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JK में सरकार नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता, मुफ्ती सरकार की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं राजनाथ

अलगाववादी नेता मशरत आलम भट की रिहाई ने संसद के साथ सियासत में भी भूचाल ला दिया है. लेकिन अलगावादी हुर्रियत कांफ्रेंस और अलगाववादी नेताओं की रिहाई चाहती है.

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Masarat Alam
Masarat Alam

अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई पर मचे सियासी घमासान के बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बीजेपी के लिए जम्मू कश्मीर में सरकार नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता है. गृहमंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री से मेरी हाल फिलहाल कोई बातचीत नहीं हुई है और ना मैंने कोई एडवाइजरी जारी की है. हालांकि गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राज्य सरकार से सफाई मांगी है.

गृह मंत्री ने आगे कहा कि मसरत की रिहाई पर जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से दी गई रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है. लिहाजा केंद्र सरकार ने स्पष्टीकरण मांगा है. हालांकि अलगाववादी नेता मसरत आलम रिहाई मामले में नया मोड़ आ गया है. सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर गृह मंत्रालय की चिट्ठी पर केंद्र सरकार से सफाई मांगी है. ये चिट्ठी जम्मू कश्मीर गृह मंत्रालय ने 4 फरवरी को लिखी थी. वही राज्यसभा में भी मसरत मामले पर हंगामा हुआ, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र ने इस मामले पर जम्मू कश्मीर सरकार से सफाई मांगी है. जानिए, कौन है मसरत आलम?

मसरत आलम की रिहाई के मामले में एक और नया खुलासा हुआ है. इसमें कहा गया है कि मसरत आलम की रिहाई की तैयारी मुफ्ती सरकार के पहले से हो रही थी और प्रक्रिया फरवरी में शुरू हुई थी. इस संदर्भ में डीएम ने गृह मंत्रालय को भी चिट्ठी लिखी थी. दूसरी ओर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से बात की है. शाह ने मुफ्ती को दोनों पार्टियों के बीच बने न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर ध्यान देने को कहा है.

अलगाववादी नेता मशरत आलम भट की रिहाई ने संसद के साथ सियासत में भी भूचाल ला दिया है. लेकिन अलगावादी हुर्रियत कांफ्रेंस और अलगाववादी नेताओं की रिहाई चाहती है. चौंकाने वाली बात ये है कि हुर्रियत 500 से ज्यादा बंदियों की रिहाई चाहती है. इन नेताओं की सूची में अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी के पति डॉ. आशिक हुसैन फकतू, शीर्ष अलगाववादी विचारक डॉ. मुहम्मद शफी खान और पुलिस कांस्टेबल से मिलिटेंट बने और फिर अलगाववादी बने गुलाम कादिर भट्ट जैसे अलगाववादी नेता शामिल है.

जम्मू कश्मीर सरकार में अपनी सहयोगी पार्टी पीडीपी के फैसलों के चलते बैकफुट पर नजर आ रही बीजेपी की मुश्किलें और बढ़ सकती है. पीडीपी सरकार एंटी इंडिया आजादी लॉबी के अलगाववादी नेताओं के साथ रहम बरत रही है और मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और अलगाववादी नेताओं को रिहा करके हुर्रियत को खुश कर सकते हैं.

रिहाई की ताजा मांग ने तब जोर पकड़ा, जब 4 मार्च को मुख्यमंत्री मोहम्मद सईद ने आदेश जारी कर उन बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले नहीं है.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता अयाज अकबर ने कहा, 'कश्मीर मुद्दे के पक्ष में आवाज उठाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया था. हमारा मानना है कि उनके खिलाफ के सारे मामले फर्जी है.'

अलगाववादी नेताओं का नाम लेते हुए अकबर ने कहा, 'लोगों की गिरफ्तारी के पक्ष में कोई दलील नहीं दी जा सकती, लोगों को सालों तक जेलों में रखा गया और कश्मीरी युवाओं के खिलाफ हजारों मामले दर्ज किए गए. मानवाधिकारों के उल्लंघन का इससे खराब उदाहरण क्या हो सकता है.'

दूसरी ओर बीजेपी ने मसरत की रिहाई का जबरदस्त विरोध किया है और राज्य सरकार से उसे दोबारा पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार करने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि मसरत को रिहा करने का फैसला बीजेपी से सलाह किए बिना लिया गया है.

मुफ्ती को सौंपे ज्ञापन में बीजेपी विधायकों ने कहा कि सरकार बनने के हफ्ते भर के भीतर पीडीपी ने अपने बयानों और फैसलों से बीजेपी के शर्मनाक स्थिति पैदा कर दी है. इन सबके बीच एंटी इंडिया और पाकिस्तान समर्थक मसरत आलम की रिहाई ने बीजेपी की चिंताओं को बढ़ा दिया है.

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