कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही परिवहन के सार्वजनिक साधनों के पहिए थमे हुए हैं. ऐसे में संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) और राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) के आयोजन के खिलाफ सेंटर तक पहुंचने में अपनी परेशानियों का हवाला देकर छात्रों ने आंदोलन भी किया था.
इन सबके बीच हिमाचल प्रदेश में भारतीय रेल ने महज एक परीक्षार्थी और उसके अभिभावक के लिए सात डब्बे की टॉय ट्रेन का परिचालन कर उदाहरण प्रस्तुत किया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कालका-शिमला हेरिटेज लाइन पर एक परीक्षार्थी को नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) और नवल एकेडमी परीक्षा के लिए सात डब्बे की विशेष ट्रेन का परिचालन कर सोलन से शिमला पहुंचाया.
बताया जाता है कि अनुराग शर्मा अपने पिता के साथ सोलन से टॉय ट्रेन में सवार हुए. अनुराग और उनके पिता को लेकर अहले सुबह 4.30 बजे सोलन से रवाना हुई टॉय ट्रेन 7.10 बजे शिमला पहुंची. अनुराग ने समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचकर परीक्षा दी. परीक्षाएं देने के बाद अनुराग फिर इसी विशेष ट्रेन से वापस सोलन लौटे.
अनुराग और उनके पिता को लेकर यह ट्रेन शाम 6.30 बजे शिमला से वापस सोलन के लिए रवाना हुई. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक चीफ कॉमर्शियल इंस्पेक्टर एएस ठाकुर ने बताया कि ट्रेन में परीक्षार्थी अनुराग और उनके पिता के अलावा कोई भी पैसेंजर नहीं था. गौरतलब है कि कालका-शिमला रेलवे, भारतीय पर्वतीय रेलवे का अंग है. इसे यूनेस्को ने साल 2008 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था.
हरियाणा के कालका से हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को जोड़ने वाले 96 किलोमीटर लंबे इस रेल रूट पर 102 सुरंग और 988 पुल हैं. बता दें कि अभी चंद रोज पहले ही भारतीय रेल को महज एक पैसेंजर के लिए 535 किलोमीटर ट्रेन चलानी पड़ी थी. तब मुगलरसाय से रांची जाने के लिए राजधानी एक्सप्रेस में सवार हुई काशी हिंदू विश्वविद्यालय की छात्रा अनन्या की जिद के आगे झुकते हुए रेलवे को गोमो, गया के रास्ते ट्रेन चलानी पड़ी थी.