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एक-एक डोज की कीमत...कैसे हिमाचल प्रदेश में शून्य से भी नीचे हैं वैक्सीन वैस्टेज?

अन्य राज्यों की ही तरह हिमाचल प्रदेश में भी वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है. रोजाना बड़ी संख्या में लोगों को टीका लगाया जा रहा है. कई राज्यों में वैक्सीन की बर्बादी हो रही है तो वहीं, हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य से भी कम है.

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और कोरोना टीकाकरण मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और कोरोना टीकाकरण
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हिमाचल प्रदेश में शून्य से भी कम है वैक्सीन वेस्टेज
  • झारखंड में 37 फीसदी से अधिक बर्बाद हुई वैक्सीन
  • वैक्सीनेशन के लिए अलग तरह की रणनीति अपना रहे HP के अधिकारी

कोरोना वैक्सीनेशन के तेज होते अभियान के बीच वेस्टेज बड़ी चिंता अब भी बनी हुई है. झारखंड जैसे राज्य में वैक्सीन वेस्टेज 37 फीसदी है, तो वहीं, हिमाचल प्रदेश ने अन्य राज्यों के लिए उदाहरण सेट किया है. राज्य में शून्य से कम या फिर निगेटिव में वैक्सीन वेस्टेज का आंकड़ा है. खरीदी गई वैक्सीन के वेस्टज का आंकड़ा जहां -2 है और राज्य के जरिए खरीदी गई वैक्सीन का आंकड़ा महज -1 ही है.

शिमला के सबसे बड़े अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में भी टीकाकरण अभियान चल रहा है. यहां के वैक्सीनेशन सेंटर के नोडल इंचार्ज डॉ. साद रिजवी ने वैक्सीन वेस्टेज पर बात करते हुए कहा, ''हम अपने सेंटर पर वैक्सीन की एक भी डोज बर्बाद नहीं करते हैं. हमारा मोटो एक डोज-एक जिंदगी है. हम लोगों से इंतजार करने के लिए कहते हैं और वे हमारा साथ भी देते हैं.''

एक वायल से लगाई जाती हैं साढ़े दस डोज
उन्होंने आगे कहा, ''वैक्सीन की एक वायल खुलने के बाद सिर्फ चार घंटों तक ही असरदार होती है. एक वायल से हम लोग साढ़े दस डोज से ज्यादा लगाते हैं. हर वायल में चूंकि एक्स्ट्रा डोज होती हैं, इस वजह से हमने टीका लगाने वाले अधिकारियों को अच्छे से ट्रेनिंग दी है.'' उन्होंने कहा, ''सुबह 11:30 बजे के बाद अगर लोग नहीं आते हैं, तो हम 18+ श्रेणी के हर व्यक्ति को कॉल करते हैं. हमारे पास उनके फोन नंबरों की पूरी लिस्ट होती है और हम यह सुनिश्चित करते हैं कि उनमें से सभी लोग जरूर आएं. हमने जिला स्वास्थ्य अधिकारियों से अनुरोध किया है कि हमें अगली संख्या का स्लॉट भेजें और उन्हें उसी दिन पब्लिश करें, ताकि अधिक लोग कोविन पर बुकिंग करवा सकें.''

ऐसे बनाई जाती है टीका सत्र की योजना
राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सदस्य सचिव डॉ. निपुण जिंदल का कहना है कि जब सेशन की योजना बनाई जाती है और लोग नहीं आते हैं, तो हम उस सेशन को आगे बढ़ा देते हैं और टीके की जानकारी फिर पब्लिश करते हैं, ताकि आस-पास के लोग इसे देख सकें और बुकिंग करवा सकें. साथ ही, हमने पंचायती राज संस्थाओं को शामिल किया है और उनके लिए हेल्प डेस्क बनाई है. हिमाचल प्रदेश में 17 मई से 18 साल से अधिक उम्र वाले लोगों के लिए वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत हुई थी. हालांकि, जल्द ही वैक्सीन की समस्या भी शुरू हो गई थी और तब तक इस अभियान को रोकना पड़ा था, जब तक अगली खेप नहीं पहुंच गई थी. 

हफ्ते में दो दिन लग रहा 18+ वालों को टीका
प्रदेश सरकार एक हफ्ते में दो दिन (सोमवार और गुरुवार) 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण करती है. बाकी बचे हुए दिनों में फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ 45 से ज्यादा उम्र वाले लोगों को वैक्सीन लगाई जाती है. अभी राज्य में पुणे स्थित कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई गई कोविशील्ड ही लगाई जा रही है. हिमाचल प्रदेश में टूरिज्म को देखते हुए 18 साल से ज्यादा उम्र के युवाओं का तेजी से वैक्सीनेशन करने की जरूरत है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल सके. राज्य अब सेकंड लाइन वर्कर्स का भी टीकाकरण कर रहा है जैसे- पेट्रोल पंप कर्मचारी, स्कूल टीचर्स आदि.

किस राज्य में कितने फीसदी है वैक्सीन वेस्टेज?
कई राज्यों में वैक्सीन की बर्बादी का आंकड़ा डबल डिजिट के पार पहुंच गया है. झारखंड में जहां यह 37.3 फीसदी है, तो छत्तीसगढ़ में 30.2 फीसदी वैक्सीन की बर्बादी हुई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा उपलब्ध डेटा के अनुसार, तमिलनाडु में वैक्सीन की 15.5 फीसदी बर्बादी हो चुकी है. जम्मू-कश्मीर में 10.8% और मध्य प्रदेश 10.7% वैक्सीन वेस्टेज हुआ है, जबकि यह राष्ट्रीय स्तर पर औसत सिर्फ 6.3 फीसदी ही है. केंद्र सरकार लगातार राज्यों से कम-से-कम वैक्सीन वेस्टेज करने के लिए अपील कर रही है.

 

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