scorecardresearch
 

बर्फ की मोटी परत और जानलेवा ढलानें, सियाचिन-लद्दाख में हिमस्खलन के बीच सेना की पहरेदारी - VIDEO

भारत की भौगोलिक परिस्थितियां हर राज्यों की अलग है. ख़ासकर हिमालयी राज्यों की. यहां हाल में हुए बर्फबारी की वजह से हिमस्खलन का खतरा इन दिनों काफी बढ़ गया है. इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां में भी भारतीय सेना पूरे जोश के साथ सीमा रक्षा कर रही है. सेना और आपदा एजेंसियां अलर्ट पर हैं.

Advertisement
X
रास कारगिल में भारी बर्फबारी के बीच एवलांच का खतरा बढ़ा (Photo: ITG/ Ashraf Wani)
रास कारगिल में भारी बर्फबारी के बीच एवलांच का खतरा बढ़ा (Photo: ITG/ Ashraf Wani)

हिमालयी राज्यों में हालिया भारी और लगातार बर्फबारी के बाद हिमस्खलन (एवलांच) का खतरा गंभीर रूप से बढ़ गया है. उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अस्थिर बर्फ की परतें ढलानों पर जानलेवा जोखिम पैदा कर रही हैं. प्रशासन ने ऊंचाई वाले इलाकों में चेतावनी जारी की है और लोगों को अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है.

यह खतरा केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है. लद्दाख और सियाचिन जैसे अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में तैनात भारतीय सेना के जवानों के लिए हिमस्खलन लगातार जानलेवा साबित हो रहा है. 

अत्याधिक ऊंचाई, जमा देने वाली ठंड में LoC और आसपास के पहाड़ी इलाकों में सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती हिमस्खलन है. हालांकि, जवानों के हौसलों के सामने ये चुनौतियां छोटी पड़ जाती हैं. वो अडिग होकर सीमा की रक्षा कर रहे हैं. 

सेना के लिए बढ़ा जोखिम

हाल के सालों में कई घटनाओं में हिमस्खलन की चपेट में आकर बहुमूल्य सैनिकों ने अपने प्राण गंवाए हैं. अत्यधिक ऊंचाई, जमा देने वाली ठंड और अचानक होने वाले बर्फीले धंसाव सैनिकों के लिए सबसे बड़ा प्राकृतिक खतरा बने हुए हैं.

यह भी पढ़ें: लद्दाख में एवलांच का खतरा, 20 हजार फीट ऊंचे बर्फीले पहाड़ों पर पहरा दे रहे हिमवीर!

Advertisement

मौसम और भौगोलिक कारण 

विशेषज्ञों के अनुसार, भारी बर्फबारी के बाद तापमान में उतार-चढ़ाव और तेज हवाएं हिमस्खलन की आशंका को और बढ़ा देती हैं. कई बार बिना किसी पूर्व संकेत के बर्फ के पहाड़ खिसक जाते हैं, जिससे सैन्य चौकियों, सड़कों और शिविरों को भारी नुकसान होता है.

एजेंसियां अलर्ट पर

आपदा प्रबंधन एजेंसियां और सेना की विशेष इकाइयां अलर्ट पर हैं, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण रहता है. हिमालय की गोद में तैनात जवानों की सुरक्षा एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गई है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement