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शेख अब्दुल्ला की जयंती पर बोले NC नेता, फारूक-उमर की जल्द से जल्द हो रिहाई

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला की आज (गुरुवार) को 114वीं जयंती थी. इस मौके पर श्रीनगर के नसीमबाग इलाके में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के मकबरे के पास किसी आयोजन की इजाजत नहीं दी गई.

फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला (फोटो: पीटीआई) फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला (फोटो: पीटीआई)

  • नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला की 114वीं जयंती
  • मकबरे के पास किसी आयोजन की नहीं मिली इजाजत
  • 5 अगस्त से ही नजरबंद हैं घाटी के प्रमुख नेता

जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीने जाने के बाद से ही घाटी के सभी प्रमुख नेता नजरबंद हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता देवेंद्र सिंह राणा ने गुरुवार को केंद्र सरकार से सभी प्रमुख नेताओं पर लगी पाबंदी हटाने की अपील की है.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला की आज (गुरुवार) को 114वीं जयंती थी. इस मौके पर श्रीनगर के नसीमबाग इलाके में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के मकबरे के पास किसी आयोजन की इजाजत नहीं दी गई.

ऐसे में नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता देवेंद्र सिंह राणा की अगुआई में जम्मू स्थित पार्टी ऑफिस में ही खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस मौके पर पार्टी के 100 से अधिक नेताओं ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी.

देवेंद्र सिंह राणा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से घाटी में सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है. वहीं केंद्र सरकार पर हमला करते हुए राणा ने कहा, ''मोबाइल और इंटरनेट सेवा बंद होने की वजह से घाटी के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. घाटी के सभी प्रमुख नेताओं को जल्द से जल्द रिलीज किया जाए.''

वहीं आजतक से बात करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा, ''प्रशासन कम से कम आज के दिन हमारे दोनों प्रमुख नेता फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला को बाहर निकलने की इजाजत दे. जिससे वो पार्टी संस्थापक के मकबरे पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें.''

घाटी में पार्टी का अगला कदम क्या होगा? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारे दोनों नेताओं के बाहर निकलने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.

क्या पर्दे के पीछे फारूक अब्दुल्ला के साथ सरकार की कोई बातचीत चल रही है? इस सवाल के जवाब में देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है.

बता दें, शेख अब्दुल्ला के 8 सितंबर 1982 को निधन के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास में यह पहला मौका है जब उनके जन्मदिन पर फातिहा पढ़ने (विशेष दुआ) की इजाजत नहीं दी गई.

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