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मसरत आलम की रिहाई पर LS में बोले पीएम मोदी, 'हमें कोई देशभक्ति न सिखाए'

अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई के मामले पर सोमवार को लोकसभा में हंगामे से शुरुआत हुई. पीएम मोदी ने लोकसभा में जवाब देते हुए कहा कि आलम की रिहाई से देश के आक्रोश के स्वर में मैं अपना स्वर मिलता हूं. जम्मू कश्मीर सरकार ने केंद्र सरकार से कोई सलाह नहीं ली थी.

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आलम की रिहाई का हो सकता है विरोध आलम की रिहाई का हो सकता है विरोध

अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई के मामले पर सोमवार को लोकसभा में हंगामे से शुरुआत हुई. पीएम मोदी ने लोकसभा में जवाब देते हुए कहा कि आलम की रिहाई से देश के आक्रोश के स्वर में मैं अपना स्वर मिलता हूं. जम्मू कश्मीर सरकार ने केंद्र सरकार से कोई सलाह नहीं ली थी. भारत सरकार को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

मोदी ने कहा कि हमें कोई देशभक्ति न सिखाएं. ये किसी दल का नहीं पूरे देश का आक्रोश है. आतंकवाद और अलगाववाद में अंतर नहीं है. ऐसी कोई भी हरकत स्वीकार नहीं की जाएगी. विपक्ष भी इस पर आक्रोश जताए. खड़गे ने मोदी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पीएम मोदी को जानकारी नहीं थी तो पीडीपी से समर्थन वापस लें.

 गृहमंत्री की सफाई:
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मसरत आलम की रिहाई की जानकारी मिलते ही हमने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी. मसरत की रिहाई पर मुफ्ती सरकार की रिपोर्ट से हम लोग संतुष्ट नहीं हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि मसरत की रिहाई कानूनों का पालन करके ही हुई थी. मसरत पर देशद्रोह सहित कुल 27 मामले थे. हम राजनीति देश चलाने के लिए करते हैं. देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

विपक्षी दल इस मामले पर सदन में चर्चा की मांग कर रहे हैं. बीजेपी मसरत की रिहाई मामले में बैकफुट पर है. रिहाई के विरोध में कांग्रेस ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया. वेंकैया नायडू ने कहा कि मसरत की रिहाई में केंद्र का कोई हाथ नहीं है. अगर जरूरत हुई तो पीएम मोदी लोकसभा में जवाब देंगे.कांग्रेस पीएम मोदी के बयान पर अड़ गई थी.

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि 'प्रधानमंत्री जवाब दो, जवाब दो...' मसरत आलम की रिहाई को लेकर विपक्षी दल काफी विरोध जता रहे थे.

एक्शन में दिखीं सोनिया गांधी
खड़गे के लोकसभा में बयान का समर्थन करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि खड़गे जी को बोलने दीजिए. दरअसल, वेंकैया नायडू ने कहा था कि खड़गे जी आपको बोलने का मौका दिया जा चुका है, बैठ जाइए. इसकते जवाब में सोनिया ने कहा कि खड़गे को बोलने दीजिए. हालांकि कुछ देर बाद सोनिया ने खड़गे से कहा कि आप अपनी बात रख चुके हैं. बैठ जाइए.

जम्मू कश्मीर सरकार ने MHA को सौंपी रिपोर्ट
जम्मू कश्मीर सरकार ने मसरत आलम रिहाई मामले में गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुफ्ती सरकार से इस बाबत रिपोर्ट मांगी थी. अपनी रिपोर्ट में मुफ्ती सरकार ने कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही मसरत को रिहा किया गया था. रिपोर्ट में 1993 में मसरत की रिहाई के आदेश का भी जिक्र किया गया है.

सूत्रों के मुताबिक, आलम के खिलाफ अब भी करीब 15 केस लंबित हैं. आलम से इन केसों को नहीं हटाया गया है. मसरत की रिहाई में इस बात का प्रावधान रखा गया है कि जांच के लिए मसरत को बुलाया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आलम के खिलाफ ज्यादातर मामले 1993 से लेकर 2010 के बीच के हैं. आलम के खिलाफ दायर ज्यादातर केसों में कोर्ट से उसे जमानत दी गई है. ऐसे में आलम को रिहा करना गलत नहीं है.

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की सरकार है. जम्मू कश्मीर के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के मसरत आलम की रिहाई के फैसले को लेकर बीजेपी कड़ा विरोध जता चुकी है. बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने पीडीपी से इस बाबत कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि इस तरह के फैसलों को बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जम्मू कश्मीर बीजेपी अध्यक्ष जुगलकिशोर शर्मा ने कहा कि हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी. इस फैसले में हम शामिल नहीं हैं. आलम की रिहाई को लेकर बीजेपी पीडीपी से औपचारिक विरोध दर्ज करा चुकी है. मुफ्ती के फैसले को शर्मा ने नामंजूर करार दिया.

गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर सरकार से मांगी रिपोर्ट
मसरत आलम की रिहाई को लेकर गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर सरकार से रिपोर्ट मांगी है. गृह मंत्रालय ने मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार से पूछा है कि किन परिस्थितियों में मसरत आलम को रिहा किया गया, जबकि उसके खिलाफ 15 केस लंबित हैं. रविवार की छुट्टी होने के बावजूद गृहमंत्रालय के कश्मीर डिवीजन के अधिकारी इस मसले पर तथ्य जुटाते देखे गए. सूत्रों के मुताबिक, इस मसले पर गृहसचिव एलसी गोयल ने जम्मू कश्मीर के डीजीपी से फोन पर बात की.

कांग्रेस ने मोदी पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि पीएम बताएं अलगाववादी नेता मसरत राजनीतिक बंदी था या आतंकी. क्या मसरत आलम बीजेपी के राष्ट्रवाद का नया चेहरा हैं.

जम्मू बीजेपी विधायकों में रोष
जम्मू कश्मीर सरकार में भागीदारी के बावजूद स्थानीय बीजेपी ने मसरत आलम को रिहा करने के फैसले की निंदा की है. नौशेरा के बीजेपी विधायक ने रविंदर रैना ने धमकी भरे आंदाज में कहा कि बीजेपी देश की सुरक्षा और स्वाभिमान के लिए सरकार की कुर्बानी को तैयार है.

'छोटी जेल से बड़ी जेल में आया'
अलगाववादी नेता मसरत आलम ने जेल से छूटते ही विवादित बयान देते हुए कहा कि मैंने अपनी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा जेल में ही बिताया है. जेल से बाहर निकलने पर आलम ने कहा कि मैं छोटी जेल से निकलकर बड़ी जेल में आ गया हूं. अगर मुझे दोबारा गिरफ्तार किया जाता है, तो मैं इसके लिए तैयार हूं.

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