जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं. नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने कॉलेज को दी गई MBBS कोर्स की अनुमति का पत्र (LoP) तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया है. अचानक किए गए निरीक्षण में मानकों की भारी अनदेखी पाए जाने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है.
MARB की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए काउंसलिंग के दौरान कॉलेज में एडमिशन लेने वाले सभी छात्रों को केंद्र शासित प्रदेश के अन्य मेडिकल संस्थानों में सुपरन्यूमेरी सीटों पर एडजस्ट किया जाएगा.
इसका मतलब है कि एडमिशन लेने वाले किसी भी छात्र को इस फैसले के कारण MBBS सीट नहीं खोनी पड़ेगी. इसके बजाय, उन्हें जम्मू और कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में उनकी नियमित स्वीकृत सीटों के अलावा एडजस्ट किया जाएगा.
इस रीलोकेशन को लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश के नामित स्वास्थ्य और काउंसलिंग अधिकारियों की होगी, जिन्हें आदेश की कॉपी के माध्यम से इस फैसले के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया गया है.
आदेश के अनुसार, यह गैर-अनुपालन एक अचानक निरीक्षण के दौरान सामने आया. NMC का यह फैसला तुरंत प्रभावी है. संस्थान ने 5 दिसंबर 2024 और 19 दिसंबर 2024 को जारी NMC के सार्वजनिक नोटिस के तहत शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए 50 MBBS सीटों के साथ एक नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए आवेदन किया था.
आवेदन पर कार्रवाई करने के बाद MARB ने 8 सितंबर 2025 को MBBS कोर्स शुरू करने की अनुमति दी थी. आदेश में कहा गया है कि अनुमति पत्र कई शर्तों के अधीन था, जिसमें जरूरी मानकों को बनाए रखना, अचानक निरीक्षण की अनुमति देना, सटीक जानकारी प्रदान करना और नवीनीकरण से पहले कमियों को दूर करना शामिल था.
उमर अब्दुल्ला बोले- बच्चे वहां पढ़ना भी नहीं चाहेंगे
सूबे के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले में कहा, ''उन बच्चों ने मेहनत करके सीट हासिल की है, यह किसी का उन पर एहसान नहीं है- न मेरा, न यूनिवर्सिटी का. उन्होंने परीक्षा पास करके सीट प्राप्त की है. अब अगर आप उन्हें वहां नहीं पढ़ाना चाहते, तो कहीं और उनका इंतजाम कीजिए. वे किसी के एहसान पर नहीं आए हैं. वैसे भी, मुझे लगता है कि आज के हालात में वे बच्चे वहां पढ़ना भी नहीं चाहेंगे. अगर मैं उन बच्चों का माता-पिता होता, तो डर के मारे उन्हें वहां नहीं भेजता. मैं तो कहता हूं कि भारत सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय मेहरबानी करके इन बच्चों का किसी अन्य मेडिकल कॉलेज में इंतजाम करें. हम उन्हें वहां पढ़ाएंगे. हमें उन बच्चों को ऐसी जगह नहीं पढ़ाना जहां इतनी सियासत हो रही हो. उस मेडिकल कॉलेज को बंद कर दीजिए; वह खोलने के लायक ही नहीं है. इन बच्चों को किसी अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडजस्ट कीजिए, हम उनकी शिक्षा का बंदोबस्त करेंगे. हमें उनका मेडिकल कॉलेज नहीं चाहिए, चाहे बंद कर दो.''
अचानक निरीक्षण में खुली पोल, मिली ये कमियां?
MARB ने गलत बयानी, गैर-अनुपालन या नियामक मानदंडों को पूरा करने में विफलता के मामले में अनुमति वापस लेने या रद्द करने का अधिकार सुरक्षित रखा था. अनुमति पत्र जारी होने के बाद, कमीशन को कॉलेज में अपर्याप्त बुनियादी ढांचे, क्लिनिकल सामग्री और योग्य पूर्णकालिक शिक्षण संकाय और रेजिडेंट डॉक्टरों के बारे में कई शिकायतें मिलीं. शिकायतों में अन्य मुद्दों के अलावा अपर्याप्त इनपेशेंट और आउटपेशेंट लोड और खराब बेड-ऑक्यूपेंसी आंकड़ों की ओर भी इशारा किया गया था.
नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019 की धारा 28(7) के तहत कार्रवाई करते हुए मूल्यांकनकर्ताओं की एक टीम ने 2 जनवरी, 2026 को कॉलेज में निरीक्षण किया. यह निरीक्षण बाद में सामने आई प्रतिकूल निष्कर्षों का आधार बना. मूल्यांकन रिपोर्ट में संस्थान में फैकल्टी की संख्या, क्लिनिकल सामग्री और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी कमियों को उजागर किया गया.
इसमें निर्धारित आवश्यकता के मुकाबले टीचिंग फैकल्टी में 39 प्रतिशत और ट्यूटर, डेमोंस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट में 65 प्रतिशत की कमी शामिल थी. मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी मानदंडों से काफी कम पाई गईं, दोपहर 1 बजे OPD में 182 मरीज थे, जबकि 400 की जरूरत थी और बेड ऑक्यूपेंसी 45 प्रतिशत थी, जबकि 80 प्रतिशत की जरूरत थी.
रिपोर्ट के अनुसार, इंटेंसिव केयर यूनिट में औसतन केवल 50 प्रतिशत बेड भरे हुए थे, जबकि हर महीने औसतन लगभग 25 डिलीवरी होती थीं, जिसे MARB ने बहुत कम बताया. इसके अलावा, कुछ विभागों में छात्रों के प्रैक्टिकल लैब और रिसर्च लैब उपलब्ध नहीं थे.
लेक्चर थिएटर न्यूनतम मानक जरूरतों के अनुरूप नहीं थे, लाइब्रेरी में 1500 किताबों की आवश्यकता के मुकाबले केवल 744 किताबें थीं और 15 आवश्यक पत्रिकाओं के मुकाबले केवल दो पत्रिकाएं थीं.
रिपोर्ट में ART सेंटर और MDR-TB के प्रबंधन के लिए सुविधाओं की अनुपस्थिति, साथ ही कुछ विभागों में इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी कमियों, जिसमें अलग पुरुष और महिला वार्ड की कमी शामिल है, का भी उल्लेख किया गया.
5 की जरूरत के मुकाबले केवल दो ऑपरेशन थिएटर चालू थे, OPD क्षेत्र में कोई माइनर OT नहीं था और पैरा-क्लिनिकल विषयों के लिए उपकरण अपर्याप्त पाए गए.
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मूल्यांकन पर विचार करने के बाद आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि संस्थान मेडिकल कॉलेज की स्थापना और संचालन के लिए UGMSR-2023 में निर्दिष्ट न्यूनतम मानक जरूरतों को पूरा करने में विफल रहा है. नतीजतन, NMC चेयरमैन की मंज़ूरी से, MARB ने तुरंत प्रभाव से परमिशन लेटर वापस लेने का फैसला किया.
परमिशन लेटर वापस लेने के अलावा MARB ने ओरिजिनल परमिशन की शर्तों के अनुसार, कॉलेज द्वारा दी गई परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को लागू करने का भी फैसला किया है. यह कदम संस्थान के लिए नियमों का पालन न करने के वित्तीय और रेगुलेटरी नतीजों को दिखाता है.
BJP प्रतिनिधिमंडल और जेपी नड्डा से मुलाकात
इस मेडिकल कॉलेज में एडमिशन प्रक्रिया को लेकर पहले ही विवाद चल रहा था. हाल ही में एक BJP प्रतिनिधिमंडल और श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं.
(इनपुट एजेंसी से भी)