scorecardresearch
 

J-K: G-23 की आज पहली सियासी परीक्षा, समर्थकों के इस्तीफों की झड़ी के बीच आज गुलाम नबी आजाद की कठुआ में रैली

जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में भी बगावत के सुर तेज हो गए हैं. कई नेताओं के इस्तीफे के बाद आज गुलाम नबी आजाद कठुआ में एक रैली करने जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इसके जरिए आजाद अपनी सियासी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

X
गुलाम नबी आजाद. (फाइल फोटो) गुलाम नबी आजाद. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में भी बगावत!
  • कठुआ में आज गुलाम नबी की रैली

जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. बुधवार शाम को कई पूर्व मंत्री और विधायकों के इस्तीफे के बाद गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) एक रैली करने जा रहे हैं. ये रैली दोपहर 12:30 बजे कठुआ के दयाला चाक पर होगी. इसे G-23 की सियासी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. 

गुलाम नबी आजाद उन 23 नेताओं में हैं, जिन्होंने पिछले साल अगस्त में सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को चिट्ठी लिख कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने की मांग की थी. इसलिए इसे G-23 कहा जाता है. इस ग्रुप में कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) समेत कई बड़े नेता हैं. 

गुलाम नबी आजाद की रैली ऐसे वक्त में हो रही है, जब एक दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के कई नेताओं ने इस्तीफा दिया है. ऐसे में माना जा रहा है कि आजाद इस्तीफों के जरिए आलाकमान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, रैली के जरिए अपनी सियासी ताकत भी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. 

ये भी पढ़ें-- किताब पर बवाल पर सलमान खुर्शीद की सफाई, गुलाम नबी आजाद बोले - हिंदुत्व की जिहादी इस्लाम से तुलना गलत

बुधवार को 4 पूर्व मंत्री और 3 पूर्व विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देने वाले सभी गुलाम नबी आजाद के करीबी माने जाते हैं. इस्तीफा देने में पूर्व मंत्री जीएम सरूरी, जुगल किशोर, विकार रसूल और डॉ. मनोहर लाल हैं. इनके अलावा गुलाम नबी मोंगा, नरेश गुप्ता और अमीन भट का नाम भी शामिल है. बागी विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और जम्मू-कश्मीर की प्रभारी रजनी पाटिल को अपना इस्तीफा भेज दिया है. 

इस्तीफा देने वाले नेताओं ने पार्टी लीडरशिप पर 'शत्रुतापूर्ण' रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने नजरअंदाज किए जाने का भी आरोप लगाया है. बागियों का कहना है कि पिछले एक साल से मांगों को उठाया जा रहा है, लेकिन उनकी सुनी नहीं जा रही है. वहीं, मीर को निशाने पर लेते हुए नेताओं ने कहा कि उन्होंने प्रदेश में पार्टी को 'खतरनाक' स्थिति में डाल दिया है और उनके आने के बाद से कई नेता कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टी में जा रहे हैं. साथ ही ये आरोप लगाया गया है कि कुछ नेताओं ने प्रदेश में पार्टी को हाईजैक कर लिया है.

न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले बताया है कि कांग्रेस आलाकमान साफ कर चुका है कि कोई भी शिकायत हो तो सीधे पार्टी से बात करें, न कि मीडिया के जरिए. एक सीनियर कांग्रेस नेता ने बताया कि बागियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें