्रीनगर के लाल चौक में अलगाववादी नेताओं की अगुवाई में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ. शुक्रवार को अलगाववादी नेता यासीन मलिक के समर्थकों ने जवानों पर पत्थरबाजी की. हालात पर काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. हिंसक प्रदर्शन के लिए अलगाववादी नेता यासीन मलिक को हिरासत में ले लिया गया है.
Srinagar: Clash between police& Yasin Malik supporters, police throws tear gas shells at protestors
— ANI (@ANI_news)
गौरतलब है कि कश्मीरी पंडितों के लिए टाउनशिप बनाने की केंद्र सरकार की योजना पर कश्मीरी पंडितों के लिए अलग बस्ती बनाए जाने के खिलाफ शुक्रवार को अलगाववादियों ने कश्मीर बंद का ऐलान किया था. 
कश्मीरी पंडितों की को लेकर केंद्र सरकार खास टाउनशिप बनाना चाहती है. मुफ्ती सरकार ने भी अपनी
सहमति जताई थी. लेकिन विधानसभा में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद मुकर गए. मुफ्ती ने कहा कि घाटी में किसी के लिए अलग रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होगी. सभी संप्रदाय के लोग समाज में साथ ही रहेंगे. कश्मीरी पंडित मुस्लिमों के साथ रहेंगे.
यासीन मलिक ने कहा कि कश्मीरी पंडित वापस लौटें और हम सब के साथ रहें. अलग से टाउनशिप में रहना सही नहीं है.
24 घंटे में बयान से मुकरे मुफ्ती
टाउनशिप को लेकर मुख्यमंत्री मुफ्ती 24 घंटे में ही बयान से मुकर गए. 7 अप्रैल को राजनाथ सिंह से हुई मुलाकात के बाद सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि केंद्रीय गृहमंत्री ने कश्मीरी पंडितों के लिए टाउनशिप बनाने के लिए जमीन मांगी. मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद ने जल्द से जल्द जमीन मुहैया कराने का भरोसा दिया. लेकिन इसके 24 घंटे के भीतर ही मुफ्ती अपने बयान से पलट गए.

7 लाख कश्मीरी पंडितों को छोड़ना पड़ा था घर
90 के दशक में कश्मीर में आतंक की आग कुछ ऐसी दहकी कि करीब 7 लाख कश्मीरी पंडितों को घर बार छोड़कर कहीं और शरण लेने पर मजबूर होना पड़ा. अपनी मिट्टी से दूर आज भी ये शरणार्थियों की तरह ही रह रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में नई सरकार बनते ही हर बार की तरह इस बार भी उनकी घर वापसी की
बातें उठी. लेकिन, एक बार फिर सियासत बवंडर बन कर कश्मीरी पंडितों के सामने खड़ी हो गई.
मोदी सरकार ने बजट में इनकी वापसी के लिए पांच सौ करोड़ रुपये का इंतजाम किया है. यही नहीं केंद्र की पहल पर मुफ्ती सरकार ने प्रदेश की सरकारी नौकरियों में 3 हजार अतिरिक्त पदों को हरी झंडी दे दी है.